सीबीएसई का पोस्ट-रिजल्ट री-इवैल्यूएशन पोर्टल अब 1 जून 2026 से खुलेगा। OSM विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान निशाने पर हैं। यह फ़ैसला तब लिया गया जब राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं का बड़ा मुद्दा बनाया और टेंडर प्रक्रिया तक पर भी सवाल उठाए।
धर्मेंद्र प्रधान और राहुल गांधी
सीबीएसई के ओएसएम सिस्टम में खामियों को लेकर सरकार पर राहुल गांधी के हमले के बीच अब सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन पोर्टल खोलने की नई तारीख़ घोषित कर दी है। अब वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का पोर्टल 1 जून 2026 से चालू हो जाएगा। इसने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि यह फ़ैसला छात्रों के लिए पारदर्शी और बिना किसी तकनीकी समस्या वाली प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
सीबीएसई ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है, 'छात्र जो उत्तर पुस्तिकाओं की वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन कराना चाहते हैं, उनके लिए पोर्टल को 1 जून 2026 से शुरू करने का फ़ैसला किया गया है। इससे मूल्यांकन का शानदार स्टैंडर्ड और प्रोटोकॉल को बनाए रखा जा सकेगा।' बोर्ड ने कहा है कि छात्रों को किसी भी तरह की समस्या या सवाल होने पर सीबीएसई की टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन नंबर से मदद ली जा सकती है।
राहुल गांधी के निशाने पर शिक्षा मंत्री, सीबीएसई
सीबीएसई का यह क़दम तब आया है जब इस पूरे मामले को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ा मुद्दा बना दिया है। वह लगातार सीबीएसई और मोदी सरकार पर हमलावर हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राहुल ने शुक्रवार को ओएसएम प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टेंडर तीन बार निकाले गए। पहले दो बार कोई योग्य बोलीदाता नहीं मिला। फिर नियमों को कम करके COEMPT कंपनी को काम दिया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि स्कैनिंग रेजोल्यूशन घटाया गया, रोबोटिक स्कैनर की ज़रूरत हटाई गई, सर्टिफिकेशन कम किया गया और गलती पर पेनल्टी भी खत्म कर दी गई। टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी भी टेक्निकल राउंड में हार गई, लेकिन COEMPT को काम मिल गया।
उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए। राहुल ने कहा, '18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी को सौंप दिया गया जिसे नियम बदलकर योग्य बनाया गया।'
COEMPT कंपनी पर बड़े सवाल
राहुल ने एक दिन पहले ही कहा था, 'जिस कंपनी COEMPT को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है।' कुछ ज़रूरी सवाल हैं, 'COEMPT को सीबीएसई का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया? कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया? COEMPT पहले Globarena के नाम से विवादों में घिर चुकी है, ये सीबीएसई को क्यों नहीं पता चला? बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किए गए? COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?'
शिक्षा मंत्री को लेनी पड़ी ज़िम्मेदारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्लास 12 के रिजल्ट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM विवाद को लेकर छात्रों की चिंता पर बात की। उन्होंने कहा है कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रों को तनाव से मुक्ति दिलाना है। उन्होंने कहा, 'छात्रों की चिंताओं के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है। शिक्षा मंत्री होने के नाते मैं खुद को जवाबदेह मानता हूं। हमारा काम इस तनावपूर्ण स्थिति में छात्रों को राहत पहुंचाना है।' मंत्री ने बताया कि पोर्टल पूरी तरह चालू होने के बाद छात्र स्कैन हुई उत्तर पुस्तिकाओं में किसी सवाल, गुम पेज या गलती के बारे में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे। हालाँकि, उन्होंने यह साफ़ नहीं किया है कि यह ज़िम्मेदारी लेने का क्या मतलब है। क्या यह सिर्फ़ बयान देने के लिए है या फिर उनको इस प्रक्रिया से अलग करने जैसी कार्रवाई भी होगी?
OSM सिस्टम पर क्या हैं आरोप
परीक्षा के नतीजे आने के बाद छात्रों ने OSM सिस्टम की बहुत शिकायतें की हैं। इन समस्याओं से छात्र और उनके माता-पिता काफी परेशान हैं-
- कुछ छात्रों की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका बदल गई
- स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां धुंधली आ रही हैं
- कई जवाब बिना चेक किए रह गए
- पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है
- पेमेंट करने में दिक्कत हो रही है
- री-इवैल्यूएशन में भारी कन्फ्यूजन है
एक्स पर जलाल जैन नाम के एक यूज़र ने पोस्ट किया है, "मुझे उम्मीद थी कि 12वीं क्लास के Accounts में 90 से ज़्यादा नंबर आएंगे, लेकिन मुझे सिर्फ़ 47 नंबर मिले। जब मैंने अपनी आंसर शीट के लिए अप्लाई किया, तो मुझे पता चला कि वह मेरी थी ही नहीं। एक और छात्र के साथ भी बिल्कुल ऐसी ही गड़बड़ी हुई थी। हेल्पलाइन या ईमेल से कोई जवाब नहीं मिला। अपनी असली आंसर शीट लेने के लिए मुझे खुद सीबीएसई आरओ भोपाल जाना पड़ा। Final Score: 92/100"।
अब ‘सोशल मीडिया टूलकिट’ विवाद में फँसी CBSE
ओएसएम सिस्टम में गड़बड़ी के विवाद के बीच ही CBSE के क्षेत्रीय कार्यालयों ने कथित तौर पर स्कूल प्रिंसिपलों को एक 'मटेरियल फॉर प्रिंसिपल्स' नाम का दस्तावेज भेजा। इसमें OSM सिस्टम का बचाव करने के लिए तैयार स्क्रिप्ट दी गई थी। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार इसमें प्रिंसिपलों से कहा गया था कि वे रील्स बनाकर बोर्ड का समर्थन करें और छात्रों को 'घबराने' की बजाय शांत रहने की सलाह दें। कई केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों ने इस स्क्रिप्ट के अनुसार वीडियो पोस्ट किए। इसको अब सोशल मीडिया पर साझा कर तंज कसे जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रिंसिपलों ने कहा, 'OSM अच्छी पहल है, मूल्यांकन निष्पक्ष और पारदर्शी हुआ है।' हालाँकि कई प्रिंसिपलों ने इस निर्देश का पालन नहीं किया। एक दिल्ली के निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर एचटी से कहा, 'छात्रों की परेशानी और करियर को देखते हुए मैं सीबीएसई के पक्ष में वीडियो नहीं बनाऊंगा।'
स्कैन कॉपी के लिए छात्रों में भारी मांग
सीबीएसई के आँकड़ों के अनुसार 26 मई तक क़रीब 18 लाख छात्रों में से लगभग एक चौथाई ने अपनी स्कैन हुई उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगी है। पिछले साल की तुलना में यह संख्या 208% ज़्यादा है। बोर्ड ने इसे फीस कम किए जाने का असर बताया। सीबीएसई ने कहा है कि ओएसएम प्रणाली मूल्यांकन को और बेहतर, पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन शुरुआती तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया है।
बहरहाल, छात्रों के लिए अब अच्छी ख़बर यह है कि पोर्टल 1 जून 2026 से खुल जाएगा। अपनी उत्तर पुस्तिका में कोई गड़बड़ी दिखे तो बिना घबराए आधिकारिक प्रक्रिया से शिकायत करें। हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें। सीबीएसई ने अब जो भी फ़ैसला लिया हो, लेकिन यह पूरा मामला छात्रों के भविष्य और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।