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शीर्ष सैन्य पद के लिए योग्यता बदली, जूनियर भी बन सकते हैं सीडीएस

जिस चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ यानी सीडीएस पद पर सबसे पहले जनरल बिपिन रावत नियुक्त हुए थे उस पद पर नियुक्ति में अब रक्षा मंत्रालय ने बदलाव किया है। अब रैंक में तीनों सेनाओं के प्रमुख से एक पद नीचे रहने वाले अफ़सर भी सीडीएस चुने जा सकते हैं। सीडीएस का पद पिछले क़रीब सात महीने से खाली है।

सीडीएस के पद के लिए पात्र अधिकारियों के दायरे को बढ़ाने वाले नए दिशानिर्देश मंगलवार को जारी किए गए। नए दिशानिर्देशों के अनुसार नौसेना और वायु सेना में सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल या उनके समकक्ष भी सीडीएस बन सकते हैं। 

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इसका मतलब है कि सीडीएस अब तीनों सेवाओं के दूसरे सबसे बड़े सक्रिय रैंक के अधिकारी बन सकते हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पात्रता मानदंड में एक और बदलाव यह है कि हाल ही में सेवानिवृत्त सेवा प्रमुख और उप प्रमुख भी पद के लिए पात्र होंगे। हालाँकि इस पद के लिए 62 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है।

इससे पूर्व भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत सेना प्रमुख पद से रिटायर होने के बाद उस पद पर नियुक्त हुए थे। जब वह सीडीएस थे तब वह तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे और उनसे सीनियर कोई नहीं था। लेकिन अब जूनियर भी इस पद पर पहुँच सकते हैं। 

सीडीएस का पद पिछले साल दिसंबर से खाली है। तब सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का तमिलनाडु में एक सैन्य हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से निधन हो गया था। उस हादसे में एक दर्जन से अधिक लोगों की जान गई थी। तब से सीडीएस का पद खाली रहा है। 
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नये दिशा-निर्देशों वाला यह क़दम भारत के लिए एक नया सीडीएस बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। सीडीएस रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामलों के विभाग चलाते हैं और मुख्य रूप से सशस्त्र बलों को बेहतर और एकीकृत करने के लिए जि़म्मेदार होते हैं। इसमें नए सैन्य कमानों का निर्माण भी शामिल है जो एक साथ लड़ने के लिए सेना, वायु सेना और नौसेना को एकीकृत करते हैं।

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