भारत की आगामी जनगणना 2027 शुरू होने से पहले ही उसके प्रश्नावली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दूसरे चरण की जनसंख्या गणना में जाति के साथ-साथ लोगों से उनके माता-पिता के जन्म की तारीख और जन्म स्थान जैसी जानकारियां भी लिए जाने की खबरों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया की मंशा और प्रश्न पूछने की पद्धति पर गंभीर आपत्ति जताई है।
सरकारी स्तर पर यह स्पष्ट है कि 2027 की जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का है, जिसके लिए 33 सवाल अधिसूचित किए जा चुके हैं। दूसरे चरण में व्यक्तिगत स्तर पर जनसंख्या की गणना होगी, जिसमें जाति सहित सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और प्रवास से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।

माता-पिता के जन्म की तारीख और स्थान की जानकारी

द हिन्दू अखबार के मुताबिक, दूसरे चरण में पहली बार उत्तरदाताओं से उनके माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान के बारे में भी जानकारी मांगी जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन जानकारियों का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाएगा कि कितने लोग नागरिकता से जुड़े निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हैं। हालांकि, माता-पिता की जन्म-संबंधी जानकारी के लिए कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा और जानकारी उत्तरदाता के ज्ञान के आधार पर दर्ज की जाएगी। लेकिन इसी तरह के सवाल असम में एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) के दौरान पूछे गए थे और इसे लेकर भारी विवाद हुआ था।
ताज़ा ख़बरें
अगर किसी व्यक्ति को माता-पिता की सही जन्मतिथि मालूम नहीं है और केवल जन्म वर्ष मालूम है, तो उपलब्ध जानकारी के आधार पर तारीख दर्ज करने की व्यवस्था होने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा दूसरे चरण में उपलब्ध होने पर पासपोर्ट संबंधी जानकारी और स्वैच्छिक आधार पर आधार संख्या लिए जाने की संभावना भी रिपोर्टों में बताई गई है।

NPR जैसी पूछताछ पर सवाल

यही वह प्वाइंट है जिसने कांग्रेस को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दिया है। कांग्रेस का कहना है कि माता-पिता की जन्म संबंधी सूक्ष्म जानकारी जुटाने का तरीका राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की याद दिलाता है। 2010 में NPR के दौरान परिवार के सदस्यों के नाम, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, पेशे के साथ-साथ माता-पिता और पति/पत्नी के नाम जैसी जानकारियां जुटाई गई थीं।
हालांकि, मौजूदा जनगणना और NPR के बीच सरकार की ओर से स्पष्ट अंतर रखा गया है। सरकार ने पहले कहा है कि Census 2027 को NPR से अलग रखा गया है और जनगणना की व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल कानूनी साक्ष्य या सरकारी लाभ निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

जाति गणना की पद्धति पर भी कांग्रेस का सवाल

Census 2027 की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जाति की गणना की जाएगी। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में जाति गणना को आगामी जनगणना में शामिल करने का फैसला किया था। सरकार के अनुसार जाति संबंधी जानकारी उत्तरदाता द्वारा घोषित आधार पर दर्ज की जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए संबंधित राज्य की अधिसूचित सूची के आधार पर विकल्प उपलब्ध होंगे, जबकि अन्य जातियों का नाम उत्तरदाता के बताए अनुसार दर्ज किया जाएगा। किसी जाति प्रमाणपत्र को दिखाना अनिवार्य नहीं होगा।

जयराम रमेश का सरकार पर गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि जनगणना 2027 में जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति जानबूझकर त्रुटिपूर्ण बनाई गई है। उनका आरोप है कि इससे प्राप्त आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

जयराम रमेश की 3 प्रमुख आपत्तियां

  • Census 2027 में जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति जानबूझकर दोषपूर्ण है।
  • धर्म, जन्मतिथि और माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े इतने सूक्ष्म सवाल पहले कभी इस तरह नहीं पूछे गए।
  • जनगणना की जानकारी गोपनीय होती है, इसलिए इन सवालों के पीछे कोई गहरा और संदिग्ध उद्देश्य होने की आशंका है।
रमेश ने इसे जनगणना के सामान्य उद्देश्य से आगे की कवायद बताते हुए दावा किया कि “Census 27 has a deeper nefarious purpose” यानी जनगणना 2027 के पीछे कोई गहरा और कथित तौर पर गलत उद्देश्य हो सकता है।

सरकार का तर्क क्या है?

सरकारी पक्ष से जनगणना को आधुनिक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है। Census 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी और इसमें मोबाइल ऐप तथा सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि तकनीकी बदलाव से आंकड़ों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और उन्हें तैयार करने की गति बेहतर होगी।
माता-पिता की जन्म संबंधी जानकारी के बारे में अधिकारियों का तर्क है कि इसका उद्देश्य नागरिकता के मानदंडों से जुड़े आंकड़ों को समझना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जनगणना कानून व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक करने या उसे कानूनी सबूत के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता।

जनगणना और नागरिकता की बहसः माता-पिता के जन्मस्थान और जन्मतिथि को जनगणना में शामिल किए जाने का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे नागरिकता से जुड़ी बहस को छूता है। हालांकि सरकार के मुताबिक यह जानकारी केवल सांख्यिकीय और प्रशासनिक उद्देश्य से जुटाई जाएगी और इससे किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः निर्धारित नहीं होगी।

दूसरी ओर, विपक्ष को आशंका है कि जब जाति, धर्म, जन्मस्थान, माता-पिता की जन्म-संबंधी जानकारी और पहचान से जुड़ी अन्य सूचनाएं एक ही डिजिटल व्यवस्था में दर्ज होंगी तो इन आंकड़ों के इस्तेमाल और सुरक्षा को लेकर अधिक स्पष्टता जरूरी है।

जनगणना की गोपनीयता पर सवाल

जनगणना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी गोपनीयता है। सरकार ने पहले स्पष्ट किया है कि जनगणना में दी गई व्यक्तिगत जानकारी को निर्धारित कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। लेकिन कांग्रेस का सवाल यह है कि जब प्रश्नावली में पहले की तुलना में अधिक सूक्ष्म पारिवारिक और जन्म संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन आंकड़ों का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा।
इस पूरे विवाद का केंद्र यही है- क्या Census 2027 केवल भारत की सामाजिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर तैयार करने की सामान्य कवायद है, या इसमें नागरिकता और पहचान से जुड़े ऐसे आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं जिनका भविष्य में व्यापक प्रशासनिक इस्तेमाल हो सकता है?
जनगणना 2027 पर विवाद क्यों हो रहा है
आखिर सरकार की मंशा क्या है, क्या यह एनपीआर नहीं है
सरकार की ओर से इसे जनगणना की आधुनिक और व्यापक प्रक्रिया बताया जा रहा है, जबकि कांग्रेस इसे लेकर पारदर्शिता और उद्देश्य पर सवाल उठा रही है। अब निगाहें दूसरे चरण की अंतिम प्रश्नावली और सरकार की आधिकारिक व्याख्या पर हैं।