प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के 717 घरों को 6 मार्च तक हटाने का अल्टीमेटम दिए जाने की रिपोर्ट है। क्या पुनर्वास की व्यवस्था होगी?
प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स रोड पर बसे तीन झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों को हटाने के लिए अल्टीमेटम दे दिया गया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन नोटिस में कहा गया है कि वे 6 मार्च तक अपनी झुग्गी खाली करें और सवदा घेवरा में डीयूएसआईबी कॉलोनी में अलॉट किए गए फ्लैट ले लें, वरना क़ानूनी कार्रवाई होगी।
झुग्गी-झोपड़ी के ये तीन क्लस्टर हैं- भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईपी कैंप। अंग्रेज़ी अख़बार ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि इन तीन क्लस्टरों में कुल 717 परिवारों को फ्लैट आवंटित किए गए हैं। ये झुग्गियां प्रधानमंत्री निवास 7, लोक कल्याण मार्ग से कुछ किलोमीटर दूर हैं।
2016 में रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था, लेकिन लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस के रिकॉर्ड में अभी भी रेस कोर्स रोड लिखा है। ये झुग्गियां सरकारी जमीन पर हैं, जो आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस यानी L&DO के अधीन आती हैं।
L&DO की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड यानी डीयूएसआईबी की रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के तहत जनवरी 2024 में L&DO और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी डीडीए ने संयुक्त सर्वे किया था। सर्वे में देखा गया कि ये लोग वैकल्पिक मकान के हकदार हैं या नहीं। इसके बाद फ़ैसला हुआ कि इन तीनों क्लस्टर के लोगों को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सवदा घेवरा में डीयूएसआईबी कॉलोनी में शिफ्ट किया जाएगा। यह जगह करीब 45 किलोमीटर दूर है। सभी 717 परिवारों को वहां फ्लैट अलॉट कर दिए गए हैं।
पहले 29 अक्टूबर 2025 को रिहैबिलिटेशन का नोटिस जारी किया गया था, जिसे नवंबर में दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को आदेश दिया कि बिना पूरी प्रक्रिया का पालन किए लोगों को नहीं हटाया जाएगा।
फिर 13 जनवरी को सुनवाई में सरकार ने जवाब के लिए और समय मांगा। कोर्ट ने मामला 13 मई को लिस्ट करने को कहा और नवंबर का अंतरिम आदेश जारी रखा।
अब गुरुवार को नए नोटिस जारी हो गए हैं, जिसमें 6 मार्च तक खाली करने को कहा गया है। अगर नहीं माने तो कानूनी एक्शन होगा। सरकार का कहना है कि यह सरकारी जमीन है और क्लियर करने की जरूरत है।
रिहैबिलिटेशन साइट सवदा घेवरा में है, जहां पहले से कई झुग्गी वासियों को शिफ्ट किया जा चुका है। लेकिन कई लोग वहां की दूरी, सुविधाओं की कमी और पुराने घर छोड़ने की चिंता जता रहे हैं। कुछ निवासी कहते हैं कि सर्दियों में या इतनी जल्दी कैसे शिफ्ट होंगे।
यह कदम दिल्ली में झुग्गी हटाने और रिहैबिलिटेशन की बड़ी योजना का हिस्सा लगता है। केंद्र सरकार का फोकस है कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास के इलाके को साफ़-सुथरा और सुरक्षित बनाया जाए। लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए यह बड़ा बदलाव है। आगे कोर्ट में क्या होता है, यह देखना बाक़ी है।