दिल्ली में चल रहा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट तमाम अव्यवस्थाओं की वजह से पहले दिन से ही विवादों में है। लेकिन गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रकरण ने इस इवेंट की अतंरराष्ट्रीय बेइज्ज़ती करा दी है। भारत सरकार का एआई पर यह पहला अंतरराष्ट्रीय इवेंट है। लेकिन शुरुआत अच्छी नहीं रही। अब तथ्यों की पड़ताल से पता चल रहा है कि बीजेपी से गलगोटिया का पुराना रिश्ता है। यूनिवर्सिटी बीजेपी के हर एजेंडे को आगे बढ़ाने में आगे रहती है। सोशल मीडिया पर गलगोटिया के मालिक का फोटो वायरल है, जिसमें वो मोदी से टॉप यूनिवर्सिटी का सम्मान हासिल कर रहे हैं। हालांकि मोदी उस समय गुजरात के सीएम थे लेकिन वो दिल्ली आ चुके थे।
2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने DQ अवॉर्ड्स में गलगोटिया को अकादमिक्स और ग्लोबल लिंकेज में टॉप प्राइवेट यूनिवर्सिटी का अवॉर्ड दिया था। उस समय विश्वविद्यालय को अपनी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और शिक्षा गुणवत्ता के लिए सराहा गया था। लेकिन हाल की घटनाओं ने इन उपलब्धियों पर भी पानी फेर दिया है।

पीएम मोदी ने यह पुरस्कार गलगोटिया विश्वविद्यालय की शिक्षा की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्लेसमेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया था। चांसलर सुनील गलगोटिया ने इस सम्मान को विश्वविद्यालय के विश्वस्तरीय पाठ्यक्रम, विदेशी विश्वविद्यालयों से साझेदारी और उत्कृष्ट फैकल्टी का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार छात्रों और फैकल्टी के समर्पण का प्रमाण है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है। इस अवसर पर मोदी ने शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन की जरूरत पर जोर दिया और गलगोटियास को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने इस पुरस्कार को अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर साझा किया।

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सोशल मीडिया पर कई और फोटो भी वायरल हैं, जिनमें चांसलर सुनील गलगोटिया या तो बीजेपी नेताओं से पुरस्कार ग्रहण कर रहे हैं या फिर उन्हें सम्मानित कर रहे हैं। यूपी के सीएम आदित्यनाथ के साथ सुनील और ध्रुव गलगोटिया के फोटो काफी तादाद में वायरल हैं। योगी कई मौके पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तारीफ कर चुके हैं।
गलगोटिया ने भाजपा के 2018 के "संपर्क फॉर समर्थन" अभियान में भाग लिया था और वे नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तथा आत्मनिर्भर भारत के समर्थक हैं। भाजपा सांसद और पार्टी के थिंक टैंक माने जाने वाले सुधांशू त्रिवेदी के साथ गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर सुनील गलगोटिया। सुधांशू त्रिवेदी ने इस फोटो को खुद ही ट्वीट किया था।


प्रदर्शन में छात्रों का इस्तेमाल, मोदी की किताब का प्रमोशन

गलगोटिया विश्वविद्यालय भाजपा और मोदी से कैसे जुड़ा हुआ है, उसके सबूत मौजूद हैं। गलगोटिया ने अपने परिसर में मोदी की बाल नरेंद्र पुस्तक की प्रदर्शनी का आयोजन किया। उन्होंने 2024 के संसदीय चुनावों के दौरान कांग्रेस के विरोध में अपने छात्रों को जबरन भेजा। यह यूनिवर्सिटी मोदी सरकार के सभी फैसलों और नीतियों का अंधाधुंध समर्थन करती है।


गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कांग्रेस विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। पढ़ाई-लिखाई में इस यूनिवर्सिटी के छात्र कितने होनहार हैं, उसका वीडियो उस समय बहुत वायरल हुआ था।

थाली या घंटी की आवाज़ से कोरोना के इलाज पर रिसर्च पेपर ने कराई बेइज्ज़ती 

यह पहली बार नहीं है जब गलगोटिया विश्वविद्यालय विवादों में घिरा हो। साल 2020 में विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर धर्मेंद्र कुमार ने एक पेपर प्रकाशित किया था, जिसमें दावा किया गया था कि 'थाली या घंटी से निकलने वाली ध्वनि कंपन से कोरोना वायरस को मारा जा सकता है: एक संभावित परिकल्पना'। इस पेपर को बाद में जर्नल द्वारा रिट्रैक्ट कर लिया गया, क्योंकि इसे वैज्ञानिक आधारहीन माना गया। यह घटना कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा थाली बजाने की अपील से जुड़ी थी, लेकिन रिसर्च को pseudoscience कहा गया। सोशल मीडिया पर इसकी काफी आलोचना हुई और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

चीन के माल पर अपना हक और नकल पर ध्रुव गलगोटिया की नसीहत

रिपब्लिक टीवी ने 2024 में रिपब्लिक यूथ समिट आयोजित किया था। जिसमें यूनिवर्सिटी के सीईओ ध्रुव गलगोटिया ने भाषण में कहा था-  "हमें पश्चिम की नकल करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि हमें अपने समृद्ध इतिहास पर गहराई से विचार करने और अपने गुरुकुलों में अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने की आवश्यकता है।" लेकिन अब उसी यूनिवर्सिटी ने चीन के रोबो डॉग को यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार बता दिया। लेकिन इसी पर फजीहत हो गई, क्योंकि जिस चीन की कंपनी ने इस रोबो डॉग को बनाया था, उसने असलियत उजागर कर दी। सोशल मीडिया पर अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।
एआई समिट में गलगोटिया विश्वविद्यालय के पवेलियन में प्रदर्शित 'ओरियन' नामक रोबोट डॉग को शुरू में विश्वविद्यालय की अपनी रिसर्च का उत्पाद बताया गया। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने खुलासा किया कि यह वास्तव में चीनी कंपनी यूनिट्री का गो2 रोबोडॉग है, जो बाजार में उपलब्ध है। असलियत सामने आने के बाद सरकार ने आदेश दिया कि गलगोटिया को समिट से बाहर कर दिया जाए। आयोजकों ने विश्वविद्यालय को समिट से बाहर जाने का आदेश दिया और उनका स्टॉल खाली करा लिया। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स और विशेषज्ञों ने इसे 'धोखाधड़ी' करार दिया, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को ठेस पहुंची है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर कड़ा हमला किया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले भारतीय विश्वविद्यालयों में रिसर्च और इनोवेशन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। एक ओर जहां दक्षिण कोरिया की टॉप यूनिवर्सिटीज जैसे योंसी, सियोल नेशनल और कोरिया यूनिवर्सिटी में हाल ही में एआई चीटिंग स्कैंडल्स सामने आए हैं, जहां दर्जनों छात्रों ने चैटजीपीटी जैसे टूल्स से परीक्षाओं में धोखा किया। गलगोटिया का मामला विदेशी उत्पादों को अपना बताने का है। यह घटना चीनी और कोरियाई कंपनियों के उत्पादों पर निर्भरता और ईमानदारी की कमी को रेखांकित करती है। सरकार और शिक्षा मंत्रालय से अपील की जा रही है कि ऐसे मामलों की जांच हो और विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।