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ज़रूरत पड़ी तो जम्मू-कश्मीर जाऊँगा: मुख्य न्यायाधीश गोगोई

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि यदि ज़रूरत पड़ी तो वह जम्मू-कश्मीर जाएँगे। उन्होंने उस शिकायत पर यह बात कही जब बच्चों के अधिकार से जुड़े कार्यकर्ता ने एक याचिका में आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट तक पहुँचने में दिक्कतें आ रही हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो वह जम्मू-कश्मीर जाएँगे और यह देखेंगे कि क्या यह आरोप सही है। बता दें कि अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद से जम्मू-कश्मीर में कई तरह की पाबंदियाँ लगी हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ईनाक्षी गांगुली द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रहा था। गांगुली ने याचिका में आरोप लगाया कि छह साल से 18 साल तक के बच्चों को जम्मू-कश्मीर में पाबंदी लगने के कारण काफ़ी दिक्कतें हो रही हैं। अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर में कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी गई थीं। हालाँकि हाल के दिनों में इसमें कुछ ढील दी गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 में फेरबदल को लेकर दायर की गई कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन्हीं याचिकाओं में से एक में यह शिकायत की गई थी कि लोग हाई कोर्ट तक पहुँच नहीं पा रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने को भी कहा है। इसने इस मामले में केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार को इस मामले को सुलझा कर 30 सितंबर तक हलफनामा देने को कहा है। अब इस मामले में उसी दिन सुनवाई होगी। बता दें कि नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता व सांसद फारूक अब्दुल्ला की नज़रबंदी के ख़िलाफ़ भी दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। एक अन्य मामले में अदालत ने ग़ुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दे दी है।

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अनुच्छेद 370 के मामले में कई याचिकाएँ दायर की गई हैं। इनमें से कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाँच सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा को अपनी माँ से मिलने की इजाज़त दी थी। इसके साथ ही कोर्ट ने सीपीएम के बीमार नेता यूसुफ़ तारीगामी को इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में शिफ़्ट करने के निर्देश दिए थे। इसी दौरान अदालत ने कहा था कि अनुच्छेद 370 में बदलाव के ख़िलाफ़ दायर सभी याचिकाओं पर सुनवाई बाद में होगी। इसी को लेकर सोमवार को सुनवाई हुई। बता दें कि केंद्र सरकार ने इसी महीने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में फेरबदल किया था। 
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