मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को सीजेपी के होने वाले 'जंतर-मंतर 2.0' प्रोटेस्ट में तैनाती के लिए सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स की कंपनियों को जम्मू-कश्मीर के जम्मू इलाके, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से वापस बुलाया जा रहा है।
सीजेपी जंतर मंतर प्रोटेस्ट (फाइल फोटो)
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सीजेपी के 10 अक्टूबर से प्रस्तावित ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़े पैमाने पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की तैयारी की गई है। रिपोर्ट है कि गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के बीच दिल्ली पुलिस को 221 CAPF कंपनियां उपलब्ध कराई हैं। इन कंपनियों में करीब 23 हजार जवान शामिल हैं। इसके अलावा रिपोर्ट है कि 15 हजार दिल्ली के पुलिसकर्मी भी तैनात होंगे।
इसके लिए जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ कंपनियाँ बुलाई गई हैं। रिपोर्ट है कि छत्तीसगढ़ से जिन कंपनियों को दिल्ली लाया जा रहा है, उनमें ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो नक्सल विरोधी अभियानों के लिए तैनात हैं। छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जेएनयू की पीएचडी स्कॉलर नेहा बोरा ने इसको लेकर एक पोस्ट साझा किया है।
8 से 12 अक्टूबर तक CAPF की तैनाती
दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त केंद्रीय बल उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। दि प्रिंट ने सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट दी है कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस के लिए 8 से 12 अक्टूबर तक 221 सीएपीएफ कंपनियाँ उपलब्ध कराई हैं। इसके बाद इन कंपनियों को वापस उनकी मूल तैनाती वाली जगहों पर भेजे जाने की योजना है।इनमें से 111 कंपनियाँ पहले ही जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस को उपलब्ध कराई गई थीं, जबकि 110 अतिरिक्त कंपनियों को 6 अक्टूबर को मंजूरी दी गई। यानी इसका एक हिस्सा पहले से दिल्ली में उपलब्ध बलों का है और दूसरा हिस्सा अब अतिरिक्त रूप से मंजूर किया गया है।
किन-किन सीएपीएफ की कंपनियाँ शामिल हैं?
दि प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार पहले से उपलब्ध 111 कंपनियों में अलग-अलग केंद्रीय बलों की कंपनियां शामिल हैं। इनमें बीएसएफ़ की 41 कंपनियां, ITBP की 18 कंपनियां, SSB की 16 कंपनियां, रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF की 13 कंपनियां, CRPF की 12 कंपनियां (जिनमें 5 महिला कंपनियां शामिल) और CISF की 11 कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा 6 अक्टूबर को मंजूर की गई अतिरिक्त 110 कंपनियों में CRPF की 85 कंपनियां, SSB की 10 कंपनियां, RAF की 7 कंपनियां, ITBP की 7 कंपनियां और CISF की 1 कंपनी शामिल है। इन सभी को मिलाकर 221 कंपनियां करीब 23 हजार केंद्रीय जवानों के बराबर हैं।
जम्मू-कश्मीर से CRPF की कंपनियां वापस बुलाई गईं
मौजूदा तैनाती की सबसे अहम बात यह है कि CRPF की कंपनियों को ऐसे इलाकों से दिल्ली लाया जा रहा है जहां वे पहले से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े अहम काम कर रही थीं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में अमरनाथ यात्रा के बाद भी रखी गई CRPF कंपनियों में से कुछ को दिल्ली भेजा जा रहा है। जम्मू क्षेत्र में कुल 137 कंपनियाँ तैनात थीं। इनमें से 20 कंपनियां दिल्ली भेजे जाने वाली कंपनियों में शामिल हैं। इसके अलावा अमरनाथ यात्रा के लिए तैनात की गई 85 CRPF कंपनियों को भी दिल्ली लाने की जानकारी दी गई है।पश्चिम बंगाल में पिछले साल हुए चुनावों के बाद से तैनात CRPF कंपनियों में से भी कुछ को दिल्ली बुलाया जा रहा है। राज्य में कुल 65 कंपनियां पिछले साल अक्टूबर से तैनात थीं। इनमें से 40 कंपनियों को दिल्ली के लिए वापस बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। यानी बंगाल में चुनाव के बाद से मौजूद केंद्रीय बलों की तैनाती में भी इस दौरान बदलाव किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए तैनात CRPF की कंपनियों को भी दिल्ली लाया जा रहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राज्य में कुल 157 CRPF कंपनियां तैनात हैं। इनमें से 22 कंपनियों को दिल्ली की कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी के लिए बुलाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवान भी तैनात
केंद्रीय बलों के अलावा दिल्ली पुलिस की भी बड़े पैमाने पर तैनाती होगी। कई सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी जमीन पर तैनात किए जाएंगे। इस तरह 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में केंद्रीय बल और स्थानीय पुलिस दोनों की बड़ी मौजूदगी रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि अतिरिक्त बल इसलिए उपलब्ध कराए गए हैं ताकि दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस के आकलन के मुताबिक अतिरिक्त बलों की जरूरत महसूस हुई और इसके बाद 8 से 12 अक्टूबर तक तैनाती को मंजूरी दी गई।यह पहली बार नहीं है जब सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बड़ी संख्या में केंद्रीय बल तैनात किए जा रहे हैं। जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में 150 CAPF कंपनियां तैनात की गई थीं। उस समय पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी केंद्रीय बलों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया गया था। इसके अलावा जुलाई के प्रदर्शन को देखते हुए 111 कंपनियां दिल्ली पुलिस को उपलब्ध कराई गई थीं और बाद में ये कंपनियां सितंबर में हुए BRICS Summit के दौरान भी दिल्ली में मौजूद रहीं।
किसानों के आंदोलन से भी बड़ी मौजूदा तैनाती
मौजूदा 221 कंपनियों की तैनाती की तुलना राजधानी में हुए दूसरे बड़े प्रदर्शनों से भी की जा रही है। 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में 93 CAPF कंपनियां तैनात की गई थीं। इसके मुकाबले मौजूदा व्यवस्था में 221 कंपनियां उपलब्ध कराई गई हैं। यानी केंद्रीय बलों की तैनाती का पैमाना किसान आंदोलन के दौरान की तैनाती से काफी अधिक है। जुलाई के CJP प्रदर्शन के दौरान 150 CAPF कंपनियां तैनात थीं। मौजूदा संख्या उससे भी अधिक है।मौजूदा तैनाती का पैमाना 2023 के G20 Summit के दौरान की सुरक्षा व्यवस्था के करीब है। G20 Summit के समय दिल्ली में 236 CAPF कंपनियां तैनात की गई थीं। इनके अलावा करीब 25 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए थे। इस लिहाज से 10 अक्टूबर के प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के लिए 221 CAPF कंपनियों और करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों की तैनाती राजधानी में किसी विरोध प्रदर्शन के लिए की जा रही बड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है।
क्या है ‘जंतर-मंतर 2.0’?
सीजेपी ने 10 अक्टूबर से दिल्ली में एक नए आंदोलन का ऐलान किया है, जिसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया गया है। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा है। CJP का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के SIR की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियाँ हुई हैं। संगठन का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और फॉर्म 6 से जुड़े विवादों ने मतदान के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी मुद्दे को लेकर 10 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन की घोषणा की गई है।