'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने केंद्र सरकार से अपने वादों को तुरंत पूरा करने की मांग की है। देशभर में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस लेने के कुछ ही दिनों बाद, कई राज्यों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने की खबरें सामने आने के बाद सीजेपी ने बयान जारी किया है। उसने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पूर्व में दिए गए आश्वासनों को लागू करने की अपील की है।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार 27 जुलाई को एक बयान में कहा कि पार्टी ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन केवल इस शर्त और आश्वासन पर वापस लिया था कि भाजपा या एनडीए शासित राज्यों में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ वर्तमान या भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रदर्शन खत्म करने के लिए पार्टी की प्राथमिक शर्तों में से एक यह थी कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति पर FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
CJP ने सरकार से मांग की है कि देशभर में हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए और दर्ज की गई सभी FIR को वापस लिया जाए। CJP ने सरकार से प्रदर्शनकारियों की रिहाई और मामलों की वापसी को लेकर लिखित आश्वासन देने का भी आग्रह किया है। सौरव दास ने कहा- "हमें भारत सरकार से यह आश्वासन मिला था कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आना बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। हम सरकार, विशेष रूप से जेपी नड्डा जी और डॉ. जितेंद्र सिंह जी से अपील करते हैं कि वे दिए गए वादे का सम्मान करें।"
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NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में जंतर-मंतर सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। सरकार के साथ हुई बातचीत और आश्वासनों के बाद पार्टी ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया था, लेकिन हालिया गिरफ्तारियों के बाद अब CJP ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है।

बंगाल और असम में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुलेआम पेपर लीक विरोधी प्रदरशनकारियों को धमकी दे रहे हैं। उन्होंने पुलिस से प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।कोलकाता के सियालदह से एस्प्लेनेड (डोरिना क्रॉसिंग) तक और असम के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों छात्रों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। हालांकि, अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा की गई सख्त कार्रवाई ने इस आंदोलन को एक विवादित मोड़ दे दिया।
प्रदर्शन के दौरान कोलकाता में स्थिति तब बिगड़ी जब पुलिस ने एकत्र हुए जनसमूह को रोकने और तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों और चश्मदीदों का आरोप है कि पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठियां चलाईं, जिसके चलते कई छात्र और युवा कार्यकर्ता घायल हो गए। इसी प्रकार असम में भी प्रदर्शन स्थल पर एकत्र हुए युवाओं को नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस द्वारा भारी बल प्रयोग किए जाने और धक्का-मुक्की की शिकायतें दर्ज की गईं।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी पुलिस की तरफ से धरपकड़ का दौर जारी रहा। कोलकाता में कई एफआईआर दर्ज कर दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया तथा उन पर कड़े कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए। बंगाल और असम दोनों ही जगह पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए कई छात्रों और CJP समर्थकों को गिरफ्तार किया। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक अधिकार का दमन कर रहा है और छात्रों के बीच डर का माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है।
CJP के संस्थापकों और छात्र नेताओं ने पुलिस द्वारा किए गए इस बल प्रयोग और कथित बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि प्रदर्शन के दौरान व उसके बाद हिरासत में लिए गए सभी निर्दोष छात्रों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए तथा उन पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। इसके अतिरिक्त CJP ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।