पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन पर तमाम राज्यों में पुलिस कार्रवाई अभी भी जारी है। हालांकि सरकार कह चुकी है कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सारी एफआईआर वापस होगी लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। यही वजह है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों का धरना फिर से शुरू हो गया है। द हिन्दू अखबार के मुताबिक प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में 26 जुलाई के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर से पहचान कर 21 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया गया। पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया कि उसे पुलिस हिरासत में पीटा गया और भाजपा कार्यकर्ता के वाहन में तोड़फोड़ करने का झूठा आरोप लगाया गया। वहीं बिहार के भागलपुर में 25 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल 17 वर्षीय नाबालिग को उसके घर से पुलिस ने हिरासत में लिया।
  • सीजेपी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया है। सीजेपी ने पीएम मोदी से कहा कि आप कुर्सी से उतर जाइए और इनफ्लुएंसर बन जाइए
  • एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके रूस में मौजूद होने के बावजूद उसे प्रदर्शनकारी बताकर केस दर्ज किया गया है।
  • अभिजीत दिपके के परिवार ने उन्हें धमकियां दी गईं और बीजेपी में शामिल होने का दबाव डाला गया।
भागलपुर पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के तहत छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जा रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जारी की गई 155 लोगों (युवक-युवतियों) की तस्वीरों को भी हटाया जा रहा है। प्रयागराज में दर्ज 3 एफआईआर में शिकायतकर्ता भाजपा सदस्य या पूर्व सांसद के बेटे हैं। लेकिन इन्हीं शहरों में प्रदर्शनकारियों को फिर से पकड़ा जा रहा है।
इंस्टाग्राम पर छात्रों द्वारा 20 जुलाई के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के अपलोड किए गए कई वीडियो हटाए जा रहे हैं। ऐसा ही एक्स पर हो रहा है। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और एफआईआर वापसी की मांगों पर सहमति के बाद CJP ने अपना 36 दिनों का आंदोलन स्थगित किया था। हालांकि, संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों का पुलिस उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
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राहुल गांधी के दावों पर CJP का रुख और गृह मंत्री से जवाब की मांग

लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि 20 जुलाई को छात्रों पर पेलेट गन चलाने या बल प्रयोग करने का आदेश गृह मंत्री ने दिया था या फिर वे इससे अनजान थे। उन्होंने कहा, "यदि गृह मंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी, तो यह उनकी अक्षमता है।"
  • CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया (X) पर कहा कि गृह मंत्री को तुरंत जवाब देना चाहिए और उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। दास ने कहा, "एक छात्र ने गृह मंत्री के आदेश के कारण हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो दी।"

'कुर्सी छोड़िए, इन्फ्लुएंसर बन जाइए': अभिजीत दिपके

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के युवाओं को संबोधित करने वाले इंस्टाग्राम वीडियो पर तंज कसते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री को पद छोड़कर इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए। अगर वे इतने अच्छे इन्फ्लुएंसर हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए और किसी और को काम करने देना चाहिए।"
लोकसभा में पारित एंटी-पेपर लीक बिल पर दिपके ने कहा कि जब तक इसे लागू करने वालों की नीयत साफ नहीं होगी, तब तक केवल कानून बनाने से कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तीन दिन पहले फास्ट-ट्रैक कोर्ट का वादा किया गया था, लेकिन सीबीआई वकील के न आने के कारण पहली सुनवाई ही टल गई।

आंदोलन की चेतावनी: दिपके ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं लीं, तो छात्र दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और इस बार का आंदोलन पहले से भी बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हर छात्र के परिवार में चार वोट होते हैं और छात्र इस सरकार को वोटों की भाषा में ही जवाब देंगे।

भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा जेन-ज़ी (Gen Z) पर की गई टिप्पणी पर डिपके ने उन्हें "पार्ट-टाइम राजनीतिज्ञ" करार देते हुए विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

दिपके के परिवार को धमकियां

अभिजीत दिपके की मां अनीता दिपके ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके बेटे को धमकी भरा संदेश मिला था। धमकी में कहा गया था- "भाजपा में शामिल हो जाओ, वरना तुम्हारे माता-पिता से निपट लिया जाएगा।" अनीता दिपके के अनुसार, उनके बेटे अभिजीत ने उनसे कहा कि वे इन धमकियों से नहीं डरते, लेकिन परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें कुछ समय के लिए घर से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद उनका परिवार 16 दिनों के लिए कोंकण में अपने रिश्तेदारों के घर रहने चला गया था।

राहुल गांधी पर सरकार का पलटवार

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा विरोध किया और उनसे लिखित आदेश प्रस्तुत करने या माफी मांगने को कहा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को कोई गोलीबारी या पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ था, केवल आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। उन्होंने कहा कि जब फायरिंग हुई ही नहीं, तो आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता।