Rajasthan School controversy CJP Reacts: राजस्थान में कॉकरोच जनता पार्टी ने राज्य में स्कूल ठीक करो अभियान छेड़ा। सरकार ने आदेश जारी कर बाहरी लोगों के आने पर रोक लगा दी। सीजेपी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि हमें रोका नहीं जा सकता।
राजस्थान के अलवर में जेन अल्फा आंदोलन का नज़ारा
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत, बुनियादी सुविधाओं (जैसे पानी, शौचालय) के अभाव और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक घमासान तेज हो गया है। नवगठित राजनीतिक दल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा राज्य भर के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने के ऐलान के कुछ ही घंटों भीतर, राजस्थान सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने रविवार (16 अगस्त, 2026) शाम को एक सख्त आदेश जारी कर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। राजस्थान सरकार का आदेश सामने आने के बाद सीजेपी सह संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बयान जारी कर इसे चुनौती दी और कहा हमें सरकारी स्कूलों में जाने और ठीक कराने से कोई रोक नहीं सकता। उधर, लखनऊ के दुबग्गा इलाके में जेन अल्फा आज सोमवार 17 अगस्त को फिर से सड़क पर आ गया। जिस स्कूल के जेन अल्फा ने सोमवार को प्रदर्शन किया, उन्हीं बच्चों ने 14 अगस्त को भी प्रदर्शन किया था।
हाल के हफ्तों में राजस्थान के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में छात्रों और अभिभावकों द्वारा जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही थीं। 14 अगस्त को CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने अलवर के एक सरकारी स्कूल में छात्रों के साथ धरना दिया था। इस विरोध के बाद प्रशासन को स्कूल में अतिरिक्त कमरे, साफ शौचालय और पीने के पानी के लिए आरओ (RO) मशीन लगाने की मांग स्वीकार करनी पड़ी थी।
अलवर की सफलता के बाद, CJP के सह-संयोजक आशुतोष राका ने रविवार (16 अगस्त) सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट कर घोषणा की। उन्होंने बताया कि उन्हें जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, बाड़मेर और हनुमानगढ़ से जर्जर स्कूलों के निरीक्षण के अनुरोध मिले हैं, जहां स्थानीय प्रशासन मरम्मत कराने में विफल रहा है।
रांका ने CJP के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत आने वाले दिनों में इन सभी जिलों के स्कूलों का दौरा करने की बात कही और लोगों से अपील की कि जहां भी स्कूल खराब हालत में हैं, वे उन्हें और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को टैग करें।
राजस्थान सरकार घबराई, प्रवेश पर बैन लगाया
CJP के इस ऐलान के कुछ ही घंटों बाद, राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया। विभाग ने संविधान के अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार), उच्चतम न्यायालय के निर्णयों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि "In Loco Parentis" (माता-पिता के स्थान पर) के सिद्धांत के तहत सरकार की विशेष जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता बनाए रखे। किसी भी अधिकृत सरकारी अधिकारी को छोड़कर, किसी भी बाहरी व्यक्ति को संस्था प्रधान/प्रधानाचार्य (Principal) की पूर्व अनुमति के बिना स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। स्कूल में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को विजिटर रजिस्टर (Visitor Register) में अपनी प्रविष्टि (Entry) दर्ज करनी होगी।
आदेश में कहा गया कि बिना प्रधानाचार्य या किसी अधिकृत शिक्षक/कर्मचारी के साथ, कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा (Classrooms), प्रयोगशाला (Labs), पुस्तकालय (Library), हॉस्टल, खेल के मैदान या शौचालय जैसे क्षेत्रों में नहीं जा सकेगा। प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग, साक्षात्कार (Interviews) या लाइव स्ट्रीमिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। अभिभावकों की सहमति के बिना छात्रों की कोई भी तस्वीर, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी एकत्र या प्रसारित नहीं की जाएगी, जिससे उनकी गरिमा या सुरक्षा पर असर पड़े। यदि प्रधानाचार्य को लगता है कि किसी व्यक्ति की उपस्थिति से स्कूल की सुरक्षा, अनुशासन या शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है, तो वे उसे प्रवेश देने से मना कर सकते हैं या परिसर छोड़ने का निर्देश दे सकते हैं।
सीजेपी के आशुतोष रांका का कड़ा बयान
सरकारी आदेश जारी होने के बाद सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका ने सोमवार 17 अगस्त को एक्स पर कड़ा बयान जारी किया। आशुतोष ने लिखा- मदन दिलावर (शिक्षा मंत्री राजस्थान) जी या तो राजस्थान के सभी जर्जर स्कूल ठीक करे, या फिर हम पर एडवांस में FIR करवा दे। आप हमें एडवांस में गिरफ्तार भी कर सकते है। आपकी सरकार है, आपकी पुलिस है। लेकिन हम तब तक स्कूलों का निरीक्षण नहीं रोकेंगे जब तक राजस्थान के सभी स्कूल ठीक नहीं हो जाते।
नेता प्रतिपक्ष राजस्थान टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार टूटी छतों, टपकते कमरों और शिक्षकों की कमी को ठीक करने के बजाय अपनी नाकामियों को दुनिया से छिपाने का 'अनोखा तरीका' खोज रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस आदेश को वापस नहीं लेती है, तो कांग्रेस इसके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) शुरू करेगी।
पूर्व शिक्षा मंत्री और राजस्थान कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सवाल उठाया, "अगर स्कूलों में सब कुछ ठीक है तो सरकार को डर किस बात का है? स्कूल जनता की संपत्ति हैं, बीजेपी की निजी संपत्ति नहीं। एसएमसी (SMC) और स्थानीय भागीदारी को कमजोर करने वाले आदेश पारदर्शिता के खिलाफ हैं।"
लखनऊ में जेन अल्फा फिर सड़क पर आया
यूपी की राजधानी लखनऊ में 17 अगस्त 2026 को लगातार दूसरी बार स्कूली बच्चों यानी ‘जेन अल्फा’ (कक्षा 6 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं) का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। पारा स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की सैकड़ों छात्राएं स्कूल में लंबे समय से जारी शिक्षकों की भारी कमी, घटिया भोजन और अव्यवस्थाओं से नाराज होकर परिसर की बाउंड्री फांदकर बाहर निकल आईं। लगभग 5 किलोमीटर का लंबा पैदल मार्च तय करते हुए ये छात्राएं दुबग्गा (हरदोई-कानपुर बाईपास) पहुंचीं और बीच सड़क पर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं के इस आकस्मिक कदम से दुबग्गा बाईपास से बालागंज की तरफ जाने वाला पूरा यातायात ठप्प हो गया और सड़कों पर लंबा जाम लग गया।
तीन दिन पहले (14 अगस्त) ही इसी स्कूल के छात्रों ने पारा मोहान रोड पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद अधिकारियों ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया था। हालांकि, रविवार को समाज कल्याण विभाग के उच्च अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद जब छात्राओं की सुध नहीं ली गई, तो सोमवार को उनका धैर्य जवाब दे गया। दुबग्गा पर काफी देर तक जिलाधिकारी या उच्च अधिकारियों के न पहुंचने पर छात्राओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
पुलिस प्रशासन ने ठाकुरगंज के बालागंज चौराहे पर भारी पुलिस बल व महिला पुलिस की मदद से बैरिकेडिंग कर छात्राओं को रोका, जिससे आक्रोशित छात्राएं वहीं सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगीं। घंटों चले इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी छात्राओं को समझा-बुझाकर वापस भेजने का प्रयास करते नजर आए।
सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का बयान
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर लिखा- देशभर से सरकारी स्कूलों की बदहाली, जर्जर भवनों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं।ऐसे समय में सबसे पहले भाजपा शासित राजस्थान सरकार का सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का यह तुगलकी फरमान बेहद चिंताजनक और सवाल खड़े करने वाला है। लेकिन सवाल है, बच्चों की सुरक्षा की याद तब क्यों नहीं आती, जब जर्जर और जानलेवा स्कूल भवनों के गिरने की खबरें सामने आती हैं? गरिमा की बात तब क्यों नहीं आती, जब बच्चों को ऐसा भोजन परोसा जाता है, जो मानवीय गरिमा के अनुकूल नहीं होता? और निजता की बात तब क्यों आती है, जब कई स्कूलों के शौचालयों में दरवाजे तक नहीं होते? अगर सरकार वास्तव में बच्चों के कल्याण को लेकर गंभीर है, तो उन्हें सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त शिक्षक और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराए।