कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए हाल ही में नई दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए। इसके साथ ही, पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री से स्वतंत्रता दिवस पर दिए जाने वाले अपने भाषण में देश के युवाओं से जुड़े अहम मुद्दों को शामिल करने की मांग की है।

"पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?"- CJP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के दीक्षांत समारोह में शामिल होने और छात्रों व शिक्षकों से बातचीत से संबंधित पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सवाल किया। पार्टी ने लिखा, “सर, सबसे पहले आप पैलेट गन के इस्तेमाल के बारे में बताएं। इसका आदेश किसने दिया? हर कोई यह जानना चाहता है।”

स्वतंत्रता दिवस भाषण पर दिपके की मांग

CJP संयोजक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं, उनकी शिक्षा, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई जैसे गंभीर विषयों पर बात करें। दीपके ने 'X' पर लिखा: “इस स्वतंत्रता दिवस पर हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री भारत के युवाओं को संबोधित करें। हम पीएम से अनुरोध करते हैं कि वे बताएं कि सरकार शिक्षा, बेरोजगारी और जीवन यापन की लागत को लेकर युवाओं के लिए क्या कर रही है।” इसके साथ ही उन्होंने एक ऑनलाइन याचिका भी साझा की और समर्थन करने वालों से इस पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया।
ताज़ा ख़बरें

"जंतर-मंतर हमारा, छीना नहीं जा सकता": CJP प्रवक्ता सौरव दास

दूसरी ओर, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा प्रदर्शन स्थल के रूप में जंतर-मंतर की उपयोगिता पर उठाए गए सवालों के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने तीखा रुख अपनाया। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन क्यों होने चाहिए और पूरे शहर को बंधक क्यों बनाया जाना चाहिए। 
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास ने 'X' पर लिखा: “हमारे जंतर-मंतर से अपने हाथ दूर रखें! हमारा विरोध स्थल छीनने की कोशिश करने से पहले हमें बताएं कि क्या आप इंडिया गेट तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध का मौलिक अधिकार इस्तेमाल कर सकें? आपने इंडिया गेट छीन लिया, हम अपना जंतर-मंतर छीने जाने को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे!”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर दिपके का पलटवार

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी पर भी दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पश्चिम बंगाल में एक हेट-स्पीच मामले में पुलिस के सामने पेश होने के आदेश के खिलाफ मोइत्रा सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। उनके वकील ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि उन पर अंडे फेंके गए थे, इसलिए उन्हें वर्चुअल पेशी की अनुमति दी जाए। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर क्यों लग रहा है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं।” अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इसे वापस ले लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए दिपके ने 'X' पर लिखा: “क्या सुप्रीम कोर्ट अब यह चाहता है कि हर कोई गोली खाए?”

सुरक्षाकर्मियों से भिड़े दिपके, CID निगरानी का लगाया आरोप

छत्रपति संभाजीनगर के वालुज एमआईडीसी (Waluj MIDC) स्थित अपने आवास पर सुरक्षा में तैनात पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) से दिपके की बहस का मामला भी सामने आया है। 30 वर्षीय दिपके को मिली धमकियों और जुटने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस सुरक्षा दी गई थी।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिपके सुरक्षा अधिकारी (सुरेश नाम के पीएसआई) से कहते नजर आ रहे हैं: “जब मैं लोगों को अपने घर आने के लिए कह रहा हूं, तो आपको उन्हें रोकने में क्या समस्या है? आप दिल्ली पुलिस की तरह व्यवहार क्यों कर रहे हैं? आप मुझे यह नहीं बताएंगे कि मुझे किससे मिलना चाहिए और किससे नहीं। आप कृपया बाहर जाइए, मुझे अपने घर में आपकी जरूरत नहीं है।”
दिपके ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फोन कर पीएसआई को सुरक्षा से हटाने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य आपराधिक जांच विभाग (CID) के सादे कपड़ों में मौजूद कर्मी उनके घर के पास निगरानी रख रहे हैं और "हिट स्प्रे" (Hit Spray) नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर रिपोर्ट भेज रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो पाई है।
उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने 36 दिनों तक आंदोलन चलाया था। आंदोलन का केंद्र जंतर-मंतर ही था। सीजेपी के इस आंदोलन की चर्चा पूरी दुनिया में हुई। सीजेपी का बनना, इसका उभार और अब एक प्रेशर ग्रुप के रूप में मौजूदगी दर्ज कराना मौजूदा दौर के भारतीय राजनीति की यह सबसे महत्वपूर्ण घटना है।