सीजेपी ने बयान जारी कर कहा कि सरकार के लिए अपनी गारंटियों को पूरा करने की समय-सीमा ख़त्म हो रही है। इसने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर चिंता जताई है जो सरकारों को मौजूदा FIR पर आगे बढ़ने और जांच करने की अनुमति देता है।
सीजेपी का प्रोटेस्ट। फाइल फोटो
सरकार पर 'वादाखिलाफ़ी' का आरोप लगाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने अब फिर से देशव्यापी बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इसने कहा है कि यदि छात्रों को पुलिस के ज़रिए परेशान करना बंद नहीं किया गया, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफ़आईआर वापस नहीं ली गईं और सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए तो वह जल्द ही देशभर में फिर से बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगा। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने इस मामले में बयान जारी किया है और आंदोलन ख़त्म होने के बाद पहली बार सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने भी चेतावनी जारी की है।
सीजेपी का यह बयान तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने नीट आंदोलन से जुड़े मामलों में अंतरिम आदेश जारी किया है। संगठन ने अदालती आदेश के उस हिस्से पर चिंता जताई है, जिसमें सरकारों को मौजूदा एफ़आईआर की जाँच जारी रखने की अनुमति दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या कहा?
सीजेपी ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का चौथा दिशा-निर्देश बेहद चिंता का विषय है। सीजेपी का कहना है कि इस आदेश से सरकारें पहले से दर्ज मामलों की जाँच जारी रख सकती हैं और इसी का इस्तेमाल छात्रों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।सीजेपी का दावा है कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफ़आईआर वापस ली जाएंगी और किसी भी छात्र के ख़िलाफ़ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होगी। इसी आश्वासन के बाद संगठन ने अपना देशव्यापी आंदोलन ख़त्म किया था।
सरकार ने सीजेपी का भरोसा तोड़ा?
सीजेपी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्य अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर छात्रों के ख़िलाफ़ पुराने मामलों को आगे बढ़ा सकते हैं। इसका कहना है कि इससे हजारों छात्रों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा है, 'सरकार को फ़ायदा पहुँचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिकरण नहीं किया जा सकता है। उन फ़ायदों को हासिल करने के लिए कोर्ट के आदेशों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। देश के सामने एक पक्का वादा किया गया था। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। सभी FIR वापस ली जानी चाहिए।'
सीजेपी ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार को 25 जुलाई के समझौते और उसके बाद हुई बातचीत की पूरी जानकारी थी तब उसके वकीलों ने यह बात सुप्रीम कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखी। संगठन ने कहा कि अदालत का आदेश सरकार द्वारा दी गई सार्वजनिक गारंटी के विपरीत है और इससे युवाओं का भरोसा टूट सकता है।
'सरकार अभी भी FIR वापस ले सकती है'
सीजेपी ने साफ़ किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि सरकारों को हर हाल में एफ़आईआर जारी रखनी ही होगी। संगठन के अनुसार, मामलों को वापस लेने या आगे कार्रवाई न करने का अधिकार अब भी सरकारों के पास है।सीजेपी ने कहा कि बिहार और असम सरकारें पहले ही प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को वापस लेने और कार्रवाई नहीं करने की घोषणा कर चुकी हैं। ऐसे में अन्य सरकारें भी यही क़दम उठा सकती हैं।
सरकार से की ये मांगें
सीजेपी ने केंद्र और बीजेपी तथा एनडीए शासित राज्यों से मांग की है कि वे 25 जुलाई को किए गए समझौते की पूरी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखें ताकि अदालत को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।
संगठन ने कहा कि सरकार के लिए अपनी गारंटी पूरी करने की समय-सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। इसलिए उसे तुरंत छात्रों पर दर्ज सभी एफ़आईआर वापस लेनी चाहिए। इसने कहा है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। 25 जुलाई को किए गए समझौते का पूरी तरह पालन करना चाहिए।अभिजीत दिपके की चेतावनी
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि यदि पुलिस छात्रों को परेशान करती रही तो संगठन फिर से सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने कहा, 'अगर छात्रों का पुलिस द्वारा उत्पीड़न जारी रहता है तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन करेगी। सरकार को छात्रों को निशाना बनाना और उनके खिलाफ कार्रवाई बंद करनी चाहिए।'आंदोलन कैसे शुरू हुआ?
कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। बाद में यह आंदोलन देश के कई राज्यों तक फैल गया।
20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद बिहार सहित कई राज्यों में भी आंदोलन तेज हो गया। आखिरकार 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन ख़त्म हुआ। उस समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने, दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले परिवारों को मुआवजा देने सहित कई आश्वासन दिए थे।सीजेपी ने अपने बयान के अंत में कहा कि देश के युवाओं ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा करके आंदोलन ख़त्म किया था। यदि सरकार अब अपने वादे से पीछे हटती है, तो यह धोखा होगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने एफआईआर वापस नहीं लीं और छात्रों को सुरक्षा नहीं दी तो उसके पास देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। सीजेपी ने कहा, 'यदि सरकार अपनी गारंटी का सम्मान नहीं करती, तो भारत की सड़कें एक बार फिर युवाओं की आवाज़ बनेंगी।'