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लोकसभा चुनाव के पहले क्या भड़क सकते हैं दंगे?

सत्तारूढ़ बीजेपी यदि हिन्दू राष्ट्रवादी नीतियों पर इसी तरह चलती रही तो आम चुनाव के पहले भारत में दंगे भड़क सकते हैं। अमेरिका की चोटी की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सीनेट की सेलेक्ट कमेटी को दी गई अपनी रिपोर्ट में यह आशंका जताई है। इस कमेटी में सीआईए निदेशक जीना हैसपेल, एफ़बीआई निदेशक क्रिस्टोफ़र रे और रक्षा ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख रॉबर्ट एशली भी थे। यह रिपोर्ट दुनिया के अलग-अलग देशों में बारे में गुप्त जानकारियाँ इकट्ठी कर तैयार की गई। नेशनल इंटेलीजेन्स के निदेशक डैन कोट्स ने यह रिपोर्ट सेलेक्ट कमेटी को सौंपी। 
कोट्स ने कहा, 'यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी इसी तरह हिन्दू राष्ट्रवादी नीतियों को लागू करने पर ज़ोर देती रही तो चुनाव के पहले सांप्रदायिक हिंसा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।'  उन्होंने कहा कि मोदी के कार्यकाल में बीजेपी की नीतियों की वजह से कुछ बीजेपी-शासित राज्यों में सांप्रदायिक तनाव पहले से बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा है कि राज्य स्तर के कुछ हिन्दू राष्ट्रवादी नेता छोटी-मोटी हिंसक वारदात करवा सकते हैं ताकि कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा सके।  
कोट्स ने इसके बाद गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है, 'लगातार बढ़ ही सांप्रदायिक झड़पों से भारतीय मुसलमान ख़ुद को पहले से अधिक अलग-थलग महसूस करेंगे और इससे इस्लामी आतंकवादी संगठनों को अपना प्रभाव बढ़ाने में सहूलियत होगी।'   
उन्होेने कहा कि मई तक भारत-पाकिस्तान रिश्तें यूं ही तनावपूर्ण बने रहेंगे। कोट्स ने कहा, 'हमारा मानना है कि भारत में सीमा-पार आतंकवाद, सीमा पर चल रही झड़प, भारत में होने वाले चुनाव और अमेरेिका के प्रति पाकिस्तान के रवैए की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते तनावपूर्व बने रहेंगे।' 
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क़मर वहीद नक़वी
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