कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी की 'सी टीम' ने टैक्स चोरी का ऐसा रास्ता ढूंढ निकाला है जिसमें बिना मान्यता वाले क़रीब 3200 दलों को दस हज़ार करोड़ रुपये का चंदा दे दिया गया। कांग्रेस ने इसमें जेपीसी जाँच की मांग की है।
कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने लगाया बीजेपी पर आरोप
कांग्रेस ने बीजेपी पर बिना मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के ज़रिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और राजनीतिक चंदे में कथित फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि देशभर में मौजूद 3260 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के माध्यम से क़रीब 10 हज़ार करोड़ रुपये का चंदा दिखाकर आयकर से बचने की व्यवस्था बनाई गई है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग की है। इसके साथ ही इसने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने इस कथित गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं की।
कांग्रेस ने इस गणित को समझाया है कि कैसे बीजेपी की 'सी टीम' टैक्स चोरी कर रही है और कैसे गैर पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदे की व्यवस्था की जा रही है। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि देश का आम नागरिक ईमानदारी से टैक्स देता है, लेकिन कुछ बड़े कारोबारी और ज़्यादा आय वर्ग के लोग राजनीतिक चंदे का इस्तेमाल करके टैक्स से बच रहे हैं।
गोहिल ने कहा कि जिन लोगों की सालाना आय 5 करोड़ रुपये से अधिक होती है, उन्हें आयकर, सरचार्ज और हेल्थ एंड एजुकेशन सेस मिलाकर लगभग 42.7 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है। लेकिन कुछ लोग राजनीतिक दलों को चंदा दिखाकर इस टैक्स से बच निकलते हैं। गोहिल ने आरोप लगाया कि यही लोग बीजेपी की कथित 'सी टीम' हैं, जो इस व्यवस्था का फायदा उठा रही है।
कांग्रेस ने कैसे समझाया कथित फर्जीवाड़ा?
कांग्रेस का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80GGC के तहत कोई भी व्यक्ति यदि किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को चंदा देता है तो उस राशि पर टैक्स छूट मिलती है। इसी तरह कंपनियों के लिए धारा 80GGB के तहत राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर कर छूट का प्रावधान है। गोहिल ने आरोप लगाया कि इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए हजारों ऐसे राजनीतिक दलों को चंदा दिखाया गया जो चुनाव में लगभग कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाते।उन्होंने कहा, 'देश में 3,260 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। इनमें क़रीब 10 हजार करोड़ रुपये का चंदा दिखाया गया। सवाल यह है कि जिन दलों का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ता, उन्हें आखिर इतना पैसा कौन दे रहा है और यह पैसा कहां जा रहा है?'
सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप
कांग्रेस ने दावा किया कि अगस्त 2025 में आई ईडीआर रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार के पास कार्रवाई का पर्याप्त आधार था, लेकिन कोई कठोर क़दम नहीं उठाया गया। गोहिल ने कहा कि सरकार ने केवल कथित तौर पर यह कहा कि जिन लोगों का दावा गलत पाया जाए, उन्हें टैक्स छूट का लाभ न दिया जाए। जबकि क़ानून के मुताबिक़ ऐसे मामलों में भारी जुर्माना और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।गोहिल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या कंपनी गलत जानकारी देकर टैक्स छूट लेती है तो 200 प्रतिशत तक टैक्स पेनल्टी लग सकती है, ब्याज सहित टैक्स वसूला जा सकता है, फर्जीवाड़ा साबित होने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है और 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस तरह की कथित टैक्स चोरी में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भी भूमिका हो सकती है। गोहिल ने दावा किया कि आयकर अधिकारियों ने ऐसे मामलों में संबंधित सीए के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन 'ऊपर से' अनुमति नहीं मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण भी इस तरह की टैक्स चोरी को देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा बता चुका है।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। गोहिल ने कहा कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक राज्य के चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे राजनीतिक दलों की आय और खर्च की जांच करें तथा उसकी जानकारी आयकर विभाग और चुनाव आयोग को दें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं की गई।इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया और कहा कि अब नियुक्ति प्रक्रिया पहले जैसी स्वतंत्र नहीं रह गई है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं-
- पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी से कराई जाए।
- संबंधित मामलों में आयकर कानून के तहत 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाए।
- कथित फर्जीवाड़े में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और दोषी पाए जाने पर उनका लाइसेंस रद्द किया जाए।
- कथित फर्जी राजनीतिक दलों के संचालकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
- राजनीतिक चंदे से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- यह भी सार्वजनिक किया जाए कि कथित फर्जी राजनीतिक दलों से जुड़े कितने लोग बाद में बीजेपी में शामिल हुए।
समाचार लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और साफ़ हो सकती है।