वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव अब एक नए दौर में पहुंच गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने 19 अगस्त को साफ कर दिया कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के दो कार्यक्रमों ने वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक विवाद को खासा गर्म कर दिया। दिल्ली में कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाया गया, जबकि गोवा में कांग्रेस के कार्यक्रम में सिर्फ पहले के दो छंद गाए गए। गोवा के कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे खुद मौजूद थे।

दिल्ली में पूरे वंदे मातरम के दौरान क्या हुआ?

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। वीडियो में वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी दिखाई दे रहे थे। बीजेपी ने आरोप लगाया कि जब वंदे मातरम की आगे की पंक्तियां गाई जा रही थीं, तब सोनिया गांधी ने इशारा करके गायन रोकने को कहा और राहुल गांधी भी उस समय असहज दिखाई दिए। इस घटनाक्रम को बीजेपी ने कांग्रेस के राष्ट्रगीत के प्रति कथित अनादर से जोड़कर हमला किया।
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हालांकि, कांग्रेस ने बीजेपी के इस आरोप को खारिज किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि सोनिया गांधी का इशारा वंदे मातरम रोकने के लिए नहीं था, बल्कि वह खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने की बात कर रही थीं। इसलिए दिल्ली की घटना की राजनीतिक व्याख्या को लेकर दोनों दलों के दावे अलग-अलग हैं। यानी दिल्ली में एक तरफ पूरा वंदे मातरम गाया गया, लेकिन उसी कार्यक्रम की तस्वीरों और वीडियो ने कांग्रेस के भीतर वंदे मातरम के गायन को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।

गोवा में तस्वीर बदल गई

इसके दो दिन बाद गोवा में कांग्रेस का कार्यक्रम हुआ, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद थे। यहां वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो छंद गाए गए। यह उस समय हुआ जब केंद्र की ओर से वंदे मातरम के पूरे गायन को लेकर नया प्रोटोकॉल और कानूनी बहस चल रही थी। गोवा में दो छंदों के गायन को कांग्रेस के अपने पुराने रुख के तौर पर देखा गया। खड़गे ने इस मुद्दे पर बीजेपी के हमलों का जवाब भी दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वतंत्रता आंदोलन में बीजेपी या आरएसएस के कौन से नेता जेल गए और देश के लिए लड़े थे।
गोवा में दो छंदों का वंदे मातरम गाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ प्रदर्शन किया। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान नहीं किया। प्रदर्शन के दौरान बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने खड़गे के काफिले को रोकने की कोशिश भी की। बाद में गोवा कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को लेकर बीजेपी युवा कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। इस तरह महज दो दिनों के भीतर वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के दो कार्यक्रमों की तस्वीरें बिल्कुल अलग नजर आईं- दिल्ली में पूरा गीत और गोवा में सिर्फ दो छंद।

कांग्रेस ने अब पिक्चर पूरी तरह क्लियर कर दी

इन घटनाओं के बीच कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने अब अपनी स्थिति औपचारिक रूप से स्पष्ट कर दी है। CWC ने फैसला किया कि कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। पार्टी ने इसे 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले से जोड़ते हुए कहा है कि यह कांग्रेस की पुरानी और स्थापित नीति है।
कांग्रेस का कहना है कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के दौर में यह फैसला लिया गया था। पार्टी के मुताबिक उस समय वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्वीकार किया गया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा कि पार्टी अपने 1937 के प्रस्ताव का पालन करेगी। यानी अब दिल्ली की घटना को लेकर उठे सवाल और गोवा में दो छंद गाए जाने की घटना के बाद कांग्रेस ने अपनी आधिकारिक स्थिति को एक बार फिर दोहरा दिया है।

वंदे मातरम पर विवाद नया नहीं है

वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों और बाद के छंदों को लेकर विवाद नया नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के संदर्भ आते हैं, इसलिए 1937 में सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए पहले दो छंदों को स्वीकार किया गया था। बीजेपी इस फैसले को कांग्रेस की राष्ट्रवादी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे राष्ट्रगीत के प्रति अनादर बताया है। हालांकि वंदे मातरम के बाद के छंदों में हिन्दू राष्ट्र शब्द आया है। यही वजह है कि आरएसएस और बीजेपी ने अपनी सरकार से कानून पास करवाकर इसे पूरा गाने पर ज़ोर दिया है। लेकिन इस तरह की चीज थोपी नहीं जा सकती। संविधान में भी वंदे मातरम को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। संविधान की मूल आत्मा- भारत नामक राष्ट्र एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
कांग्रेस दूसरी ओर इसे अपने ऐतिहासिक फैसले और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ रही है। खड़गे ने भी बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस के नेताओं का वंदे मातरम गाने का तरीका गलत था, तो फिर महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस फैसले के बाद साफ है कि वंदे मातरम आने वाले दिनों में सिर्फ सांस्कृतिक या ऐतिहासिक मुद्दा नहीं रहने वाला, बल्कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच राष्ट्रवाद की राजनीतिक बहस का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।