संसद का विशेष सत्र शुरू होने से पहले बुधवार को विपक्षी इंडिया गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन किया है लेकिन डिलिमिटेशन का विरोध किया है? विपक्ष का यह विरोध क्यों है?
डिलिमिटेशन पर विपक्ष का विरोध।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को साफ कहा कि INDIA गठबंधन महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे डिलिमिटेशन बिल का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बिल के ख़िलाफ़ वोट देगा।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने आवास पर विपक्षी दलों की बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में यह बात कही। बैठक में कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, सीपीआई और सीपीआई(एम) के नेता शामिल थे। राहुल गांधी, डीएमके के टी.आर. बालू, राजद के तेजस्वी यादव, तृणमूल की सागरिका घोष, शिवसेना यूबीटी के संजय राउत और अरविंद सावंत, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव वर्चुअली जुड़े।
खड़गे ने क्या कहा?
खड़गे ने कहा, 'हम महिलाओं के आरक्षण बिल के पक्ष में हैं। लेकिन इस सरकार ने इसे जिस तरीके से लाया है, वह राजनीतिक चाल है। हम 2010 में भी और 2023 में भी महिला आरक्षण के पक्ष में थे। उस समय संविधान संशोधन बिल संसद में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हमारी मांग साफ़ है कि संशोधन लागू करो, इसे राजनीतिक हथियार मत बनाओ। खड़गे ने कहा कि सरकार डिलिमिटेशन पर चाल खेल रही है। विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं। हमने फैसला किया है कि हम इस बिल का विरोध करेंगे।
खड़गे ने कहा, 'मैं साफ कर दूं- हम महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हम सरकार की उस कोशिश के खिलाफ हैं जिसमें इसे अनिश्चित जनगणना और भविष्य की डिलिमिटेशन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। कार्यपालिका को ऐसे अधिकार नहीं देने चाहिए जो संसद और संस्थाओं के पास होने चाहिए। इससे राजनीतिक फायदे के लिए डिलिमिटेशन बदलने का रास्ता खुल जाएगा। हमने असम और जम्मू-कश्मीर में ऐसी चाल देखी है। इसलिए हम इस मुद्दे पर एकजुट रहकर लड़ेंगे।'
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव हारने वाली है इसलिए डिलिमिटेशन आयोग को हथियार बनाकर बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। रमेश ने कहा, 'हमने मांग की थी कि महिला आरक्षण 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू हो। हमारी मांग को नजरअंदाज किया गया। अब चुनाव के बीच अचानक तीन बिल ला दिए गए। उन्होंने डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण को जोड़ दिया है।'
इस बिल में लोकसभा सीटें 50% बढ़ाने की बात है। सरकार का दावा था कि हर राज्य की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी, लेकिन बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। कई राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी घट जाएगी। जयराम रमेश ने मांग की कि मौजूदा लोकसभा की संख्या में ही महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाए।
जयराम रमेश क्या बोले?
जयराम रमेश ने परिसीमन को बड़ा खतरनाक है और इसके पीछे ये बड़े कारण बताए हैं-
- गृह मंत्री और सरकार के मंत्रियों ने कहा है कि लोकसभा में 50% सीट बढ़ेंगी और ये समानुपातिक तौर पर सभी राज्यों के लिए लागू होगा- लेकिन ये बात इस विधेयक में शामिल नहीं है
- इस बिल के आने से दक्षिण भारत के राज्यों, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों का समानुपात घटेगा
- बार-बार समानुपात की बात की जा रही है, लेकिन वो परिसीमन के प्रावधानों में कहीं दिख नहीं रहा है
- परिसीमन कमीशन की बात भी कही गई है। हालांकि इस कमीशन ने जम्मू-कश्मीर और असम में जैसा काम किया है, उससे साफ है कि परिसीमन कमीशन बीजेपी का हथियार है, जिससे वे बहुमत हासिल करेंगे
विपक्ष का एकजुट रुख
खड़गे ने बताया कि बैठक में सभी दलों ने डिलिमिटेशन बिल का विरोध करने का फैसला लिया है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी कहा कि हम डिलिमिटेशन बिल के खिलाफ हैं और इसके खिलाफ वोट देंगे।
विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है। 2011 की जनगणना के आधार पर राज्य विधानसभाओं की सीटें बढ़ाने और उसे डिलिमिटेशन से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों का नुकसान होगा।
विवाद क्या है?
केंद्र सरकार संसद में डिलिमिटेशन संबंधी संविधान संशोधन बिल लाने जा रही है। इसमें लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 तक करने और नई जनगणना के आधार पर सीटों की नई सीमा तय करने की बात है। विपक्ष इसे दक्षिण राज्यों के खिलाफ बता रहा है। खड़गे ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण का सम्मान करता है, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।