राहुल गांधी के साथ ही कांग्रेस ने भी कहा है कि 26 सितंबर को ECI ने एक प्रेस नोट में कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर हुआ। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि 'किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी है।'
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नये वोटर वाले फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं देने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में 'अवैध और एकतरफा' बदलाव किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी उनके पहले लगाए गए आरोपों का 'एक और सबूत' है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद का इस्तेमाल बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए किया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब यह बिना किसी संदेह के तय हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 को अवैध और एकतरफ़ा तरीके से बदला। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को लेकर क्या कहा?
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने सोमवार को फॉर्म 6 में किए गए बदलाव का मुद्दा उठा। इस पर पीठ ने साफ़ शब्दों में कहा, 'किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है। यह स्पष्ट कर दें। जब रिकॉर्ड हमारे सामने आएगा तो हम देखना चाहेंगे कि इसे किसने संशोधित किया।' यानी अदालत ने रिकॉर्ड मंगाकर यह पता लगाने की बात कही है कि बदलाव किसने किया।
यही टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। फॉर्म 6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़े जाने को लेकर पहले से विवाद चल रहा है।
ECI के पुराने बयान को राहुल ने फिर साझा किया
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के साथ चुनाव आयोग का 26 सितंबर का बयान भी साझा किया। इस बयान में आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। आयोग ने यह भी कहा था कि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।राहुल गांधी ने इसी बयान को सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणी के साथ जोड़ते हुए सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि जब सुप्रीम कोर्ट अब साफ़ कह रहा है कि उसने संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी तो फिर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपने बयान में अदालत की मंजूरी का दावा किस आधार पर किया था।
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी ने कहा कि यह अब साफ़ है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 को अवैध और एकतरफा तरीके से बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह उनके पद के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है और कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
राहुल गांधी ने इससे पहले 1 अक्टूबर को भी ऑनलाइन फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि चुनाव आयोग में किस अधिकारी ने तकनीकी कंपनी TCS को ऑनलाइन फॉर्म 6 में बदलाव करने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी सवाल किया था कि TCS में इस बदलाव को किसने मंजूरी दी और क्या किसी पर इसे लागू करने के लिए दबाव डाला गया था।ज्ञानेश कुमार तत्काल गिरफ़्तार किए जाएँ: कांग्रेस
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इससे भी आगे बढ़कर ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि CEC देशभर में 'वोट चोरी' कर रहे हैं और अब पकड़े जाने के बाद देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की।
कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि CEC ने फॉर्म 6 के मामले में गलत दावा किया। जयराम रमेश ने कहा कि SIR के लिए फॉर्म 6 में बदलाव जानबूझकर किया गया और आरोप लगाया कि इसका मकसद युवा मतदाताओं, खासकर जेन ज़ी वोटरों, को प्रभावित करना था।
ज्ञानू देश का सबसे बड़ा गद्दार: सीजेपी
फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणी के बाद सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार को देश का सबसे बड़ा गद्दा बताया है। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा है, 'ज्ञानू ने सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी के बिना फ़ॉर्म 6 में बदलाव कैसे किया? उसने किसके आदेश पर ऐसा किया? इससे एक बात साफ़ हो जाती है: ज्ञानू अपनी मर्ज़ी से काम नहीं कर रहा था। वह अपने राजनीतिक आकाओं के लिए काम कर रहा था, भले ही इसके लिए उसे कानून के शासन से ऊपर उनके हितों को रखना पड़ा हो। ज्ञानू भारत का सबसे बड़ा गद्दार है।'SC ने CEC को रोकने से इनकार किया
फॉर्म 6 विवाद के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर भी सुनवाई की जिनमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में कुछ फैसले दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना लिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
हालाँकि, अदालत ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कोई फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। यानी फिलहाल CEC अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे और मामले की अंतिम सुनवाई बाद में होगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग के सभी संबंधित फैसलों की जांच करेगा। पीठ ने कहा कि यदि कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो अदालत उसे रद्द कर सकती है। पीठ ने कहा, 'हम सभी फैसलों की जांच करेंगे। अगर कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं है, तो हम उसे रद्द कर देंगे। आप अदालत की शक्ति जानते हैं।'
अदालत ने CEC को कानून के तहत मिली इम्युनिटी यानी कानूनी संरक्षण पर भी विचार करने के संकेत दिए। पीठ ने कहा कि CEC को पद छोड़ने के बाद भी मिलने वाली यह सुरक्षा ऐसी चीज है जिसकी अदालत जांच कर सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसी इम्युनिटी जजों को भी हासिल नहीं है।
फॉर्म 6 में बदलाव का विवाद कैसे शुरू हुआ?
फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर विवाद उस समय सामने आया जब चुनाव आयोग के भीतर ही इस बदलाव को लेकर आपत्तियों की खबर सामने आई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म 6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र पर आपत्ति जताई थी।
आपत्ति का आधार यह था कि फॉर्म 6 Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित एक वैधानिक फॉर्म है। इसलिए इसमें बदलाव के लिए नियमों में औपचारिक संशोधन जरूरी हो सकता है। इसके बाद आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी बयान में संशोधित घोषणा-पत्र का बचाव किया गया और दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा है। अब सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणी ने इसी दावे को विवाद के केंद्र में ला दिया है।
अब अदालत के सामने बड़े सवाल
सोमवार की सुनवाई के बाद फॉर्म 6 विवाद में कई सवाल सीधे न्यायिक जांच के दायरे में आ गए हैं।
- संशोधित फॉर्म 6 किस अधिकारी या संस्था ने तैयार किया?
- इसे लागू करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया?
- चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद बदलाव किस प्रक्रिया के तहत लागू हुआ?
- TCS को ऑनलाइन सिस्टम में बदलाव करने का निर्देश किसने दिया?
- 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने संशोधित घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने की बात किस आधार पर कही थी?
इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड और आगे की न्यायिक कार्यवाही में सामने आने हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और केंद्र से जवाब मांगा है। अदालत ने CEC को काम करने से रोकने की अंतरिम मांग स्वीकार नहीं की है, लेकिन साथ ही यह भी साफ़ कर दिया है कि कानून के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले फैसलों को वह रद्द कर सकती है।