loader

कांग्रेस के दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मायावती को दिया जवाब

कांग्रेस के वरिष्ठ दलित नेता और सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीएसपी नेता मायावती को करार जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि  जनता महंगाई से जूझ रही है, नौकरियां नहीं हैं, संस्थाओं पर आरएसएस का नियंत्रण है। इस लड़ाई में सभी विपक्षी दलों को एक होना चाहिए। यह समय एकजुटता का है, न की बहस का।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कल एक पुस्तक विमोचन के मौके पर कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने यूपी चुनाव के दौरान बीएसपी अध्यक्ष मायावती को मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की थी लेकिन मायावती ने ईडी और इनकम टैक्स छापों की डर में पेशकश को नामंजूर कर दिया। राहुल के बयान पर आज मायावती ने भी करारा जवाब दिया। मायावती ने राहुल से कहा कि पहले वे अपना घर संभालें और डूबती हुई कांग्रेस को बचाएं, तब दूसरों पर उंगली उठाएं। मायावती ने कांग्रेस की पेशकश को भी फर्जी बताया। 

ताजा ख़बरें

मीडिया ने आज मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछा कि क्या विपक्षी गठबंधन के दरवाजे अभी भी मायावती के लिए खुले हैं। इस पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि  अब बोलने का कोई फायदा नहीं। समय आने पर हम देखेंगे। जहां तक मायावती के आरोपों का सवाल है तो वो सही नहीं बोल रही हैं। कांग्रेस पार्टी हमेशा लोगों के साथ रही है, यह हमेशा संसद के अंदर और बाहर सभी मुद्दों का समाधान खोजने के लिए लड़ती है। मायावती ने जो कहा वह सही नहीं है।

मल्लिकार्जुन ने कहा कि वे (बीजेपी-आरएसएस) यह कोशिश कर रहे हैं कि सिर्फ एक पार्टी रह जाए। लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले अन्य दलों के सदस्यों को अपनी पार्टी में शामिल नहीं किया जाता है। लेकिन वे (बीजेपी) ऐसा उन जगहों पर करते हैं जहां वे नहीं जीतते। मायावती ने वही कहा जो राहुल गांधी कह रहे थे। एकसाथ आने से मजबूती आती है।

देश से और खबरें
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आज कहा कि राहुल को इस तरह की टिप्पणी करने से पहले 100 बार सोचना चाहिए। वे बीजेपी से जीतने में असमर्थ रहे हैं, लेकिन बस तोहमत लगाने का सहारा ले रहे हैं। कांग्रेस ने सत्ता में और यहां तक कि सत्ता से बाहर भी कुछ नहीं किया है।मायावती ने जोर देकर कहा कि इन छोटी-मोटी बातों की बजाय अब यूपी चुनावों की हार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मायावती ने कहा, "बीजेपी और आरएसएस भारत को न केवल 'कांग्रेस-मुक्त' बना रहे हैं, बल्कि 'विपक्ष-मुक्त' भी बना रहे हैं, जहां भारत के पास चीन की राजनीतिक व्यवस्था की तरह ही राष्ट्रीय से लेकर ग्रामीण स्तर तक सिर्फ़ एक प्रमुख पार्टी रह जाएगी।"
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें