loader

कोरोना वैक्सीन का निर्यात अगले माह से फिर शुरू क्यों?

भारत अगले महीने से विदेशों में वैक्सीन फिर से भेजना शुरू कर देगा। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वैक्सीन को लेकर तीखी आलोचनाओं के बीच मोदी सरकार ने वैक्सीन के निर्यात को रोक दिया था। उससे पहले सरकार 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत पड़ोसी देशों सहित दुनिया भर के 70 से ज़्यादा देशों में वैक्सीन की सप्लाई कर रही थी। ये टीके दान के रूप में भी थे और व्यावसायिक निर्यात के रूप में भी।

अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि भारत अक्टूबर में अपनी वैक्सीन मैत्री पहल फिर से शुरू करेगा। उनकी यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे से एक दिन पहले की गई है। प्रधानमंत्री मोदी वाशिंगटन में क्वाड देशों- संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। माना जाता है कि टीकाकरण के मुद्दे को राष्ट्रपति जो बाइडेन और दूसरे नेताओं द्वारा उठाए जाने की संभावना है। 

ताज़ा ख़बरें

मंडाविया ने कहा है कि वैक्सीन मैत्री में निर्यात अभियान के तहत पड़ोसी देशों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल के बाद से देश का मासिक वैक्सीन उत्पादन दोगुने से अधिक हो गया है और अगले महीने 30 से करोड़ खुराक का लक्ष्य तय है। उन्होंने कहा है कि केवल अतिरिक्त आपूर्ति से निर्यात किया जाएगा।

निर्यात का यह फ़ैसला तब लिया गया है जब सरकार ने तय किया है कि इस साल तक वैक्सीन लगाने योग्य आबादी यानी 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगवा देगी। लेकिन लगता है कि इस तय समय में उसका यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा। 

इसके लिए सरकार ने पहले दावा किया था कि वह अगस्त से दिसंबर तक 216 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध कराएगी लेकिन बाद में उसने कहा कि वह 135 करोड़ वैक्सीन ही उपलब्ध करा पाएगी। इसने वैक्सीन उपलब्ध कराने के आँकड़ों को संशोधित कर सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दिया था। 
सरकार का जो अब दिसंबर तक अपने सभी 94.4 करोड़ वयस्कों का टीकाकरण का लक्ष्य है उनमें से 61 प्रतिशत लोगों को ही कम से कम एक खुराक भी दी गई है। अब तक कुल मिलाकर क़रीब 80 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं।

टीकाकरण में जो कुछ भी तेज़ी आई है उसमें यह तथ्य भी शामिल है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद टीके का निर्यात रोक दिया गया था। सरकार की इसलिए आलोचना की गई थी कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर आने की वायरस विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद मोदी सरकार ने कुछ ऐसे देशों को वैक्सीन दी, जहाँ मृत्यु दर बेहद कम थी। यानी वहाँ वैक्सीन की बहुत ज़रूरत नहीं थी। 

देश से और ख़बरें

क्या अपने लोगों की जान की चिंता छोड़कर नरेन्द्र मोदी अपनी वैश्विक ब्रांडिंग करने के लिए ऐसा कर रहे थे? जबकि उन्हें मालूम था कि भारत की विशाल जनसंख्या के लिए पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि जब कोरोना संकट गहराया और वैक्सीनेशन की माँग बढ़ी तो सरकार ने पिंड छुड़ाने के लिए राज्य सरकारों पर ज़िम्मेदारी डाल दी। राज्य सरकारों को ग्लोबल टेंडर डालने के लिए कहा गया। अपनी साख बचाने के लिए कुछ राज्य सरकारों ने विदेशी कंपनियों से वैक्सीन खरीदने की कोशिश की, लेकिन पहले कंपनियों ने तत्काल वैक्सीन उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास पहले से ही दूसरे देशों का ऑर्डर पूरा करने का दबाव था। केंद्र की इस वैक्सीन नीति की जब चौतरफ़ा आलोचना होने लगी तो उसने टीकाकरण की पूरी ज़िम्मेदारी राज्यों से अपने पास ले ली।

सरकार ने अप्रैल महीने की शुरुआत में ही माना था कि उसने 84 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई।

बता दें कि वैक्सीन मैत्री पहल के कुछ लाभार्थियों में बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, भूटान, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका, ब्राजील, मोरक्को, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, मैक्सिको, डीआर कांगो, नाइजीरिया और यूके जैसे देश शामिल थे। भारत ने निर्यात रोकने से पहले लगभग 6.6 करोड़ खुराक या तो दान में दी या बेची थीं। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें