कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- 'संविधान ने जिस चुनाव आयोग को पूरी ताक़त दी, जनता के वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस CEC पर उनके अपने साथ भरोसा न करें उस पर देश कैसे भरोसा करे।'
कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की मंगलवार को हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं और उन्हें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।
CWC बैठक की अध्यक्षता खड़गे ने की। इसमें पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक का मकसद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर पार्टी की रणनीति तय करना था।
खड़गे ने क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'संविधान ने चुनाव आयोग को पूरी ताक़त दी थी और उसे जनता के वोट का चौकीदार बनाया था। लेकिन आज वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस सीईसी पर उनके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?' उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने 12 साल में लोकतंत्र की नींव को षड्यंत्रकारी तरीक़े से खोखला कर दिया है। साज़िश के तहत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। खड़गे ने बाबासाहेब आंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि संविधान सभा में उन्होंने साफ़ कहा था कि कोई भी योग्य व्यक्ति किसी अफसर की मर्जी से मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सकता। आज अफसर बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर नाम काट रहे हैं।
युवाओं के मताधिकार को लेकर पीएम पर हमला
खड़गे ने युवाओं के मताधिकार को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी ने 1988 में मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 साल की थी। लेकिन मोदी सरकार ने चुपचाप फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव कर युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की कोशिश की है। यह पूरी तरह गैरकानूनी है।
खड़गे ने कहा, नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते। नौजवान सवाल पूछेगा, इसका डर है। मल्लिकार्जुन खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष
उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में दस्तावेजों के साथ डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों और फॉर्म-6 की अनियमितताओं के बारे में गंभीर सवाल उठाए थे। अगर चुनाव आयोग ने तब गंभीरता दिखाई होती तो आज उसकी विश्वसनीयता नहीं गिरती।
कांग्रेस की पांच मांगें
खड़गे ने पारदर्शिता के लिए पांच साफ मांगें रखीं-
- मतदाता सूची में हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
- जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का मौका मिले।
- राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और जरूरी डेटा सरल फॉर्मेट में समय पर मिले।
- जहां गंभीर गड़बड़ियों के प्रमाण हों, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
- चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अहम डेटा और फ़ैसले इतने पारदर्शी हों कि कोई पक्ष जानकारी छिपाने का आरोप न लगा सके।
खड़गे ने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने-हारने की नहीं है। लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। आम वोटर ही सबसे शक्तिशाली है, न कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री। उन्होंने सीईसी को तुरंत हटाने और प्रधानमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
इससे एक दिन पहले खड़गे ने कहा था कि दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चिंता जताकर चुनाव आयोग के अंदर की स्थिति उजागर कर दी है। कांग्रेस ने सीईसी को 'डायबॉलिकल पीएम-एचएम डुओ' का मुखौटा बताया था। चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा है कि दो आयुक्तों के पत्र नीति या आईटी मामलों से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के डेपुटेशन से जुड़े थे। आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय संस्थान में सामान्य है और सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हैं।
कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर में कथित गड़बड़ियों से बड़े पैमाने पर लोगों के मताधिकार छिनने का खतरा है। विपक्षी इंडिया गठबंधन बुधवार को इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाएगा और संसद में सीईसी को हटाने का नोटिस फिर से देने की संभावना है।
'नोटबंदी' के बाद 'वोटबंदी' की साजिश
खड़गे ने कहा कि गरीब, दलित और वंचित वर्ग का सबसे बड़ा हथियार वोट है। 'नोटबंदी' के बाद अब 'वोटबंदी' की साजिश चल रही है, लेकिन कांग्रेस इसे सफल नहीं होने देगी। पार्टी सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी ताकि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रहे और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
खड़गे ने कहा, 'आज की बैठक महत्वपूर्ण है। फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेवारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है। हमारे पुरखों ने जिस मज़बूत लोकतंत्र की नींव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को मोदी सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीक़े से खोखला कर दिया है।'खड़गे ने कहा, 'गरीब, दलित, वंचित और शोषित वर्ग का सबसे बड़ा हथियार वोट होता है, इसलिए मोदी जी इस अधिकार को छीनना चाहते हैं, पर हम ऐसा नहीं होने देंगे। चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने ख़ुद CEC की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया। अब पूरे देश को मालूम है कि उनकी लगातार कोशिश सत्तापक्ष को फ़ायदा पहुंचाने की रही है।'
खड़गे ने कहा कि 'हमारे सामने पांच राज्यों के चुनाव हैं, इसलिए किसी मतदाता का हक न मारा जाए, ये देखना जरूरी है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित हो, चुनाव निष्पक्ष हों, जिससे आम जनता का विश्वास भारत की चुनाव प्रक्रिया में बनी रहे। तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा, लोकतंत्र फलता-फूलता रहेगा।'