सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मिलेगी या नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी बेंच मंगलवार को फ़ैसला कर सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई में सफदरजंग अस्पताल, एम्स और निजी लैब की सभी मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने एम्स और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों को भी अगली सुनवाई में मौजूद रहने के लिए कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 12:30 बजे होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले वांगचुक की पूरी मेडिकल स्थिति को समझना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि वांगचुक के सभी पैथोलॉजिकल टेस्ट और स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट हलफनामे के साथ अदालत में दाखिल की जाएं।

अदालत ने यह भी कहा, 'सफदरजंग अस्पताल की सभी मेडिकल रिपोर्ट पेश की जाए। एम्स द्वारा किए गए परीक्षणों की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर लाई जाए। वांगचुक के परिवार की ओर से कराए गए निजी लैब टेस्ट भी अदालत में जमा किए जाएं। एम्स के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अक्षय और वांगचुक के परिवार के डॉक्टर अगली सुनवाई में मौजूद रहें।'
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वांगचुक की पत्नी की अपील पर सुनवाई

यह सुनवाई सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर अपील पर हो रही है। इससे पहले रविवार को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद परिवार ने उस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी।

वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि उन्हें बिना पूर्व सूचना के जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि परिवार को अब तक वे मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गईं, जिनके आधार पर अस्पताल ने बताया था कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है।

अखिल सिब्बल ने अदालत से कहा,
हमें केवल मौखिक रूप से बताया गया कि पोटैशियम का स्तर कम है। रिपोर्ट कभी नहीं दिखाई गई। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि मरीज की सहमति के बिना कोई इलाज न किया जाए। निजी लैब की जांच में पोटैशियम का स्तर सामान्य सीमा में पाया गया।
सोनम वांगचुक के वकील अखिल सिब्बल

'वांगचुक होश में हैं, फैसला खुद ले सकते हैं'

सिब्बल ने अदालत में कहा कि सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और अपने फ़ैसले खुद लेने में सक्षम हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तार नहीं है और उसकी जान को तत्काल ख़तरा नहीं है तो क्या उसे अपनी पसंद के अस्पताल में जाने से रोका जा सकता है?

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉज फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक स्वायत्तता और उसकी सहमति का सम्मान किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या डॉक्टरों को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक मरीज आईसीयू की स्थिति में न पहुंच जाए? इस पर सिब्बल ने कहा कि परिवार इलाज का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि केवल पारदर्शिता चाहता है। उन्होंने कहा, 'मामला इलाज का नहीं, भरोसे का है। परिवार को रिपोर्ट नहीं दिखाई गई, इसलिए विश्वास की कमी पैदा हुई है।'
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को इलाज स्वीकार करने या न करने का अधिकार होता है। लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी व्यक्ति की बिगड़ती तबीयत से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका हो तो सरकार की जिम्मेदारी उसकी जान बचाना भी है।

उन्होंने अदालत को बताया कि वांगचुक के खून की जांच केवल सफदरजंग अस्पताल में ही नहीं, बल्कि एम्स और एक निजी लैब में भी कराई गई है और तीनों जगह लगभग समान परिणाम आए हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ़ कहा कि उसकी पहली चिंता सोनम वांगचुक की जान बचाना है। अदालत ने कहा, 'हमारी पहली चिंता उनकी जान बचाना है, बाकी सभी बातें बाद में आती हैं।' कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल लैब रिपोर्ट नहीं, बल्कि मरीज की पूरी क्लीनिकल स्थिति को भी साथ में देखना होगा।

पोटैशियम की रिपोर्ट पर उठे सवाल

सुनवाई में यह भी सामने आया कि सफदरजंग अस्पताल की एक रिपोर्ट में वांगचुक का पोटैशियम स्तर 2.8 बताया गया था, जबकि परिवार की ओर से पेश की गई निजी लैब रिपोर्ट में यह 3.5 था। इसी अंतर को देखते हुए अदालत ने सभी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर मंगाने का फैसला किया ताकि वास्तविक स्थिति साफ़ हो सके।
सुनवाई के दौरान वांगचुक की ओर से उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने की मांग भी की गई। लेकिन अदालत ने कहा कि किसी अस्पताल के इलाज के दौरान बाहरी डॉक्टरों की निगरानी या हस्तक्षेप सामान्य मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं होता।

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। उनका अनशन छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। 18 जुलाई को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इससे पहले 16 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

अब इस पूरे मामले में मंगलवार को होने वाली सुनवाई पर सभी की नज़र रहेगी। अदालत मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय सुनने के बाद यह तय करेगी कि सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए या नहीं।