मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की व्यापक कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रदर्शनकारियों को घसीटकर हिरासत में लेने और पुलिसकर्मियों के गुरुद्वारे के परिसर में प्रवेश करने के आरोपों ने धार्मिक स्थल की मर्यादा, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और पुलिस कार्रवाई की सीमाओं पर सवाल खड़े किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और दिल्ली में सख्त प्रतिबंधों के बीच कई प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में रात बिताई थी। शनिवार सुबह वे वहां से जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रास्ते में बैरिकेडिंग और पुलिस की तैनाती के कारण उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया गया। दोपहर करीब एक बजे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे और गुरुद्वारे के प्रवेश द्वार के पास प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
इस कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया हुई। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों ने आरोप लगाया कि लोग एक धार्मिक स्थल में शरण लेने के बावजूद हिरासत से नहीं बच सके। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य बिना अनुमति प्रस्तावित बड़े जमावड़े को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। इस संबंध में दिल्ली आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, सांसद महुआ मोइत्रा, आप नेता और पूर्व विधायक जनरल सिंह ने इस संबंध में वीडियो शेयर करते हुए तमाम सवाल किये हैं। 
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गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

इस मामले में दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज की सोशल मीडिया पोस्ट भी विवाद के केंद्र में है। बंगला साहिब से जुड़ी एक पोस्ट में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली पुलिस गुरुद्वारे के भीतर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंची थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों के जूते पहने होने और सिर नहीं ढकने पर भी आपत्ति जताई। सौरभ भारद्वाज की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि गुरुद्वारा सिख समुदाय का पवित्र धार्मिक स्थल है और वहां प्रवेश करते समय धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इस घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हिरासत में लेने के लिए पुलिस गुरुद्वारा परिसर में कैसे प्रवेश कर सकती है।

पुलिस जूते पहनकर घुसीः जनरैल सिंह, आप विधायक

तिलक नगर के विधायक और आम आदमी पार्टी के नेता जनरैल सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है- गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस कार्रवाई क्यों?
आज (शनिवार) गुरुद्वारा बंगला साहिब में हुई घटना बेहद गंभीर है, जहां पुलिस ने जूते पहनकर प्रवेश किया और लोगों को लाठियों से पीटकर बाहर निकाल दिया। गुरुद्वारा साहिब जैसे पवित्र स्थान पर ऐसी कार्रवाई क्यों हुई? डीएसजीएमसी, कृपया जवाब दे!

सांसद महुआ मोइत्रा की तीखी टिप्पणी

सांसद महुआ मोइत्रा ने इस संबंध में वायरल वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है- भारत में कोई भी सरकार गुरुद्वारे में पुलिस भेजने के बाद नहीं टिक पाई है। आज पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को शरण लेने से रोकने के लिए बंगला साहिब गई थी। लेकिन पुलिस को वहाँ से खदेड़ दिया गया। मोदी तेरा समय आ गया…।

बंगला साहिब में क्यों पहुंचे थे प्रदर्शनकारी?

गुरुद्वारा बंगला साहिब इससे पहले भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए शरणस्थल बना था। जुलाई में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर हुए आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने यहां शरण ली थी। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले शहर में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कुछ युवा रात में गुरुद्वारे में रुके थे, ताकि अगले दिन जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर सकें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक 24 वर्षीय प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह सुबह करीब नौ बजे से गुरुद्वारे में मौजूद थी। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर जाने की कोशिश की, लेकिन वहां बैरिकेडिंग देखकर वे वापस लौट आए। पुलिस की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी समय-समय पर बाहर निकलकर नारे लगाते और पुलिस को देखकर फिर पीछे हट जाते थे। शनिवार दोपहर करीब एक बजे प्रदर्शनकारियों का एक समूह गुरुद्वारे के प्रवेश द्वार के पास इकट्ठा हुआ। वहां ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘जय भीम’ के नारे लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, SIR पर विवाद

‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन का आह्वान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी संगठनों ने किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को वापस लेना था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं हुई हैं और इससे मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं; इन्हें अपने आप में साबित हो चुके तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हरियाणा के सोनीपत से आए एक किसान ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लोगों को मिला मतदान का अधिकार अब खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे तानाशाही जैसा बताया। प्रदर्शन के आयोजकों का कहना था कि यह आंदोलन चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित बड़े जमावड़े की अनुमति नहीं दी थी।

दिल्ली पुलिस का पक्ष: कानून-व्यवस्था के लिए हिरासत

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई को एहतियाती कदम बताया। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि उन्हें खुफिया सूचनाएं मिली थीं कि प्रस्तावित जमावड़े से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को अधिकतम 24 घंटे तक रखा जा सकता था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि CJP के नेताओं और स्वयंसेवकों के खिलाफ उस समय ऐसी कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की जाती। पुलिस का दावा था कि उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस के इस पक्ष से यह सवाल खत्म नहीं होता कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में लेने की आवश्यकता कितनी थी और धार्मिक स्थल के आसपास की गई कार्रवाई में किन नियमों का पालन किया गया। इन सवालों का जवाब देने के लिए पुलिस की विस्तृत सफाई और घटनास्थल के वीडियो की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी।

3,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का दावा

10 अक्टूबर को दिल्ली में कार्रवाई केवल बंगला साहिब तक सीमित नहीं रही। दिप्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पूरे शहर में लगभग 3,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता, पत्रकार, यूट्यूबर, वकील, छात्र और विपक्षी दलों के नेता शामिल थे। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रवक्ता सौरव दास तथा आशुतोष रंका को मुंबई से दिल्ली पहुंची उड़ान के अंदर से ही हिरासत में लिए जाने की खबर आई। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया। यूट्यूबर ध्रुव राठी और CJP की कानूनी इकाई की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की सूचना थी। इस व्यापक कार्रवाई के बीच बंगला साहिब की घटना इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहां केवल प्रदर्शन के अधिकार का सवाल नहीं है, बल्कि धार्मिक स्थल की मर्यादा और पुलिस के आचरण पर भी बहस हो रही है।