दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर एक नए डेटा विश्लेषण ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। Alt News के विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली की 70 में से 24 विधानसभा सीटों पर SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या इतनी कम हो गई है कि वह फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में वास्तव में वोट डालने वाले लोगों की संख्या से भी नीचे पहुंच गई है।
Alt News ने यह विश्लेषण Mandate Analytics द्वारा जुटाए और तैयार किए गए चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में इन 24 सीटों पर कुल 28,89,268 लोगों ने मतदान किया था, जबकि 31 अगस्त 2026 को जारी SIR ड्राफ्ट रोल में इन सीटों पर कुल 27,66,145 नाम ही बचे हैं।
यानी ड्राफ्ट सूची में 2025 में वोट डाल चुके लोगों की संख्या की तुलना में कम से कम 1,23,123 कम नाम हैं। Alt News का कहना है कि यह केवल न्यूनतम अंतर है, वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि यह मानना संभव नहीं है कि मौजूदा ड्राफ्ट सूची में शामिल हर व्यक्ति ने 2025 में मतदान किया था।
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पूरी दिल्ली में क्या हुआ?

दिल्ली के SIR के तहत जारी नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 97,53,577 नाम हैं। फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में कुल 94,94,607 लोगों ने मतदान किया था। इस तरह पूरी दिल्ली के स्तर पर ड्राफ्ट रोल में मतदान करने वालों की संख्या से केवल 2,58,970 यानी करीब 2.7 प्रतिशत अधिक नाम हैं। लेकिन 70 में से 24 विधानसभा क्षेत्रों में तस्वीर बिल्कुल अलग है। इन सीटों पर ड्राफ्ट मतदाता सूची 2025 में वास्तविक मतदान करने वालों की संख्या से भी छोटी हो गई है।

2025 की सूची और SIR के बाद कितना अंतर?

इन 24 विधानसभा क्षेत्रों में 2025 के चुनाव के समय कुल 49,14,127 मतदाता दर्ज थे। इनमें से 58.8 प्रतिशत ने मतदान किया था। अब SIR ड्राफ्ट रोल में इन 24 सीटों पर सिर्फ 27,66,145 नाम रह गए हैं। यह संख्या 2025 के कुल मतदाताओं का लगभग 56.3 प्रतिशत है, जबकि 2025 में मतदान प्रतिशत 58.8 प्रतिशत था। इन सीटों की मतदाता सूची में 2025 के मुकाबले कुल 21,47,982 नाम, यानी 43.7 प्रतिशत, कम हो चुके हैं।
Alt News के मुताबिक इनमें:
  • 4,10,759 नाम SIR की शुरुआती बेस सूची में ही नहीं थे।
  • 17,37,223 फॉर्म SIR प्रक्रिया के दौरान “uncollectable” यानी अप्राप्य/एकत्र न किए जा सकने वाले बताए गए।
  • इन 24 सीटों पर 2025 में 28,89,268 लोगों ने वोट डाला था।
  • लेकिन मौजूदा ड्राफ्ट रोल में केवल 27,66,145 मतदाता हैं।

संगम विहार में सबसे स्पष्ट अंतर

Alt News ने संगम विहार का उदाहरण विशेष रूप से दिया है। फरवरी 2025 में संगम विहार की मतदाता सूची में 2,05,647 मतदाता थे। इनमें से 1,25,723 लोगों ने वोट डाला था। 2026 के SIR ड्राफ्ट रोल में संगम विहार में अब 1,14,412 मतदाता दर्ज हैं।
यानी:
  • 2025 की सूची के मुकाबले 91,235 नाम कम हैं।
  • 2025 में वोट डालने वालों की तुलना में भी ड्राफ्ट रोल में 11,311 नाम कम हैं।
  • संगम विहार में 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के चंदन कुमार चौधरी ने 344 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। यह दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबसे कम जीत के अंतर के रूप में दर्ज हुआ था।

सातों दक्षिण-पूर्वी दिल्ली सीटों पर सवाल

इन 24 विधानसभा क्षेत्रों में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की सभी सात सीटें शामिल हैं। ये हैं- जंगपुरा, कस्तूरबा नगर, संगम विहार, कालकाजी, तुगलकाबाद, बदरपुर और ओखला। Alt News के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में SIR के दौरान नाम हटने का औसत स्तर काफी अधिक रहा। इस क्षेत्र की विधानसभा सीटों में बेस सूची के औसतन 43.5 प्रतिशत नामों के फॉर्म “uncollectable” बताए गए, जबकि आउटर नॉर्थ दिल्ली में यह औसत 24.3 प्रतिशत था। तुगलकाबाद में uncollectable फॉर्म का अनुपात दिल्ली में सबसे ज्यादा बताया गया है- बेस सूची का लगभग 47.8 प्रतिशत।

तुगलकाबाद और नई दिल्ली में भी बड़ा अंतर

तुगलकाबाद में 2025 के चुनाव में कुल मतदाताओं में से 56.1 प्रतिशत ने मतदान किया था, लेकिन SIR ड्राफ्ट रोल में अब 2025 के मतदाता आधार का केवल करीब 49 प्रतिशत ही बचा है। नई दिल्ली विधानसभा सीट में 2025 में 56.7 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि SIR ड्राफ्ट रोल में 2025 के मतदाता आधार का केवल 48.1 प्रतिशत नाम बचा है। नई दिल्ली सीट पर 2025 के चुनाव में अरविंद केजरीवाल 4,089 वोटों से चुनाव हार गए थे। 2025 में इस सीट पर 1,08,788 मतदाता थे। SIR ड्राफ्ट में अब सिर्फ 52,368 नाम हैं। यह संख्या 2025 में वोट डालने वालों से 9,318 कम है।

चार सीटों पर वोटों का अंतर जीत के अंतर से भी ज्यादा

Alt News के अनुसार इन 24 सीटों में चार विधानसभा क्षेत्रों में 2025 के मतदान और मौजूदा SIR ड्राफ्ट रोल के बीच का अंतर उस चुनाव में जीत के अंतर से ज्यादा है। ये सीटें हैं: संगम विहार, नई दिल्ली, दिल्ली कैंट और राजिंदर नगर। इसका मतलब यह है कि इन सीटों में SIR ड्राफ्ट सूची में जितने नाम कम हो चुके हैं, वह संख्या संबंधित सीट पर 2025 के चुनाव में उम्मीदवारों के बीच जीत के अंतर से भी बड़ी है।

दिल्ली में एसआईआर के कुछ तथ्यः दिल्ली में SIR की शुरुआत करीब 1.45 करोड़ नामों की बेस सूची से हुई थी। यह सूची 2025 के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई मतदाता सूची से लगभग 11.16 लाख कम थी। SIR के तहत हर मतदाता को बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO के जरिए एक enumeration form दिया जाना था। मतदाता को इसे भरकर वापस करना था। जिन फॉर्मों को वापस नहीं पाया गया, उन्हें “uncollectable” के रूप में दर्ज किया गया। इनके लिए ASDDO श्रेणियों का इस्तेमाल किया गया—यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट या अन्य। ऐसे मतदाताओं को ड्राफ्ट रोल से बाहर कर दिया गया। पूरी दिल्ली में 47,56,722 फॉर्म uncollectable बताए गए, जो बेस सूची का लगभग एक-तिहाई है।

24 सीटों में 17.37 लाख फॉर्म uncollectable

जिन 24 विधानसभा क्षेत्रों में अब ड्राफ्ट रोल में 2025 के मतदान से भी कम नाम हैं, वहां कुल 17,37,223 फॉर्म uncollectable घोषित किए गए। इन सीटों पर 2025 की मतदाता सूची और मौजूदा ड्राफ्ट रोल के बीच कुल 21,47,982 नामों का अंतर है। Alt News का कहना है कि इन आंकड़ों से यह सवाल उठता है कि क्या SIR के दौरान ऐसे बड़ी संख्या में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम बाहर हो गए, जिन्होंने 2025 के चुनाव में मतदान भी किया था।
दूसरी संभावना यह है कि 2025 में इस्तेमाल की गई मतदाता सूची में पहले से ही बड़ी संख्या में ऐसे नाम थे जो वास्तव में वहां नहीं होने चाहिए थे—जैसे मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाता। रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों स्थितियों में चुनाव आयोग से इस बड़े अंतर की व्याख्या अपेक्षित है।

ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं, अभी और नाम हट सकते हैं

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR की ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है। Alt News के अनुसार ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं के एक हिस्से को अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनसे पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जो लोग अपनी पात्रता साबित नहीं कर पाएंगे, उनके नाम अंतिम सूची से भी हट सकते हैं। इन 24 विधानसभा क्षेत्रों में ड्राफ्ट सूची में शामिल 9,78,541 मतदाताओं, यानी करीब 35 प्रतिशत, को नोटिस दिए गए हैं।
पूरी दिल्ली में ऐसे नोटिस पाने वालों की संख्या 33.13 लाख बताई गई है।
Alt News ने एक संभावित स्थिति का भी उल्लेख किया है। अगर नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से सिर्फ 10 प्रतिशत को अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाता है, तो दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 39 सीटों पर अंतिम मतदाता सूची में नामों की संख्या 2025 में मतदान करने वालों से कम हो सकती है।
यह एक अनुमानित परिदृश्य है, न कि अंतिम सूची के बारे में चुनाव आयोग का घोषित आंकड़ा।

चुनाव आयोग के सामने मूल सवाल क्या है?

Alt News के अनुसार इन 24 सीटों की स्थिति को संक्षेप में इस तरह देखा जा सकता है:
  • 2025 में मतदाता: 49.14 लाख
  • 2025 में मतदान करने वाले: 28.89 लाख
  • SIR ड्राफ्ट रोल: 27.66 लाख
  • यानी जिस मतदाता सूची पर 2025 का विधानसभा चुनाव हुआ था, उसमें इन सीटों पर जितने लोग वास्तव में वोट डाल चुके हैं, SIR के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में उससे भी कम नाम रह गए हैं।
रिपोर्ट का सवाल है कि इनमें से कितने लोग वास्तव में मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट थे और कितने ऐसे मतदाता थे जो जीवित, पात्र और 2025 में मतदान कर चुके थे।

चुनाव आयोग के भीतर भी SIR पर सवाल

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेदों की एक रिपोर्ट सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- ने 10 महीनों के दौरान SIR के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में दोनों अधिकारियों ने रिकॉर्ड पर यह दर्ज किया कि फैसले उनके ज्ञान के बिना लिए गए थे। यह इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट दिल्ली के SIR पर केंद्रित नहीं थी, लेकिन Alt News ने कहा है कि उसमें उठाए गए कुछ सवाल दिल्ली की मतदाता सूची के संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं।

ERONet और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण का सवाल

चुनाव आयोग आम तौर पर यह कहता रहा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित Electoral Registration Officer यानी ERO की होती है। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से Alt News ने लिखा है कि चुनाव आयोग के भीतर मतदाता डेटा के बढ़ते केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विवेक जोशी ने मतदाता सूची के डेटाबेस के बढ़ते केंद्रीकरण पर चिंता जताई थी, जबकि सुखबीर सिंह संधू ने रिकॉर्ड किया कि राज्य के चुनाव अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें ERONet तक पूरी पहुंच नहीं थी।
इसी संदर्भ में Alt News ने सवाल उठाया है कि दिल्ली की 24 सीटों में 17.37 लाख फॉर्म को uncollectable घोषित करने के फैसले आखिर किस स्तर पर लिए गए? क्या ये फैसले संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के ERO ने लिए या कहीं और से इन फैसलों को निर्देशित किया गया? Alt News के अनुसार चुनाव आयोग ने इस सवाल का सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
दिल्ली SIR के आंकड़े एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और चुनावी सवाल सामने रखते हैं। 2025 के चुनाव में जिन 24 विधानसभा क्षेत्रों में 28.89 लाख लोगों ने मतदान किया था, उन्हीं क्षेत्रों की SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची में अब केवल 27.66 लाख नाम हैं। मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाना मतदाता सूची पुनरीक्षण का घोषित उद्देश्य है। लेकिन जब ड्राफ्ट सूची में नामों की संख्या पिछले चुनाव में वास्तव में मतदान करने वालों की संख्या से भी कम हो जाती है, तो यह जरूरी हो जाता है कि चुनाव आयोग स्पष्ट करे कि कितने नाम क्यों हटे, uncollectable घोषित किए गए नामों का सत्यापन किस तरह हुआ और 2025 में मतदान कर चुके मतदाताओं की मौजूदा स्थिति क्या है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्राफ्ट सूची के बाद अभी दावे-आपत्तियां और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है और अंतिम सूची में नामों की संख्या और कम हो सकती है।