दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form 6 भरने की चुनाव आयोग की नई सलाह पर याचिकाकर्ताओं ने बुधवार, 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सामने इस मामले का मौखिक उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का 3 नवंबर का स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट की 28 अक्टूबर की टिप्पणियों के विपरीत है। अदालत ने पिछली सुनवाई में सवाल उठाया था कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे, उन्हें नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए Form 6 भरने को क्यों कहा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर कहा कि मामला अदालत के सामने लंबित है और लोगों को आशंकित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं से चुनाव आयोग के नए स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लाने के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा। अदालत ने इस मुद्दे पर अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की है। CJI ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग से समयसीमा आगे बढ़ाने के लिए कहा जा सकता है।
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चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को क्या स्पष्टीकरण दिया?

विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के 3 नवंबर को जारी स्पष्टीकरण से हुई। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजे गए निर्देश में कहा कि जिन मतदाताओं के नाम SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं, वे अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए Form 6 भर सकते हैं।
आयोग के मुताबिक, यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा जिनके नाम पहले की मतदाता सूचियों में दर्ज थे। यानी किसी व्यक्ति का पहले मतदाता होना उसे Form 6 भरने से नहीं रोकता। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर Form 6 भरना गलत घोषणा (False Declaration) नहीं माना जाएगा कि संबंधित व्यक्ति पहले भी मतदाता सूची में शामिल था।
आयोग ने यह भी कहा कि ऐसे मतदाताओं के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते: संबंधित मतदाता किसी अन्य लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो। Form 6 में की गई घोषणा कानून के अनुरूप हो। कार्रवाई का एकमात्र आधार यह न हो कि उसका नाम पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था। धारा 31 के तहत गलत घोषणा करने पर आपराधिक कार्रवाई और सजा का प्रावधान है। चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि पहले से मतदाता रहे व्यक्ति को केवल Form 6 भरने के कारण इस धारा के तहत अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को क्या सवाल उठाए थे?

इससे पहले 28 अक्टूबर को दिल्ली SIR मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि जिन लोगों के नाम 2026 की मतदाता सूची में पहले से मौजूद थे, उन्हें SIR के दौरान नाम कटने के बाद नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए Form 6 भरने को क्यों कहा जा रहा है?
  • सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि Form 6 पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों के पंजीकरण के लिए है। इसमें आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहले किसी मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं रहा है।
  • अदालत ने सवाल उठाया था कि दिल्ली में ऐसे अनेक मतदाता हो सकते हैं जिन्हें गणना फॉर्म (Enumeration Form) इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि वे अपना घर बदल चुके थे या काम के सिलसिले में अस्थायी रूप से शहर से बाहर थे।
  • ऐसे लोगों को Form 6 भरने के बजाय Form 8 या अपना गणना फॉर्म जमा करने का मौका क्यों नहीं दिया जा सकता?
  • Form 8 का इस्तेमाल मुख्य रूप से निवास स्थान बदलने, मतदाता सूची में पता संशोधित कराने और संबंधित प्रविष्टियों में सुधार के लिए किया जाता है।
  • इस सुनवाई में प्रशांत भूषण ने बताया था कि दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें करीब 43 लाख ऐसे लोग हैं जिन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित बताया गया है।
  • उन्होंने कहा था कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें गणना फॉर्म मिला ही नहीं। इसके बावजूद चुनाव आयोग उनसे Form 6 भरने को कह रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट के सवालों पर चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने कहा था कि आयोग अदालत के सुझावों पर विचार करेगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगा। आयोग ने समयसीमा बढ़ाने पर भी विचार करने की बात कही थी।
  • अदालत ने अस्थायी रूप से स्थान बदलने वाले मतदाताओं के लिए एक अलग श्रेणी बनाने का सुझाव भी दिया था।

47.56 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला

दिल्ली में SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला विवाद का प्रमुख कारण है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, लगभग 47.56 लाख मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखा गया था। ASDD का मतलब है: Absent – अनुपस्थित, Shifted – स्थानांतरित, Dead – मृत और Duplicate – दोहरी प्रविष्टि। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इनमें लगभग 31.59 लाख मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित और 11.73 लाख को अनुपस्थित या लापता बताया गया है।

उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन उन्हें गणना फॉर्म नहीं मिल पाया। इसके बावजूद उनके नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए और अब उन्हें नए मतदाता की तरह Form 6 भरने के लिए कहा जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोगों के लिए Form 8 या गणना फॉर्म जमा करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना न पड़े।

याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से क्या मांग की है?

याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी ने 3 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे गए अपने पत्र में एक सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की थी। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
  • 1. ASDD सूची में शामिल मतदाताओं को Form 6 भरने के लिए बाध्य न किया जाए।
  • 2. जिन लोगों का पता बदला है, उन्हें Form 8 भरने की अनुमति दी जाए।
  • 3. जिन लोगों को गणना फॉर्म नहीं मिला, उन्हें वह फॉर्म जमा करने का अवसर दिया जाए।
  • 4. हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए।
  • 5. बूथ और ब्लॉक स्तर पर संबंधित फॉर्म उपलब्ध कराए जाएं।
  • 6. मतदाताओं को फॉर्म भरने में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की सहायता मिले।
  • 7. पूरी प्रक्रिया का हिंदी और अन्य संबंधित भाषाओं में व्यापक प्रचार किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे वास्तविक मतदाताओं को तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया गया हवाला

लाइव लॉ के मुताबिक  यह मामला निलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग (Nilotpal Datta v. ECI) से संबंधित था। इसमें दो मतदाताओं के नाम गणना प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण मतदाता सूची से हट गए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि Form 6 भरने पर गलत घोषणा के आरोप में कार्रवाई होने की आशंका उचित नहीं है, क्योंकि ऐसा फॉर्म भरने का निर्देश स्वयं चुनाव आयोग ने दिया है। अदालत ने कहा था कि मतदाता Form 6 जमा कर सकते हैं और उनके आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इसी फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि पहले मतदाता सूची में शामिल होने के बावजूद Form 6 भरने मात्र से किसी मतदाता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है याचिका

दिल्ली SIR के खिलाफ अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस याचिका में केवल मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा ही नहीं उठाया गया है, बल्कि उन मतदाताओं को जारी किए गए नोटिसों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं जिन्हें 'Logical Discrepancies' यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर जांच के दायरे में रखा गया था। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग यह बताए कि किन मानदंडों, परिभाषाओं, एल्गोरिदम और प्रशासनिक दिशानिर्देशों के आधार पर मतदाताओं को इस श्रेणी में रखा गया। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऐसे मतदाताओं के नाम और नोटिस जारी करने के विशिष्ट कारणों की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।