दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने अमित शाह से कहा कि परिसीमन 1971 की जनगणना के आधार पर ही हो। शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से इस पर प्रस्ताव लाने की अपील की।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद बैठक में डीके शिवकुमार, विजय, अमित शाह और अन्य।
कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे दक्षिण के राज्यों ने गुरुवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी परिसीमन का जोरदार विरोध किया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि लोकसभा की 543 सीटें ही बरकरार रखी जाएँ और यदि परिसीमन हो तो उसका आधार 1971 की जनगणना ही रखा जाए।
शिवकुमार के साथ ही तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की राष्ट्रीय नीति को सफलतापूर्वक लागू किया है तो ऐसे में नई जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से इन राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जो उनके साथ अन्याय होगा।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों में यह वास्तविक और साझा चिंता है कि यदि परिसीमन हाल की जनगणना के आधार पर हुआ तो संसद में उनकी राजनीतिक आवाज कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक प्रगति में देश के लिए उदाहरण पेश किया है। राष्ट्रीय नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों को उनकी सफलता के लिए 'सजा' नहीं मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार क़ानून के ज़रिए यह भरोसा दे कि किसी भी राज्य की संसद में हिस्सेदारी उसकी जनसंख्या नियंत्रण की सफलता के कारण कम नहीं होगी। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सार्वजनिक नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिए जो राष्ट्रीय लक्ष्य पूरे करने वाले राज्यों को नुकसान पहुंचाएँ।
विजय इससे पहले 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करा चुके हैं जिसमें 543 सीटें फ्रीज रखने और महिला आरक्षण को उसी के अंदर लागू करने की बात थी।
परिषद प्रस्ताव लाए: शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजे, जिसमें तीन प्रमुख मांगें शामिल हों। उन्होंने कहा कि-
- परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को ही आधार बनाया जाए।
- लोकसभा की 543 सीटें अगले 25 वर्षों तक यथावत रखी जाएं।
- महिला आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही लागू किया जाए और इसे परिसीमन से न जोड़ा जाए।
शिवकुमार ने कहा, 'हमें यह आश्वासन ज़रूर मिला है कि दक्षिणी राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी, लेकिन प्रतिनिधित्व केवल सीटों की संख्या का मामला नहीं है। संसद में हमारी आवाज़ और प्रभाव भी उतना ही अहम है।'
दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि यदि परिसीमन 2011 या उसके बाद की जनगणना के आधार पर किया गया तो अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले उत्तरी राज्यों को अधिक लोकसभा सीटें मिलेंगी। दूसरी ओर, जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे दक्षिणी राज्यों की संसद में हिस्सेदारी अपेक्षाकृत घट सकती है। उनका कहना है कि इससे उनकी राजनीतिक ताकत और नीति निर्माण में प्रभाव कम होगा।
'दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था का इंजन'
बैठक में डीके शिवकुमार ने कहा कि दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान देता है। उन्होंने बताया कि पांच दक्षिणी राज्य मिलकर भारत की लगभग एक-तिहाई जीडीपी में योगदान देते हैं, जबकि इन राज्यों की आबादी देश की कुल आबादी का लगभग एक-पांचवां हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक योगदान के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए।
बैठक में कर्नाटक ने केंद्र से वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी की। कर्नाटक मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग में कर्नाटक का हिस्सा 4.7 प्रतिशत था, 15वें वित्त आयोग में यह घटकर 3.6 प्रतिशत रह गया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को छह वर्षों में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने 16वें वित्त आयोग में हिस्सेदारी बढ़कर 4.13 प्रतिशत होने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसे फिर से 4.7 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जीएसटी और आयकर संग्रह में देश के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में है, इसलिए बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।विजय ने फिर उठाया NEET का मुद्दा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने नीट परीक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नीट ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ न्याय नहीं करती। तमिलनाडु को मेडिकल, डेंटल और आयुष पाठ्यक्रमों में केवल 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य की लंबे समय से चली आ रही स्कूल आधारित प्रवेश प्रणाली अधिक न्यायसंगत रही है। विजय ने कहा कि तमिलनाडु छात्रों के हितों और मेडिकल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या है दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद?
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत गठित एक वैधानिक सलाहकार निकाय है। इसका उद्देश्य दक्षिणी राज्यों और केंद्र सरकार के बीच सहयोग बढ़ाना तथा साझा मुद्दों पर समाधान निकालना है। इस परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी सदस्य हैं, जबकि अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। इस परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं, जबकि उपाध्यक्ष रोटेशन के आधार पर हर बार अलग अलग राज्य के सीएम होते हैं। इस बार इसके उपाध्यक्ष तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय थे।बहरहाल, लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने और भविष्य के परिसीमन को लेकर देश में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। दक्षिणी राज्यों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण की सफलता की कीमत उन्हें संसद में कम प्रतिनिधित्व के रूप में नहीं चुकानी चाहिए। ऐसे में आने वाले समय में परिसीमन का मुद्दा केंद्र और राज्यों के बीच एक बड़ा राजनीतिक विषय बना रह सकता है।