अखिलेश यादव की पार्टी सपा के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नाथवानी रिलायंस की कंपनी के बोर्ड मेंबर हैं। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी बीजेपी की मदद से राज्यसभा की शोभा बढ़ा रहे हैं। अखिलेश के इस दांव की राजनीतिक क्षेत्रों में काफी चर्चा है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ धनराज नाथवानी (दायें)
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने बुधवार को अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। धनराज नाथवानी का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह सक्रिय राजनीति के बजाय कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से जुड़े रहे हैं। अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दिया था कि पार्टी राज्यसभा के लिए एक ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार उतारेगी।
धनराज नाथवानी ने बुधवार को लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर वह पार्टी अध्यक्ष के ‘विश्वास और भरोसे’ के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के एक नए चरण की शुरुआत बताया।
धनराजनाथवानी बुधवार को नामांकन भरते हुए है
कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी?
5 फरवरी 1986 को जन्मे धनराज परिमल नाथवानी, रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी भी राज्यसभा सांसद हैं। खास बात यह है कि परिमल नाथवानी इस समय एनडीए के समर्थन से राज्यसभा में हैं और कुछ महीने पहले ही झारखंड से राज्यसभा के लिए चौथी बार चुने गए हैं। बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा तक पहुंचाने के लिए काफी मदद की है। इस तरह पिता और पुत्र की मौजूदा राजनीतिक संबद्धता अलग-अलग खेमों से जुड़ती दिखाई देती है।धनराज नाथवानी ने लंदन के Regents Business School से इंटरनेशनल बिजनेस में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) किया है। इसके बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से कॉरपोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशंस में MBA किया।
रिलायंस में क्या जिम्मेदारी है?
धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। वह Reliance New Energy Ltd और Reliance Projects & Property Management Services Ltd के निदेशक भी हैं। उनके प्रोफाइल के अनुसार उनकी जिम्मेदारियों का दायरा मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, न्यू एनर्जी, डिफेंस और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।वह Reliance Corporate IT Park Limited के बोर्ड सदस्य भी हैं। इसके अलावा वह जामनगर स्थित रिलायंस की मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की देखरेख करते हैं और गुजरात में रिलायंस जियो से जुड़ी रणनीतिक जिम्मेदारियों में भी भूमिका निभाते हैं। वह रिलायंस के Engineering, Procurement and Construction यानी EPC वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं और कंपनी के विभिन्न निर्माण तथा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी करते हैं।
गुजरात क्रिकेट से भी जुड़ा है नामः धनराज नाथवानी केवल कॉरपोरेट क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं। नवंबर 2022 में उन्हें GCA का अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने अमित शाह के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन की अध्यक्षता नरेंद्र मोदी और फिर अमित शाह भी कर चुके हैं। GCA अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम समेत राज्य में क्रिकेट प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम देखता है। उनके प्रोफाइल में गुजरात में क्रिकेट के प्रशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और जमीनी स्तर पर क्रिकेट के विकास से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख है।
- वह द्वारकाधीश मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक संस्था के उपाध्यक्ष भी हैं। उनके नाम का संबंध कई शैक्षणिक, पर्यावरण, वन्यजीव और विरासत संस्थाओं से भी बताया गया है।
- उनके प्रोफाइल में Gujarat State Board for Wildlife, Pandit Deendayal Energy University, Gujarat Energy Research and Management Institute और GLS University जैसी संस्थाओं से जुड़े होने का जिक्र है।
- धनराज नाथवानी को अंबानी परिवार के करीबी लोगों में गिना जाता है।
धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी का सबसे दिलचस्प पहलू उनके पिता परिमल नाथवानी की राजनीतिक स्थिति है। परिमल नाथवानी रिलायंस से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी होने के साथ राज्यसभा सांसद भी हैं और हाल में एनडीए के समर्थन से झारखंड से राज्यसभा में चौथी बार पहुंचे हैं। इसके विपरीत उनके बेटे धनराज को समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पिता एनडीए के साथ, बेटा सपा के टिकट पर
अखिलेश यादव की दिलचस्प राजनीति
इसी वजह से नाथवानी परिवार की राजनीतिक यात्रा पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, धनराज की उम्मीदवारी को लेकर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी ने अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक कारण नहीं बताया है। एक वरिष्ठ सपा नेता ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी ने ‘सरप्राइज’ दिया है और आगे भी ऐसे सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं।
- अखिलेश यादव को आज 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक में जाना था। लेकिन लखनऊ में इस महत्वपूर्ण नामांकन की वजह से वो इंडिया गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे। इसे यूं भी कह सकते हैं कि धनराज नाथवानी के लिए उन्होंने विपक्ष की बैठक छोड़ दी।
यूपी में राज्यसभा का गणित क्या है?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मतदान 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन मतगणना की जाएगी। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। इन 10 सीटों में कई प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा, बीजेपी के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद एक सीट रिक्त हुई थी। दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।वर्तमान विधानसभा संख्या के आधार पर चुनावी गणित में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को आठ सीटें मिलने की स्थिति बताई जा रही है, जबकि कांग्रेस के समर्थन से समाजवादी पार्टी दो सीटें हासिल कर सकती है। यदि उपलब्ध सीटों से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में आते हैं तो मुकाबला हो सकता है और ऐसी स्थिति में क्रॉस-वोटिंग भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी
समाजवादी पार्टी ने धनराज नाथवानी के साथ अपने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव को भी उम्मीदवार बनाया है। रामगोपाल यादव पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और लंबे समय से राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। उनके साथ नाथवानी की उम्मीदवारी पार्टी के पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व और कॉरपोरेट-स्पोर्ट्स प्रशासन से आने वाले नए चेहरे का संयोजन बनाती है।इस घोषणा के साथ उत्तर प्रदेश का राज्यसभा चुनाव केवल सीटों के गणित तक सीमित नहीं रहा है। धनराज नाथवानी की कॉरपोरेट पृष्ठभूमि, रिलायंस में उनकी जिम्मेदारियां, गुजरात क्रिकेट प्रशासन में भूमिका और उनके पिता की एनडीए से जुड़ी संसदीय पृष्ठभूमि ने इस चुनाव में उनकी उम्मीदवारी को खास तौर पर चर्चा का विषय बना दिया है।