सीजेपी का शुक्रवार यानी 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च होगा। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से शाम 5 बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। यह आह्वान CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचने और नारे लगाने के मामले में गिरफ्तार कर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद किया गया है। 
अभिजीत दिपके ने बुधवार को कहा कि इस तिरंगा मार्च के ज़रिए यह संदेश दिया जाएगा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है। दिपके ने रांका और दास के ख़िलाफ़ इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि देश में विरोध की आवाज दबाने के लिए 'अघोषित आपातकाल' जैसी स्थिति बनाई जा रही है।

तिरंगा मार्च का मक़सद

दिपके ने कहा कि तिरंगा मार्च कार्यक्रम के ज़रिए यह दिखाया जाएगा कि तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। दिपके का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश के नागरिकों का प्रतीक है और इसे लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना अपराध नहीं माना जाना चाहिए। यह मार्च जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचे CJP नेताओं की गिरफ्तारी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
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'आखिर उनका अपराध क्या था?'

दिल्ली पहुँचने से पहले नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने सवाल किया कि CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराकर आखिर कौन-सा अपराध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने के मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
दिपके ने कहा कि वह यह समझना चाहते हैं कि तिरंगा लेकर अपनी बात रखने वाले लोगों को जेल क्यों भेजा गया। उनके मुताबिक, 16 अक्टूबर का तिरंगा मार्च इसी सवाल को सार्वजनिक रूप से उठाने का प्रयास होगा। हालाँकि, पुलिस की ओर से दोनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का आधार अलग बताया गया है। पुलिस के मुताबिक़ दोनों ने बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश किया था। पुलिस का कहना है कि मामला तिरंगा फहराने का नहीं, बल्कि प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश और कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन से भी जुड़ा है।

रांका, दास को तिहाड़ जेल भेजा

दोनों को बुधवार सुबह विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 

पुलिस ने कथित तौर पर कानून के बार-बार उल्लंघन और इस आशंका का हवाला दिया कि जमानत पर रिहा होने पर रांका और दास फिर नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं और अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए उकसा सकते हैं। इसी आधार पर दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

दिपके ने ब्रिटिश शासन से की तुलना

अभिजीत दिपके ने सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की तुलना ब्रिटिश शासन के दौर से भी की। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन्हें याद नहीं आता कि भारत में सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा लहराने के लिए लोगों को आखिरी बार कब जेल भेजा गया था- सिवाय उस दौर के, जब देश पर अंग्रेजों का शासन था। दिपके के मुताबिक, उस समय विदेशी शासक भारतीयों को अपने से कमतर समझते थे और उनके साथ उसी तरह का व्यवहार करते थे।
इस तुलना के ज़रिए उन्होंने मौजूदा कार्रवाई पर सवाल उठाया और इसे विरोध के अधिकार से जोड़कर देखा। उनका आरोप है कि तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई लोकतंत्र में असहमति की जगह को सीमित करती है। हालाँकि, पुलिस की ओर से गिरफ्तारी का आधार तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि कथित तौर पर बैरिकेड पार कर बिना अनुमति प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करना बताया गया है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल को लेकर SC में याचिका

इसी विवाद के बीच वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में दिल्ली के निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से जंतर-मंतर को हटाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन और अपनी मांगें सार्वजनिक रूप से रखने का एक अहम स्थान रहा है। इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने से नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
याचिका में यह भी दलील दी गई है कि विरोध प्रदर्शन के लिए सुझाए गए दूसरे स्थान शहर के प्रमुख हिस्सों से काफी दूर हैं। इससे आम नागरिकों के लिए वहां पहुंचना और अपनी आवाज उठाना मुश्किल हो सकता है। याचिका में दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करता है, तो यह मामला केवल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए स्थान तय करते समय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना अपराध है?

CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने भी उठाया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर विरोध करना अपने आप में अपराध नहीं होना चाहिए। लेकिन इस मामले में दो पहलुओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। पहला, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार। दूसरा, किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश के लिए लागू नियमों और पुलिस के निर्देशों का पालन।
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पुलिस का दावा है कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने बैरिकेड पार कर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश किया था। दूसरी ओर, CJP का सवाल है कि तिरंगा लेकर अपनी मांग उठाने पर इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की गई।

तिरंगा मार्च से बढ़ सकता है विवाद

16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित तिरंगा मार्च अब इस पूरे विवाद का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा। सीजेपी का कहना है कि इस कार्यक्रम के ज़रिए राष्ट्रीय ध्वज और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर अपना संदेश दिया जाएगा। वहीं, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थलों से संबंधित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई भी अहम है। अदालत में यह सवाल उठ सकता है कि विरोध के लिए उपलब्ध स्थानों पर लगाई गई पाबंदियां नागरिकों के अधिकारों को किस हद तक प्रभावित करती हैं।
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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

CJP और दूसरे संगठनों के प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए गए सवाल हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। इन प्रदर्शनों के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। राजधानी में युवा संगठनों और अन्य समूहों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई तथा प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियों को लेकर भी विवाद बढ़ा है। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना और विरोध दर्ज कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।