India US Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत ट्रेड डील पर सहमत हो गए हैं और जवाबी टैरिफ में कटौती होगी। जानिए इस समझौते का व्यापार, उद्योग और द्विपक्षीय रिश्तों पर असर।
पीएम मोदी और यूएस राष्ट्रपति ट्रंप
आख़िरकार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बन गई। और इसके साथ अब अमेरिकी टैरिफ़ भी हटेगा। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की। इस घोषणा से पहले ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात की। फोन पर बातचीत की जानकारी अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके कुछ देर पहले ही दी थी। राजदूत ने लिखा था, 'प्रेसिडेंट ट्रंप ने अभी-अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की। जुड़े रहें..."। उनकी इस पोस्ट का मतलब था कि इससे जुड़ी ख़बरें आने वाली हैं। और आख़िरकार वह ख़बर आ ही गई। खुद ट्रंप ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जानकारी दी।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि ट्रेड डील के तहत यूनाइटेड स्टेट्स कम रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा और इसे 25% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। उन्होंने पोस्ट में कहा, 'आज सुबह भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के एक शक्तिशाली और सम्मानित नेता हैं। हमने कई चीजों पर बात की, जिसमें व्यापार, और रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करना शामिल है। वह रूसी तेल खरीदना बंद करने और यूनाइटेड स्टेट्स और, शायद, वेनेजुएला से बहुत ज़्यादा तेल खरीदने पर सहमत हुए। इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ़्ते हज़ारों लोग मर रहे हैं!'
मोदी के अनुरोध पर... सहमत हुए: ट्रंप
ट्रेड डील की घोषणा करते हुए ट्रंप ने मोदी को फिर लपेटे में लिया। ट्रंप ने ट्रुथ सेशल पर लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी के मित्रता और सम्मान के कारण और उनके अनुरोध के अनुसार हम तुरंत प्रभाव से ट्रेड डील के लिए सहमत हुए। उन्होंने आगे कहा, 'ट्रेड डील के तहत यूनाइटेड स्टेट्स जवाबी टैरिफ कम करके 25% से 18% कर देगा। वे भी इसी तरह यूनाइटेड स्टेट्स के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को घटाकर ज़ीरो कर देंगे। प्रधानमंत्री ने 500 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की अमेरिकी एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, कोयला और कई अन्य प्रोडक्ट्स के अलावा, बहुत बड़े लेवल पर "बाय अमेरिकन" के लिए भी कमिटमेंट किया। भारत के साथ हमारे शानदार रिश्ते आगे और भी मज़बूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी और मैं, दो ऐसे लोग हैं जो काम पूरा करते हैं, जो ज़्यादातर लोगों के बारे में नहीं कहा जा सकता।'
ट्रंप की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज अपने प्यारे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। खुशी है कि अब मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम होकर 18% हो जाएगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद। जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी फायदे वाले सहयोग के लिए बहुत सारे मौक़े खुलते हैं।'
पीएम ने आगे कहा, 'वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व बहुत ज़रूरी है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। मैं अपनी पार्टनरशिप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।'
500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीद?
ट्रंप ने तो बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन अभी तक भारत सरकार या पीएम मोदी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है कि भारत रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर देगा या 500 बिलियन डॉलर के इतने बड़े पैमाने पर अमेरिकी सामान खरीदेगा। भारत पिछले सालों से रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद रहा है। अचानक इतना बड़ा बदलाव आसान नहीं होगा।
दोस्ती का ड्रामा?
ट्रंप ने पहले अगस्त 2025 में भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। अब इसे 18% पर लाकर ट्रंप खुद को दोस्त दिखा रहे हैं, लेकिन असल में यह टैरिफ पहले से ही ऊंचा था। ट्रंप ने मित्रता, सम्मान और अनुरोध जैसे शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किया। यह दिखाता है कि ट्रंप अपनी छवि बनाने के लिए व्यक्तिगत रिश्तों को हथियार बनाते हैं। यह एक तरह का राजनीतिक खेल लगता है, जहां ट्रंप भारत को दबाव में रखकर अमेरिकी हित साध रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील ट्रंप की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है ताकि यूक्रेन युद्ध पर दबाव बनाया जा सके और अमेरिकी उत्पाद बेचा जा सके।
दवा, कपड़ा, जैसे उत्पादों पर 25% से 18% टैरिफ कम होने से भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा, लेकिन भारत को अमेरिकी सामान ज्यादा खरीदने पड़ेंगे। इससे घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, रूस से तेल बंद करने से भारत की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की इस घोषणा से दोनों देशों के रिश्ते मजबूत दिखते हैं, लेकिन असल डील की पूरी डिटेल्स और भारत की सहमति अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में दोनों सरकारों से ज्यादा जानकारी आनी चाहिए। यह समझौता वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके फायदे-नुकसान दोनों होंगे।