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पाँच राज्यों के पोल नहीं टलेंगे? जानिए, चुनाव आयोग की तैयारियों के क्या हैं संकेत

कोरोना के ओमिक्रॉन संक्रमण के ख़तरे के बीच पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे या नहीं? इस सवाल पर लगाए जा रहे अलग-अलग कयासों के बीच चुनाव आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के साथ सोमवार को बैठक की है। इसमें कोरोना के हालात को लेकर समीक्षा की गई। वैसे तो चुनाव पर फ़ैसले को लेकर चुनाव आयोग की ओर से फ़िलहाल कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन चुनाव अधिकारी राज्यों में चुनावी तैयारी का भी जायजा ले रहे हैं। तो सवाल वही है कि चुनाव पर आख़िर क्या फ़ैसला लिया जाएगा?

यह सवाल तब से ज़्यादा जोर शोर से उठ रहा है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि ओमिक्रॉन के ख़तरे को देखते हुए आगामी यूपी विधानसभा के चुनाव टाल दिए जाएँ। अदालत ने प्रधानमंत्री से ठोस कदम उठाने और रैलियों, बैठकों व चुनावों को रोकने और स्थगित करने पर विचार करने का आग्रह किया था। 

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साफ़ है कि अदालत ने चुनाव टालने का आदेश नहीं दिया है और सिर्फ़ आग्रह किया है। इसका मतलब है कि इस पर फ़ैसला चुनाव आयोग ही लेगा। 

लेकिन चुनाव आयोग की आज स्वास्थ्य महकमे से जुड़े जिस शीर्ष अधिकारी के साथ बैठक हुई है उन्होंने उत्तर प्रदेश और पंजाब में टीकाकरण पर जोर देने को कहा है। उन्होंने पिछले दिनों ही दोनों राज्यों में राष्ट्रीय औसत से कम टीकाकरण होने के कारण इसमें तेज़ी लाने के लिए कहा था।

इधर आज की बैठक के बाद एनडीटीवी ने भी सूत्रों के हवाले से कहा है कि चुनाव टाले जाने की संभावना नहीं है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, 'आयोग मंगलवार दोपहर को एक निर्धारित चुनाव तैयारियों की समीक्षा बैठक के लिए लखनऊ के लिए रवाना होगा और 30 तारीख को दोपहर में लौटेगा।' 

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि आयोग राज्य की स्थिति की समीक्षा करने के बाद फ़ैसला करेगा।

चुनाव आयोग फ़िलहाल विधानसभा चुनावों से पहले मतदान वाले राज्यों का दौरा कर रहा है। बता दें कि चुनाव वाले राज्यों की तारीखों की घोषणा से पहले आयोग ऐसा दौरा करता रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे और राजीव कुमार पहले ही पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के मतदान वाले राज्यों का दौरा कर चुके हैं और अब उत्तर प्रदेश और मणिपुर का दौरा करने वाले हैं।

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मुख्य चुनाव आयुक्त चंद्रा ने गोवा की समीक्षा यात्रा के दौरान कहा था कि कोरोना महामारी की एक और लहर की आशंका के बावजूद चुनाव आयोग गोवा में चुनाव कराने के लिए तैयार है। हालाँकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय चुनाव अधिकारियों को कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि मतदान भी पर्याप्त सावधानियों के साथ होगा।

गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का वर्तमान कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त होने वाला है।

बता दें कि देश में इस महीने की शुरुआत में पहली बार ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामलों की पुष्टि के बाद से अब तक कम से कम 578 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। 151 मरीज या तो ठीक हो गये हैं वे पलायन कर गये हैं। नये वैरिएंट के सबसे ज़्यादा मामले दिल्ली में आए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में अब तक 142 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है और वहाँ 141 पॉजिटिव केस आए हैं।

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नये वैरिएंट का संक्रमण अब कुल मिलाकर 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में हो गया है। न्यू वैरिएंट के केरल में 57, गुजरात में 49, राजस्थान में 43, तेलंगाना में 41, तमिलनाडु में 34 और कर्नाटक में 31 मामले सामने आए हैं। इनके अलावा मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा, चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में भी नये वैरिएंट के मामले आए हैं।

बहरहाल, चुनाव पर आख़िरी फ़ैसला चुनाव आयोग समीक्षा के बाद ही लेगा। तब तक कुछ भी साफ़ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। लेकिन चुनाव आयोग की तैयारियों से कुछ संकेत तो मिलते ही हैं!

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