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लवासा की पत्नी ही नहीं, बहन और बेटे को भी आयकर विभाग का नोटिस

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी ही नहीं उनकी बहन और बेटे भी आयकर विभाग की जाँच के घेरे में हैं। पिछले कुछ दिनों में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम से लेकर डीके शिवकुमार पर जाँच एजेंसियों ने शिकंजा कसा है और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनके भतीजे और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के ख़िलाफ़ ईडी ने केस दर्ज किया है। 

अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने ख़बर दी थी कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी नोवेल सिंघल लवासा कर चोरी के आरोपों में आयकर विभाग के रडार पर हैं और उन्हें विभाग की ओर से 10 कंपनियों में निदेशक होने के संबंध में दिये आयकर रिटर्न को लेकर नोटिस जारी किया गया है। लेकिन अब जानकारी आई है कि लवासा की बहन शकुंतला लवासा को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। शकुंतला लवासा बच्चों की चिकित्सक हैं। 

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‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, आयकर विभाग ने नॉरिश ऑर्गेनिक फ़ूड लिमिटेड की एकाउंट बुक का सर्वेक्षण किया है। लवासा के बेटे अबीर लवासा इस कंपनी के निदेशक हैं और कंपनी के शेयर में उनकी हिस्सेदारी है। अबीर लवासा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, आयकर विभाग ने नॉरिश ऑर्गेनिक को नोटिस भेजा था और अगस्त के पहले सप्ताह में कंपनी के बुक ऑफ़ एकाउंट का सर्वे किया गया था। इसके बाद से विभाग की ओर से कुछ नहीं भेजा गया।’
लवासा ने लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को चिट्ठी लिख कर इस बात पर असंतोष जताया था कि आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों पर विचार करने वाली बैठकों में उनकी असहमतियों को दर्ज नहीं किया जाता है।

‘क्लीन चिट’ पर उठे थे सवाल

लवासा ने कहा था कि ‘अल्पसंख्यक विचार’ या ‘असहमति’ को दर्ज नहीं किए जाने की वजह से वह इन बैठकों से ख़ुद को दूर रखने पर मजबूर हैं। उस समय यह चिट्ठी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था क्योंकि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को लगातार ‘क्लीन चिट’ मिलने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को निशाने पर ले लिया था। 

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ दो शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। एक में कहा गया था कि मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि जो समुदाय पूरे देश में अल्पसंख्यक है लेकिन वायनाड में बहुसंख्यक है, राहुल गाँधी उस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी शिकायत में कहा गया था कि मोदी ने पहली बार वोट डालने वालों से कहा था कि उनका वोट बालाकोट में हमला करने वालों और पुलवामा में शहीद होने वालों के लिए समर्पित होगा या नहीं। लेकिन इन दोनों ही मामलों में मोदी को क्लीन चिट दी गई थी।

आयोग के इन फ़ैसलों की काफ़ी आलोचना हुई थी। यह बात भी चर्चा में रही थी कि मोदी और शाह को ‘क्लीन चिट’ चुनाव आयुक्तों की आम सहमति से नहीं दी गई थी और एक चुनाव आयुक्त की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए ऐसा किया गया था।
ख़बरों के मुताबिक़, लवासा ने इसके बाद ही चिट्ठी लिखी थी और सवाल उठाया था कि आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में उनकी असहमति को क्यों नहीं शामिल किया गया। लवासा चाहते थे कि मोदी को चिट्ठी लिख कर उनका जवाब माँगा जाए और उसके बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाए। पर उनकी सलाह को दरकिनार कर सीधे फ़ैसला ले लिया गया और मोदी को निर्दोष क़रार दिया गया।

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