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पहले चरण में ही ईवीएम में गड़बड़ी, क्या निष्पक्ष होंगे चुनाव?

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में हुए मतदान में कई जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी की शिकायत आई हैं। इसे लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। लगभग हर चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी की ख़बरें आती हैं। पहले चरण में ही बड़ी संख्या में ईवीएम में गड़बड़ी की ख़बरें आने के बाद सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव करा पाएगा, जिसका वह दावा करता रहा है। 

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कांग्रेस ने महाराष्ट्र में कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी से संबंधित शिकायत निर्वाचन आयोग के समक्ष दर्ज कराई है। इसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के निर्वाचन क्षेत्र नागपुर में भी कुछ बूथों पर गड़बड़ी की शिकायत शामिल है। 

यूपी के बिजनौर संसदीय क्षेत्र के मीरापुर में कुछ मतदाताओं ने हाथी का बटन दबाने पर कमल के निशान की पर्ची आने का आरोप लगाया। यहाँ से गठबंधन के प्रत्याशी मलूक नागर ने भी आरोप लगाया है कि कुछ जगहों पर हाथी का बटन दबाने पर बीजेपी के चुनाव निशान कमल को वोट जा रहा है। लोगों ने इसकी शिकायत वहाँ मौजूद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से की है।

बिहार में गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई में कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम के ख़राब होने की सूचना मिली।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी लगभग 150 मतदान केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी के कारण वहाँ दोबारा मतदान कराने की माँग की है। नायडू ने इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भी लिखा है। नायडू ने कहा कि हम लंबे समय से कह रहे हैं कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गुंजाइश है। यहाँ तक कि तकनीक में हमसे कहीं आगे देशों में भी चुनाव के लिए बैलट पेपर का उपयोग होता है। 
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि पुंछ विधानसभा में एक बूथ पर ईवीएम में कांग्रेस के सामने वाला बटन काम नहीं कर रहा है।

बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कई दलित बहुल इलाक़ों में मतदाताओं को वोट नहीं डालने दिया गया। सतीश मिश्रा ने राज्य के डीजीपी ओपी सिंह से इस मामले की शिकायत की। मिश्रा ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है और एक वीडियो क्लिप भी उन्हें भेजी है। मिश्रा के मुताबिक़, इस वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि हाथी का बटन दबाने पर बीजेपी के चुनाव निशान कमल के फूल को वोट जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि हमारे समर्थकों ने इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत भी कि लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

ईवीएम पर लंबे अरसे से सवाल उठते रहे हैं। कर्नाटक से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, और गुजरात तक और निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा चुनावों तक में ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि 2014 में हुए पिछले लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि ईवीएम में गड़बड़ी हुई है और इसका फ़ायदा बीजेपी को मिला था। 

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मायावती ने उठाए थे सवाल 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य कई दल ईवीएम की जगह बैलट पेपर से चुनाव कराने की माँग करते रहे हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता कायम रखने के लिए ही आयोग इस बार सभी सीटों पर वीवीपैट (वोटर वैरिफ़ाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट) का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन लोगों ने इसमें भी गड़बड़ी की शिकायत की है। 

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यह भी आरोप लगते रहे हैं कि ईवीएम को हैक करने वाले यानी इसके हैकर्स, चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार पार्टियों से सौदा कर लेते हैं। चुनाव परिणाम को लेकर बहुत ज़्यादा बवाल न हो इसलिए वह हारने वाली पार्टियों को सम्मानजनक सीटें भी दे देते हैं। इस तरह की बातें सच्ची हों या अफ़वाह, लेकिन लोकतंत्र के लिए यह बहुत बड़ा ख़तरा है और भारत सरकार और चुनाव आयोग को इस दिशा में हर वह क़दम उठाना चाहिए जो लोकतंत्र में नागरिकों के भरोसे को मजबूत करता हो। 
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