loader
परब (बाएं), नीरव मोदी (दाएं)

भगोड़े नीरव मोदी का खास परब काहिरा से आते ही गिरफ्तार

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर परब को मंगलवार सुबह काहिरा से भारत लाया गया। उसे सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। यह शख्स नीरव मोदी का दाहिना हाथ था और दुबई में मोदी की फर्म फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल लिमिटेड और डायमंड आर. यूएस में सीनियर डायरेक्टर था। परब ने नीरव मोदी के साथ मिलकर 13,578 करोड़ के पीएनबी घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह जनवरी 2018 में दुबई से काहिरा भाग गया। उस समय के आसपास मोदी और उसका चाचा मेहुल चोकसी भी अपने परिवारों के साथ भारत से भाग गए थे।
ताजा ख़बरें
सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नीरव मोदी को सीधे रिपोर्ट करने वाले परब (49) को मुंबई लाया गया और यहां आने पर गिरफ्तार कर लिया गया। उसे मुंबई की अदालत में पेश किया जाएगा।पीएनबी धोखाधड़ी में जांच से पता चला है कि परब ने व्यक्तिगत रूप से पीएनबी अधिकारी गोकुलनाथ शेट्टी की मिलीभगत से जारी किए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के संग्रह की निगरानी की थी। एक अधिकारी के मुताबिक, परब कंपनी में अपने जूनियर्स को बैंक के मूल दस्तावेज प्राप्त करने और उन्हें डायमंड आर यूएस ऑफिस लाने के लिए मुंबई में ब्रैडी हाउस में पीएनबी शाखा का दौरा करने का निर्देश देता था। 
जब जनवरी 2018 में घोटाला सामने आया, तो नीरव मोदी के भाई नेहल ने परब और कंपनी के अन्य वरिष्ठ निदेशकों को भारत छोड़ने के लिए कहा क्योंकि उनसे भारतीय जांच एजेंसियां पूछताछ कर सकती हैं। नेहल की यात्रा की व्यवस्था करने के बाद वह मिस्र में काहिरा के लिए रवाना हो गया, और तब से एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण के लिए कोशिश कर रही थीं।
उसके खिलाफ 2018 में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी। नीरव मोदी वर्तमान में 19 मार्च, 2019 से लंदन के बाहरी इलाके में वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसे ब्रिटेन में भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। उसका चाचा मेहुल चौकसी भी किसी कैरिबयन द्वीप में छिपा हुआ है। दरअसल, नीरव मोदी को सत्ता के करीब मेहुल चौकसी ने ही पहुंचाया था। मेहुल चौकसी दिल्ली में भारत सरकार के कई कार्यक्रमों में शामिल होता था। कई मंत्रालयों की बैठक में भी उसे देखा गया था।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें