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जीसी मूर्मू के इस्तीफ़े के बाद मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल नियुक्त

गिरीश चंद्र ने जम्मू-कश्मीर के लेफ़्टिनेंट गवर्नर पद से इस्तीफ़ा दे दिया और बुधवार देर रात को ही राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफ़ा भी स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर का नया लेफ़्टिनेंट गवर्नर नियुक्त कर दिया गया है। ऐसी ख़बरें हैं कि जीसी मूर्मू ने यह इस्तीफ़ा इसलिए दिया है कि उन्हें सीएजी यानी कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल बनाया जा सकता है। 

सीएजी का पद इसी हफ़्ते खाली होने वाला है। फ़िलहाल सीएजी पद पर काबिज राजीव महर्षि 65 साल के होने वाले हैं। चूँकि सीएजी का पद संवैधानिक है इसलिए इसे खाली नहीं रखा जा सकता है। अब जीसी मूर्मू के इसी पद पर काबिज होने की संभावना है। 

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मूर्मू 1985 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी हैं और उन्होंने गुजरात में तब काम किया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मूर्मू भी केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आ गए थे। पिछले साल 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद मुर्मु इस केंद्रशासित प्रदेश के पहले लेफ़्टिनेंट गवर्नर बने थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की जगह ली थी।

मूर्मू के इस्तीफ़े को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया, 'राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल के रूप में श्री गिरीश चंद्र मुर्मू के इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति ने मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया है।'

बता दें कि पिछले साल पाँच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 में बदलाव किया गया था और इसके साथ ही राज्य को दो भागों में बाँट दिया गया था। इन दोनों भागों को केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया। एक जम्मू कश्मीर और दूसरा लद्दाख। जीसी मूर्मू इसी जम्मू कश्मीर के पहले लेफ़्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किए गए थे। 
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जम्मू कश्मीर में लेफ़्टिनेंट गवर्नर के पद पर बीजेपी के कद्दावर नेता मनोज सिन्हा को नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सांसद रह चुके हैं। केंद्र में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उनके पास रेलवे के राज्यमंत्री और संचार राज्यमंत्री का कार्यभार था। 2017 में वह यूपी के मुख्यमंत्री पद की रेस में भी आगे थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली।

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