राहुल गांधी के ‘झूठा कौन?’ सवाल के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की प्रतिक्रिया आई है। तो क्या विवाद शांत होगा? उनकी किताब में लिखी बातों की सच्चाई क्या है और इससे सरकार व विपक्ष की सियासत क्यों गरमा गई?
जनरल नरवणे और राहुल गांधी
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर विवाद के बीच पहली बार चुप्पी तोड़ी है। मंगलवार को उन्होंने एक्स पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बयान को शेयर किया और लिखा, 'यह किताब की स्थिति है।' उनका यह बयान तब आया जब राहुल ने कहा कि आख़िर झूठ कौन बोल रहा है- जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन? हालाँकि राहुल ने जनरल नरवणे पर भरोसा जताया है। जनरल नरवणे ने मंगलवार शाम को पेंगुइन की जिस पोस्ट को साझा करते हुए बयान दिया है उसमें पब्लिशर ने सोमवार को अपने पहले आधिकारिक बयान में कहा था कि किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
यह विवाद पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान इस किताब का ज़िक्र किया। उन्होंने किताब के कुछ हिस्सों का हवाला देकर दावा किया कि 2020 में लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के दौरान राजनीतिक नेतृत्व ने साफ़ निर्देश नहीं दिए थे।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को पहला आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि वे किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के एकमात्र प्रकाशन अधिकार रखते हैं। किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई कॉपी प्रकाशित, वितरित, बेची या सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रकाशक ने चेतावनी दी कि कोई भी अनधिकृत कॉपी पूरी या आंशिक कॉपीराइट उल्लंघन है और वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
मंगलवार को विवाद बढ़ने पर पेंगुइन ने दूसरा बयान जारी किया। इसमें साफ़ किया कि किताब की घोषणा, प्री-ऑर्डर उपलब्ध होना और प्रकाशन होना अलग-अलग चीजें हैं। इसने कहा कि किताब तब प्रकाशित मानी जाती है जब वह औपचारिक रूप से रिलीज हो और सभी रिटेल प्लेटफॉर्म पर खरीदने के लिए उपलब्ध हो। अभी 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' उस स्टेज पर नहीं पहुंची है। प्रकाशक ने कहा कि वे पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह स्पष्टीकरण दे रहे हैं। इस बीच, जनरल नरवणे ने पेंगुइन के बयान को शेयर कर पेंगुइन की बात का समर्थन किया।
राहुल गांधी का दावा
मंगलवार दोपहर संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "जनरल नरवणे ने 2023 में एक्स पर पोस्ट किया था: "हैलो फ्रेंड्स। मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद!"
राहुल ने कहा, 'यह पोस्ट जनरल नरवणे की है। आप देख सकते हैं। तो या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं... लेकिन मैं पूर्व सेना प्रमुख पर भरोसा करता हूं। मुझे नहीं लगता वे झूठ बोलेंगे... या फिर पेंगुइन झूठ बोल रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'किताब अमेजन पर उपलब्ध है। जनरल नरवणे ने कहा है किताब खरीदें। किताब में कुछ बातें सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं।' राहुल ने पूछा,
आप पेंगुइन पर भरोसा करेंगे या जनरल नरावणे पर? मैं जनरल नरावणे पर भरोसा करता हूं।' यह इमेज देखिए... 'नरेंद्र सरेंडर्ड?'... यही हुआ है। राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष का नेता
क्या है पूरा मामला?
जनरल एम एम नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जो सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक मानी जा रही हैं। किताब में गलवान घाटी विवाद और चीन के साथ तनाव के दौरान फ़ैसले लेने की प्रक्रिया का ज़िक्र है।
सरकार का कहना है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए संसद में इसके उद्धरण नहीं पढ़े जा सकते। इसके साथ ही राहुल को संसद में बोलने नहीं दिया गया। स्पीकर की ओर से कहा गया कि बिना प्रकाशित किताब का हवाला नहीं दिया जा सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर कई बड़े मंत्रियों तक ने दावे किए कि वह किताब पब्लिश ही नहीं हुई है और इस वजह से राहुल का दावा सही नहीं है। लेकिन राहुल गांधी ने अगले ही दिन संसद परिसर में किताब की एक प्रति दिखाई और कहा कि वे इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिफ्ट करना चाहते थे।राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि अब इस वजह से प्रधानमंत्री लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने नहीं आएँगे। हुआ भी ऐसा ही। इस बीच लोकसभा में हंगामा हुआ। कई सांसदों को निलंबित किया गया और सदन की कार्यवाही बाधित हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब को मंजूरी नहीं मिली है और कोई क्लीयरेंस नहीं है।
विवाद क्यों बढ़ा?
राहुल गांधी ने कहा कि किताब में सरकार के लिए परेशान करने वाली बातें हैं, इसलिए सरकार इसे रोक रही है। दिल्ली पुलिस ने किताब के लीक होने पर FIR दर्ज की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार किताब छिपा रही है क्योंकि इसमें गलवान जैसे मुद्दों पर सच्चाई है। सरकार का कहना है कि अनपब्लिश्ड किताब से संसद में उद्धरण नहीं पढ़े जा सकते। यह विवाद राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है।