Umar Khalid Fear: फ्री उमर खालिद' के नारों सहित गोवा पुलिस ने मापुसा में प्रदर्शनकारियों से 240-सवालों का फॉर्म भरवाया और फंडिंग पर पूछताछ की।
गोवा में एक हालिया विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा पुलिस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों के समर्थन में मापुसा (Mapusa) में प्रदर्शन करने वाले लोगों से पूछताछ की है और उनसे लगभग 240 प्रश्नों वाली एक लंबी चौड़ी प्रश्नावली (Questionnaire) भरवाई है।
गोवा पुलिस ने क्या-क्या पूछा?
पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को दिए गए इस 240-सूत्रीय फॉर्म में कई कड़े और व्यक्तिगत सवाल शामिल थे, जैसे:
उमर खालिद से जुड़े सवाल:
- क्या आप प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उमर खालिद की पृष्ठभूमि (Background) के बारे में जानते थे?
- फ्री उमर खालिद' (Free Umar Khalid) शब्द से आपकी क्या समझ है?
- क्या आपने 'फ्री उमर खालिद' के नारे लगाए? यदि हाँ, तो कितनी बार?
- क्या आपके नारा लगाने के बाद अन्य लोगों ने भी इसे दोहराया?
- क्या आपने पोस्टर/प्लेकार्ड के साथ अपनी कोई तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की?
प्रदर्शन और फंडिंग से जुड़े सवाल
- इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कौन कर रहा था?
- प्रदर्शन का वित्तपोषण (Financing) किसने किया? बैनर, पोस्टर, प्लेकार्ड और साउंड सिस्टम का इंतजाम किसने किया?
- कार्यक्रम स्थल पर कितने प्लेकार्ड बांटे गए थे?
- विरोध प्रदर्शन के ज़रिए आपका क्या हासिल करने का इरादा था?
संगठन और डिजिटल डेटा से जुड़े सवाल
- क्या आपने अपने संबोधन के दौरान किसी सरकारी प्राधिकरण/अधिकारी की आलोचना की?
- क्या आप इस विरोध प्रदर्शन से जुड़े किसी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या सिग्नल ग्रुप के सदस्य हैं?
- क्या आप किसी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, छात्र संगठन, एनजीओ या कार्यकर्ता समूह से जुड़े हैं?
- क्या आपने प्रदर्शन से जुड़ा कोई डिजिटल डेटा/चैट डिलीट किया है? क्या आप जाँच के लिए अपना फोन पुलिस को सौंप सकते हैं?
इसके अलावा, पुलिस ने यह भी पूछा कि प्रदर्शनकारी कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुँचे और क्या उन्होंने पहले भी गोवा या देश में कहीं और ऐसे किसी प्रदर्शन में भाग लिया है।
24 जुलाई को गोवा के मापुसा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में एक सभा आयोजित की गई थी। इसके अगले दिन (शुक्रवार), पणजी के आजाद मैदान में एक प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को 'फ्री उमर खालिद' का प्लेकार्ड ले जाने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
इसके बाद, 'सिटीज़न्स ऑफ मापुसा' (Citizens of Mapusa) नामक एक स्थानीय समूह द्वारा दी गई शिकायत/आवेदन के आधार पर गोवा पुलिस ने कम से कम दो प्रदर्शनकारियों को तलब किया (एक को रविवार और दूसरे को सोमवार) और उनसे घंटों पूछताछ की।
पुलिस प्रशासन और मुख्यमंत्री का रुख
उत्तरी गोवा के एसपी हरिश्चंद्र मडकईकर (Harishchandra Madkaikar) ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा:"सिटीज़न्स ऑफ मापुसा नामक समूह द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। उसी के आधार पर हमने प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था और पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें जाने दिया गया।"
- 240 सवालों पर एसपी ने कहा कि पूछताछ के दौरान जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलते, तब तक सवाल पूछे जाते हैं और वही दर्ज किया गया है।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा: "छात्रों को नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने का अधिकार था, लेकिन वे बहुत नीचे गिर गए। आजाद मैदान में प्रदर्शन के दौरान उमर खालिद की रिहाई के पोस्टर दिखाए गए, जिसके तार संसद हमले के दोषी अफजल गुरु से जुड़े हैं। नीट पेपर लीक के प्रदर्शन में उमर खालिद का मुद्दा क्यों लाया गया?"
इससे पहले रविवार को भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि राज्य में "राष्ट्रविरोधी भावनाएँ फैलाने और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों" के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
कौन हैं उमर खालिद, इतना डर क्यों
जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की तथाकथित साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपी हैं और वर्तमान में जेल में बंद हैं। उमर जेल में साढ़े पांच साल से हैं लेकिन अभी तक सरकार उनके खिलाफ मुकदमा शुरू नहीं कर पाई है। अदालत ने अब तक उनकी सभी ज़मानत अर्जियों को नामंजूर किया है। हर बार अलग-अलग वजहों से अगली तारीख दे दी गई। उमर खालिद के अलावा शरजील इमाम और अनगिनत आरोपी इसी तरह जेलों में हैं लेकिन उनके भी मुकदमे अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। भारत के कई पूर्व जज और कानूनी जानकार उमर खालिद, शरजील इमाम के साथ हो रहे इस तरह की नाइंसाफी पर विरोध जता चुके हैं। न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी तक भारत सरकार को इस संबंध में पत्र लिखकर विरोध जता चुके हैं।