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वॉट्सऐप को सरकार की चिट्ठी, कहा, नए नियम रोको

वॉट्सऐप का इस्तेमाल करने वालों की सूचना की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार ने कंपनी से कहा है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए नए नियम न लागू करे। 

अब तक वॉट्सऐप की सेवा इनक्रिप्टेड थी, यानी उसे कोई देख-पढ़ नहीं सकता था। लेकिन उसकी नई पॉलिसी के बाद यह प्राइवेसी ख़त्म हो जाएगी और कंपनी के पास उसे इस्तेमाल का अधिकार होगा। पुरानी पॉलिसी में जहाँ यह कहा गया था कि वॉट्सऐप बेहद मज़बूत प्राइवेसी पॉलिसी में यक़ीन रखता है, लेकिन नई पॉलिसी में इसका कहीं कोई ज़िक्र नहीं है। यानी आपकी प्राइवेसी ख़तरे में है और आपके डेटा को कंपनी किसी को भी और कभी भी बेच सकती है।

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आईपी एड्रेस तक सुरक्षित नहीं

आपके मैसेज डिलीट करने के बावजूद अब वाट्सऐप को आपके मैसेज पढ़ने की स्वतंत्रता होगी। इतना ही नहीं, वह आपके आईपी ऐड्रेस को भी फ़ेसबुक को दे देगा ताकि वह आपके प्रीफरेंसेंज को जानकर उससे संबंधित विज्ञापन आपको भेजे।

इस पर बवाल मचने के बाद कंपनी ने इसे मई तक के लिए टाल दिया है। वॉट्सऐप की मूल कंपनी फ़ेसबुक है।

केंद्र सरकार ने वॉट्सऐप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विल कैचकार्ट को लिखी एक चिट्ठी में कहा है कि अपने मैसेजिंग ऐप के निजता नियमों में बदलाव पर रोक लगाए। सरकार ने चिट्ठी में विस्तार से अपनी आपत्तियों के बारे में बताया है। 

सरकार ने कहा है कि व्यावसायिक एकाउंट्स के चैट को फ़ेसबुक से साझा करेंगे तो यह सूचनाओं का बड़ा भंडार बन जाएगा और इससे उपभेक्ताओं की जानकारियाँ दूसरों को मिलने लगेंगी। 

सरकार ने इस पर भी आपत्ति जताई है कि वॉट्सऐप ने उपभोक्ताओं को कोई विकल्प नहीं दिया है, वे या तो इसे नए रूप में स्वीकार कर लें या इससे बाहर हो जाएं।

वॉट्सऐप ने फ़ैसला टाला

वॉट्सऐप के प्रतिद्वंद्वी टेलीग्राम औप सिग्नल के ऐप भारत में बहुत कम समय में बहुत ज़्यादा डाउनलोड किए जाने के बाद कंपनी ने अपनी नई नीति पर फिलहाल रोक लगाने का एलान किया है। 

वॉट्सऐप का यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब संसद में व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा अधिनियम पड़ा हुआ। सरकार ने यह सवाल भी उठाया है कि जब इस तरह का बिल भारतीय संसद में विचार के लिए हो तो वॉट्सऐप ने डेटा से जुड़ा यह निर्णय क्यों लिया। 

सरकार ने इस कंपनी से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े 14 सवाल पूछे हैं। इसमें यह भी पूछा गया है कि वॉट्सऐप किस तरह के डेटा संग्रह कर लेता है और उसका वह किस तरह इस्तेमाल करता है।

यह सवाल भी किया गया है कि क्या वह इस तरह की सूचना इकट्ठा करने के पहले उपभोक्ता की अनुमति लेता है। 

‘फेसबुक’ चाहती है कि ‘वाट्सऐप’ की समस्त जानकारी का वह इस्तेमाल कर ले ताकि उससे वह करोड़ों रुपये कमा सके और दुनिया के बड़े-बड़े लोगों की गुप्त जानकारियों का खजाना भी बना सकती है। 

वाट्सऐप इस नई व्यवस्था को 8 फरवरी से शुरू करने वाला था लेकिन लोगों के विरोध और क्रोध को देखते हुए उसने अब इसे 15 मई तक आगे खिसका दिया है। ‘फेसबुक’ को वाट्सऐप की मिल्कियत 19 अरब डॉलर में मिली है। वह इसे कई गुना करने पर आमादा है। 

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