E20 के ख़िलाफ़ ज़बर्दस्त विरोध झेलने वाली मोदी सरकार ने संसद में इस सवाल का जवाब दिया है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20% से बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालाँकि इसने यह भी कहा है कि इसको कम करने की योजना भी नहीं है।
20 प्रतिशत इथेनॉल पर देशभर में भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राज्यसभा में साफ साफ़ कह दिया है कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने या कम करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि भविष्य में यदि इथेनॉल मिश्रण 20 प्रतिशत से अधिक करने पर विचार किया गया तो उससे पहले पूरा वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा और सभी जुड़े पक्षों से चर्चा की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार ने अभी तक पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा, 'यदि भविष्य में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई फैसला लिया जाता है तो उससे पहले वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और शोध संस्थानों सहित सभी जुड़े लोगों से व्यापक चर्चा होगी।'
शुद्ध पेट्रोल भी नहीं मिलेगा
संसद में सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या पेट्रोल पंपों पर लोगों को शुद्ध पेट्रोल यानी प्योर पेट्रोल या E10 जैसे कम इथेनॉल वाले विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर सरकार ने साफ कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
सरकार का कहना है कि पूरे देश में अलग-अलग प्रकार के पेट्रोल की समानांतर सप्लाई व्यवस्था बनाने से लागत और लॉजिस्टिक खर्च काफी बढ़ जाएगा। इससे इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों को होने वाले लाभ भी प्रभावित होंगे।
E20 को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
देशभर में कई वाहन मालिकों ने ई20 पेट्रोल को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से माइलेज कम हो रहा है, इंजन के कुछ हिस्सों पर ज्यादा असर पड़ रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। वाहन मालिकों को पुराने वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ने की आशंका है। ठंड के मौसम में वाहन स्टार्ट होने में परेशानी और कुछ मामलों में वाहन के परफॉर्मेंस में गिरावट आने की शिकायतें भी हैं। इन्हीं शिकायतों के बीच सरकार से यह सवाल पूछा गया था कि क्या ई20 नीति पर दोबारा विचार किया जाएगा।
सरकार ने माना- माइलेज में कमी आ सकती है
राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने माना कि जिन पुराने वाहनों के इंजन ई10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए हैं, उनमें ई20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालाँकि उन्होंने कहा कि माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। उन्होंने बताया कि वाहन की सर्विसिंग, टायर का प्रेशर, ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी माइलेज को प्रभावित करते हैं।
ई20 को लेकर लगातार हो रही आलोचनाओं के बीच सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल के कई फायदे हैं। मंत्री ने कहा कि E20 में- ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है, इंजन में नॉकिंग यानी झटके कम लगते हैं, ईंधन बेहतर तरीके से जलता है, इंजन ज्यादा स्मूद चलता है, पिकअप और एक्सीलरेशन बेहतर होता है, प्रदूषण भी कम होता है। सरकार के मुताबिक इन फायदों के कारण माइलेज में होने वाली मामूली कमी की भरपाई हो जाती है। इंजन खराब होने के दावे पर क्या बोला?
सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया कि ई20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब हो रहे हैं। सुरेश गोपी ने बताया कि देशभर में 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें ई20 या उसके आसपास के इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर चुकी हैं। पिछले कई वर्षों के परीक्षण, वाहन कंपनियों की जांच और व्यावहारिक अनुभव में कहीं भी बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है।
2001 से चल रहा है इथेनॉल कार्यक्रम
सरकार ने कहा कि ई20 कोई अचानक लागू की गई योजना नहीं है। भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ईबीपी कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे इथेनॉल मिश्रण बढ़ाया गया।सरकार के अनुसार वर्ष 2013-14 में औसत इथेनॉल मिश्रण केवल 1.53 प्रतिशत था। 2021-22 में यह बढ़कर 10 प्रतिशत हुआ। 2025-26 में भारत ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से लगभग पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को कई बड़े फायदे हुए हैं। सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। इसने कहा है कि 3.16 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई। और 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ। सरकार ने यह भी दावा किया कि किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय मिली।
अधिकतर गाड़ियों की क्षमता E10 की
देश में E20 ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच नीति आयोग की एथेनॉल रिपोर्ट 2021 में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के संगठन SIAM ने E20 पेट्रोल को लागू किए जाने के फ़ैसले पर सवाल खड़े कर दिए थे। नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट से पता चलता है कि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM ने सरकार को सलाह दी थी कि ई20 लागू करने के साथ-साथ ई10 पेट्रोल की बिक्री भी जारी रखी जाए।
SIAM का कहना था कि यदि ई10 को पूरी तरह बंद कर दिया गया, तो पुराने वाहनों के लिए ईंधन की कंपेटिबिलिटी, सुरक्षा, माइलेज और ड्राइविंग परफॉर्मेंस से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
रिपोर्ट में दर्ज सुझावों में SIAM ने कहा था कि E20 लागू होने के बाद भी E10 पेट्रोल को 'प्रोटेक्शन ग्रेड' ईंधन के रूप में उपलब्ध रखा जाना चाहिए। संस्था का तर्क था कि इससे पहले से सड़क पर चल रहे करोड़ों वाहन उसी ईंधन का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिसके लिए उन्हें डिजाइन किया गया था। SIAM ने रिपोर्ट में कहा था कि भारत में पहले से मौजूद वाहनों को E20 के अनुरूप बनाने के लिए उनमें बदलाव करना बेहद कठिन होगा।
सरकार का रुख
राज्यसभा में दिए गए जवाब से सरकार ने साफ़ कर दिया है कि फ़िलहाल E20 नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। न तो इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का फैसला हुआ है और न ही इसे घटाने या शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने की कोई योजना है।