इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब 3 घंटे के भीतर उन कंटेंट को हटाना होगा जिसको हटाने का आदेश सरकार या अदालत देगी।
सरकार फेसबुक-एक्स जैसे सोशल मीडिया से कंटेंट हटाने की समय-सीमा को घटाकर 3 घंटे करने का प्रस्ताव ला रही है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसके तहत फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या अदालत के आदेश मिलने के सिर्फ 3 घंटे के भीतर डीपफेक या अन्य अवैध एआई-जेनरेटेड कंटेंट को हटाना होगा। अभी तक ऐसे आदेशों का पालन करने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे का समय मिलता है। तो क्या अब यह पड़ताल के लिए समय भी नहीं दिया जाएगा कि कंटेंट सही है या नहीं?
सरकार का यह फ़ैसला तब आया है जब लगातार इस पर आरोप लगता रहा है कि सरकार की आलोचना वाले बिल्कुल दुरुस्त कंटेंट को भी रोका या हटाया जा रहा है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को ही बड़ा आरोप लगाया है कि उनके इंस्टाग्राम एकाउंट को भारत में रोक दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कारण नहीं बताया गया है कि आख़िर उनके किस कंटेंट में क्या गड़बड़ी है या किन आपत्तियों की वजह से ऐसा किया गया है।
बहरहाल, नये संशोधन वाले प्रस्ताव को लेकर सरकार का कहना है कि एआई की मदद से तैयार हो रहे फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों का तेजी से फैलना से लोकतंत्र, क़ानून-व्यवस्था और लोगों की निजता के लिए गंभीर चुनौती है। इसलिए नियमों को और सख्त बनाने की ज़रूरत है।
सरकार का दावा क्या?
MeitY के प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य डीपफेक, फर्जी ऑडियो-वीडियो, एआई से तैयार किए गए भ्रामक संदेश और अन्य सिंथेटिक कंटेंट के प्रसार को रोकना बताया गया है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे कंटेंट की पहचान करें, उसे तेजी से हटाएं और दोबारा फैलने से रोकने के लिए तकनीकी उपाय अपनाएं। मंत्रालय का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य इंटरनेट को खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह बनाना है।प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी एआई-जेनरेटेड कंटेंट को हटाने का आदेश सरकार या किसी अदालत की ओर से जारी किया जाता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना होगा। मौजूदा आईटी नियमों में यह समय सीमा 36 घंटे है।
सरकार का मानना है कि डीपफेक और फर्जी वीडियो कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक उन्हें ऑनलाइन रहने देना नुकसानदायक हो सकता है।
AI से बने कंटेंट पर लेबल लगाना होगा!
सरकार ने एक और बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एआई की मदद से बनाई गई तस्वीरों, वीडियो, ऑडियो और अन्य सिंथेटिक कंटेंट पर साफ़ तौर पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ऐसे कंटेंट में ट्रेसेबल मेटाडेटा भी जोड़ना होगा, ताकि यूज़र आसानी से पहचान सकें कि कंटेंट इंसान ने बनाया है या एआई की मदद से तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे लोगों को भ्रमित होने से बचाया जा सकेगा।किन कंटेंट पर सबसे ज्यादा निगरानी?
प्रस्तावित नियमों में विशेष रूप से डीपफेक वीडियो और ऑडियो, एआई के जरिए किसी की पहचान का दुरुपयोग, बिना सहमति के बनाई गई निजी या अश्लील तस्वीरें और वीडियो, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को प्राथमिकता दी गई है।
सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल शिकायत मिलने का इंतजार न करें, बल्कि तकनीकी साधनों और ऑटोमेटेड टूल्स की मदद से ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे फैलने से भी रोकें। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई कंटेंट बिल्कुल दुरुस्त हो और हटाने की शिकायत कर दी जाए तो क्या उसकी पड़ताल का कोई मौक़ा नहीं होगा? ऐसे में अभिव्यक्ति की आज़ादी का क्या होगा?
कितने समय में कैसे कंटेंट हटाने होंगे
सरकार ने यूज़रों की शिकायतों के निपटारे की समय सीमा भी कम करने का प्रस्ताव दिया है। सामान्य शिकायतों का निपटारा 72 घंटे की बजाय 36 घंटे में करना होगा। नग्नता, डीपफेक, पहचान की चोरी या किसी की फर्जी प्रोफाइल जैसे संवेदनशील मामलों में कार्रवाई 24 घंटे की बजाय सिर्फ 2 घंटे के भीतर करनी होगी। इसका उद्देश्य पीड़ितों को जल्द राहत देना बताया गया है।प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को अपने यूज़रों को यह भी बताना होगा कि अवैध एआई-जेनरेटेड सामग्री साझा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे तकनीकी उपाय भी लागू करने होंगे, जिनसे गैरकानूनी कंटेंट की पहचान पहले ही की जा सके और उसके वायरल होने की संभावना कम हो।
अभी सिर्फ मसौदा, जनता से मांगी गई राय
सरकार ने साफ़ किया है कि फिलहाल ये संशोधन ड्राफ्ट के रूप में जारी किए गए हैं। इन्हें सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा गया है। सोशल मीडिया कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों और आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। सभी प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम नियम अधिसूचित करेगी। इसका मतलब है कि अंतिम नियम लागू होने से पहले इनमें बदलाव भी संभव हैं।पिछले कुछ वर्षों में एआई तकनीक के तेजी से विकास के साथ डीपफेक वीडियो, फर्जी भाषण, नकली तस्वीरें और गलत जानकारी फैलाने वाले कंटेंट में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि मौजूदा नियम इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने और लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी प्रचार और पहचान की चोरी से बचाने के लिए आईटी नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी की जा रही है।
यदि ये प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू हो जाते हैं तो भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अवैध एआई कंटेंट के खिलाफ पहले से कहीं अधिक तेजी और सख्ती से कार्रवाई करनी होगी।