कच्चे तेल के दाम कम होकर ईरान युद्ध के पूर्व स्तर तक आने पर डीजल-पेट्रोल-गैस के दाम करने का दबाव झेल रही सरकार ने कमर्शियल एलपीजी पर से प्रतिबंध हटाकर सप्लाई समान्य की है। क़ीमतें कम करने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम कम होकर ईरान युद्ध के पूर्व स्तर तक आने पर डीजल-पेट्रोल-गैस के दाम करने का दबाव झेल रही केंद्र सरकार ने होटल, रेस्तरां, छोटे कारोबार और उद्योगों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी की आपूर्ति पर लगाई गई सभी क्षेत्रीय पाबंदियां हटा दी हैं। अब कमर्शियल उपभोक्ताओं को मध्य पूर्व संकट से पहले की तरह सामान्य गैस सप्लाई मिल सकेगी।
कच्चे तेल के दाम की स्थिति
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब होर्मुज से आवाजाही बहाल हो गई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ईरान युद्ध से पहले के स्तर के करीब लौट आई हैं। इंटरनेशनल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स गिरकर 73.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट 72 डॉलर प्रति बैरल था। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ईरान युद्ध के दौरान 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। मई में इसकी औसत कीमत क़रीब 106 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल में 114 डॉलर प्रति बैरल थी। ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज में आवाजाही रुकने के बाद भारत में डीजल-पेट्रोल और गैस की क़ीमतें बढ़ाई गई थीं और कमर्शियल एलपीजी गैस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे।अब जब क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल के दाम युद्ध से पहले के स्तर के क़रीब आ गये हैं तो सरकार पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत देने का दबाव भी बढ़ रहा है। हालांकि सरकार ने फिलहाल केवल आपूर्ति सामान्य करने का फैसला किया है, गैस की कीमतों में कटौती को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।
क्यों लगाई गई थीं पाबंदियां?
कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई थी। एलपीजी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता पैदा होने पर केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। सरकार ने तब निर्देश दिया था कि C3 और C4 हाइड्रोकार्बन का इस्तेमाल केवल एलपीजी उत्पादन के लिए किया जाए। इन कच्चे पदार्थों का उपयोग पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में अस्थायी रूप से सीमित कर दिया गया था ताकि घरेलू रसोई गैस की कमी न हो। इस कदम से देशभर में घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।
अब क्या बदला है?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि देश में घरेलू उत्पादन और आयातित एलपीजी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हो गई है। समीक्षा के बाद सरकार ने तय किया है कि अब कमर्शियल एलपीजी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध समाप्त किए जाएं। इसके बाद होटलों और रेस्तरां को पहले की तरह पूरी गैस सप्लाई मिलेगी।
सरकार के ताज़ा फ़ैसले से छोटे व्यवसायों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी सामान्य आपूर्ति बहाल होगी। उद्योगों को राहत देते हुए बल्क एलपीजी की आपूर्ति भी फिर शुरू कर दी गई है।
अब औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मध्य पूर्व संकट से पहले के उपयोग का 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से उन उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो पिछले कुछ महीनों से गैस की सीमित उपलब्धता के कारण उत्पादन प्रभावित होने की शिकायत कर रहे थे।
PNG को बढ़ावा जारी रहेगा
हालाँकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति सामान्य कर दी गई है, लेकिन सरकार ने यह भी साफ़ किया है कि पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देने की नीति जारी रहेगी। जिन उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने पहले ही पीएनजी अपना लिया है, वे उसी का उपयोग करते रहेंगे। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है या जल्द उपलब्ध होने वाला है, वहां धीरे-धीरे एलपीजी की जगह पीएनजी को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा की बचत होगी और एलपीजी उन उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध रहेगी जिन्हें इसकी अधिक आवश्यकता है।तेल कंपनियों को दिए नए निर्देश
केंद्र सरकार ने सभी तेल विपणन कंपनियों को कमर्शियल और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं का विस्तृत रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी कंपनियों का एक साझा डेटाबेस तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में गैस की मांग, आपूर्ति और वितरण की बेहतर योजना बनाई जा सके। इसके साथ ही पेट्रोलियम सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
क़ीमतों पर अभी कोई राहत नहीं
हालाँकि, कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति सामान्य कर दी गई है, लेकिन सरकार ने गैस की क़ीमतों में किसी तरह की कमी की घोषणा नहीं की है। सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में आई गिरावट के बाद पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कम करने की मांग तेज हो रही है। फिलहाल सरकार ने केवल आपूर्ति बहाल करने का फ़ैसला लिया है और कीमतों पर कोई संकेत नहीं दिया है।बहरहाल, होटल, रेस्तरां, कैटरिंग व्यवसाय, छोटे उद्योग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान लंबे समय से कमर्शियल एलपीजी की सीमित उपलब्धता से प्रभावित थे। अब प्रतिबंध हटने के बाद इन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे उत्पादन, सेवाओं और कारोबार पर पड़े दबाव में कमी आ सकती है।
सरकार का कहना है कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता उसकी पहली प्राथमिकता बनी रहेगी। लेकिन अब जब देश में एलपीजी की आपूर्ति बेहतर हो गई है, तो उद्योगों और व्यवसायों की ज़रूरतों को भी ध्यान में रखते हुए कमर्शियल गैस की आपूर्ति सामान्य कर दी गई है। साथ ही सरकार ने यह भी दोहराया कि वह ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ईंधन के उपयोग और पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ेगी।