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एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश एक बार फिर चुने गए राज्यसभा के उप सभापति 

एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश एक बार फिर राज्यसभा के उप सभापति चुने गए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने सोमवार को हरिवंश को उप सभापति चुने जाने का प्रस्ताव राज्यसभा में रखा। इसे लेकर वोट करवाया गया। वोटिंग के बाद राज्यसभा के सभापति एम. वैंकेया नायडू ने इस बात की घोषणा की कि हरिवंश को उप सभापति चुन लिया गया है। हरिवंश ने आरजेडी के सांसद मनोज झा को हराया। 

हरिवंश के फिर से उप सभापति चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, एसपी के सांसद राम गोपाल यादव सहित सदन के कई सदस्यों ने उन्हें बधाई दी। 

जनता दल यूनाइटेड से आने वाले हरिवंश इससे पहले अगस्त, 2018 में उप सभापति चुने गए थे। लेकिन उनका राज्यसभा सांसद का कार्यकाल समाप्त हो गया था। पिछली बार के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के बी. के. हरिप्रसाद को हराया था। हरिवंश का गांव सिताब दियारा है, यह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के गांव के पड़ोस में पड़ता है। बीजेपी ने उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया था। 

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बीजेपी ने साधे राजनीतिक समीकरण

नवम्बर में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में अपने सहयोगी दल जेडीयू के हरिवंश को उम्मीदवार बनाना बीजेपी के लिए बेहतर राजनीतिक डील मानी जा रही थी। बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रही है, हालांकि 2015 में बीजेपी ने नीतीश कुमार के महागठबंधन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में नीतीश का महागठबंधन से रिश्ता टूटने पर बीजेपी-जेडीयू फिर से साथ आ गए थे। 

पत्रकार से उप सभापति तक का सफर

पेशे से पत्रकार रहे हरिवंश पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के रास्ते पर चलने वाले लोगों में से हैं। नवम्बर 1990 से जून 1991 तक चन्द्रशेखर के प्रधानमंत्री रहने तक वे उनकी सरकार में अतिरिक्त मीडिया सलाहकार रहे थे। चन्द्रशेखर की सरकार गिरने के बाद वे फिर से पत्रकारिता में चले गए। 

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हरिवंश का परिवार तो खेती करता था, लेकिन गंगा ने रास्ता बदला तो खेत छिन गया। उन्होंने पढ़ाई का रास्ता पकड़ा और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। फिर टाइम्स ऑफ़ इंडिया से शुरुआत करके धर्मयुग में काम किया। कुछ दिनों के लिए बैंक ऑफ़ इंडिया में अफ़सर भी बन गए, लेकिन मन नहीं लगा तो पत्रकारिता में लौट आए। उन्होंने ही बिहार-झारखंड में प्रभात खबर अखबार को खड़ा किया। 

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