जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक प्रोटेस्टर निशु के पिता पर हमला करने वाले हिंदुत्व एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज का दुस्साहस देखिए। एक पॉडकास्ट में खुलेआम दावा किया, 'निशु के पिता का सिर फोड़ा। 60 टांके लगे थे। हाफ मर्डर का मामला था। कपिल मिश्रा का कॉल आ गया, छोड़ दिया गया।'
जंतर मंतर प्रोटेस्टरों पर हमला करने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ छात्रों पर लाठियों से हमला करने वाले सादे कपड़ों में हिंदुत्व एक्टिविस्ट याद हैं? उन्हीं में से एक हिंदुत्व एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज का दुस्साहस देखिए। अब एक पॉडकास्ट में खुलेआम कह रहा है कि एक प्रोटेस्टर निशु के पिता का सिर फोड़ा, 60 टांके लगे थे। वह कह रहा है कि बंदा एंबुलेंस में मरने की स्थिति में था और धारा 307 के तहत हाफ मर्डर का मामला बनता था, फिर भी जेल नहीं गया। भारद्वाज यहाँ तक कहता है कि 'कपिल मिश्रा का कॉल आ गया तो छोड़ दिया गया। कपिल मिश्रा मेरे भाई हैं, चिराग पासवान भाई हैं, मोदी बड़े भाई हैं। ...हम बिना फॉर्म भरे दिल्ली पुलिस बनकर चलते हैं, हमारे पास सब है दिल्ली पुलिस का।'
यह पूरा मामला जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र और युवा प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान एक प्रोटेस्टर निशु के पिता पर हमले का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसकी वजह एक वायरल पॉडकास्ट है, जिसमें खुद को हिंदुत्व कार्यकर्ता बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया है कि उसने प्रदर्शनकारी निशु के पिता के सिर पर हमला किया था, लेकिन उसे जेल तक नहीं जाना पड़ा। उसने यह भी दावा किया कि उसे कुछ बीजेपी नेताओं का 'आशीर्वाद' और समर्थन प्राप्त है। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पॉडकास्ट में क्या दावा किया गया?
यूट्यूब पर उपलब्ध एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज कहता सुनाई देता है कि उसने प्रदर्शनकारी निशु के पिता के सिर पर हमला किया था, जिसमें उन्हें गंभीर चोट आई और कई टांके लगे। वीडियो में वह दावा करता है कि इस मामले में उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) जैसा गंभीर मामला बन सकता था, लेकिन वह जेल नहीं गया और अगले ही दिन बाहर घूम रहा था। भारद्वाज ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसके 'बड़े भाई' जैसे हैं और उसे उनका समर्थन प्राप्त है।दिल्ली पुलिस जैसी वर्दी और सामान होने का भी दावा
पॉडकास्ट के दौरान जब एंकर ने पूछा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उसके हाथ में पुलिस जैसी लाठी कहां से आई तो भारद्वाज ने दावा किया कि उसके पास दिल्ली पुलिस के जूते और अन्य सामान हैं। उसने कहा कि वह बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के दिल्ली पुलिस की तरह घूमता है और उसके पास पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी हैं।
हालाँकि, भारद्वाज के इन दावों की भी किसी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। लेकिन सोशल मीडिया पर इसके वीडियो बयान को साझा करते हुए पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया जा रहा है।सीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने इस वीडियो के बाद दिल्ली पुलिस और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दास का कहना है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दलित निशु के पिता संजय के सिर में गंभीर चोट लगी थी और उनके अनुसार मामले में हत्या के प्रयास (धारा 307) का मामला दर्ज होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर यह धारा नहीं लगाई ताकि आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी न हो।
दास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब उन्होंने कम से कम गंभीर चोट से संबंधित धाराएं लगाने की मांग की तब भी पुलिस अधिकारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और कह दिया कि 'अदालत जाओ'।
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अब भारद्वाज खुलेआम दुस्साहस कर रहा है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने पुलिस पर दबाव डालकर उसे पुलिस स्टेशन से छुड़वाया और उस पर कोई ऐसी सख़्त धारा नहीं लगवाई जिससे उसकी गिरफ़्तारी हो सकती थी!
'कपिल मिश्रा का नाम भी FIR में आए'
सौरव दास ने कहा कि यदि पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा किए गए दावे सही हैं तो यह साफ़ किया जाना चाहिए कि क्या वास्तव में किसी मंत्री ने पुलिस कार्रवाई को प्रभावित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी जनप्रतिनिधि ने पुलिस पर दबाव डालकर आरोपी को बचाने की कोशिश की तो इसकी जाँच क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूछा,'तो हमें बताएं कि मिश्रा को FIR में सह-आरोपी क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने न्याय की प्रक्रिया में गैर-कानूनी तरीके से दखल दिया? गैंग के सदस्यों को बचाने और अपने पद का गलत इस्तेमाल करने के लिए उन्हें इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए? क्या बीजेपी का नेतृत्व इसका समर्थन करता है?'
अन्य आरोपियों की पहचान नहीं
सीजेपी का आरोप है कि हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान भी अब तक नहीं की गई है, जबकि सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए थे जिनमें कथित तौर पर कुछ लोग हमले के बाद धमकी भरे संदेश देते दिखाई दिए।
पार्टी नेता आशुतोष रांका ने भी दावा किया कि पुलिस ने उस समय जो जानकारी दी थी वह अब वायरल वीडियो के दावों से मेल नहीं खाती। उन्होंने दिल्ली पुलिस से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस वीडियो को साझा करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुलेआम यह दावा कर रहा है कि उसने गंभीर हमला किया और फिर भी जेल नहीं गया, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।जंतर-मंतर प्रदर्शन में क्या हुआ था?
20 जुलाई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के विरोध में हजारों छात्र और युवा संगठनों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किया। इसी दौरान कुछ सादे कपड़ों में मौजूद लोग भी पुलिस जैसी लाठियां लेकर प्रदर्शनकारियों को मारते हुए दिखाई दिए थे। इस घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को वीडियो साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।
दिल्ली पुलिस ने पहले क्या कहा था
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा था कि सादे कपड़ों में मौजूद लोग वास्तव में पुलिस के 'स्पॉटर्स' थे, जिन्हें स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस से लाया गया था। इन्हें भीड़ के भीतर स्थिति पर नज़र रखने के लिए तैनात किया गया था। पुलिस के अनुसार, बड़ी सार्वजनिक सभाओं के दौरान इस तरह की तैनाती सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है और इसमें कोई अवैधता नहीं है।प्रोटेस्टरों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द
इसी बीच 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ देशभर में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के संबंध में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। हालांकि गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े कुछ आरोपियों के संबंध में अलग कार्रवाई की अनुमति दी गई है।
स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो ने पूरे मामले को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दल और आंदोलन से जुड़े संगठन वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पॉडकास्ट में लिए गए नेताओं के नामों और अन्य दावों पर अभी तक संबंधित पक्षों या जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की आगे की जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार किया जा रहा है।