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इतिहासकार रोमिला थापर ने की वरवर राव की रिहाई की माँग, एनआईए को लिखी चिट्ठी

मशहूर इतिहासकार रोमिला थापर और राजनीतिक विश्लेषक प्रभात पटनायक ने  जनकवि वरवर राव को तुरन्त जेल से रिहा करने की माँग करते हुए महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी को एक चिट्ठी लिखी है। वरवर राव गंभीर रूप से बीमार हैं और नवी मुंबई के पास तलोजा तेल में क़ैद हैं।
रोमिला थापर ने अपने ख़त में कहा है कि मौजूदा स्थितियों में राव को जेल में रखना 'न क़ानूनी रूप से सही है न ही नैतिक रूप से।'
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इलाज कराए सरकार

इन लोगों ने यह भी माँग की है कि राव का इलाज जे.जे. अस्पताल में कराया जाए। चिट्ठी में कहा गया है, 'इसका कोई ख़तरा नहीं है कि राव हवाई जहाज़ से उड़ कर कही चले जाएंगे, वह अपनी इच्छा से पिछले 22 महीनों से हर तरह की जाँच में सहयोग कर रहे हैं। न क़ानूनी रूप से न ही नैतिक रूप से यह उचित है कि उन्हें इन स्थितियों में जेल में रखा जाए जिससे पहले से ख़राब उनका स्वास्थ्य और बिगड़ जाए।'
बता दें कि जनकवि राव को भीमा कोरेगाँव मामले में गिरफ़्तार किया गया। लेकिन 22 महीने बाद भी उनके ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा अब तक शुरू नहीं किया गया है।  

निष्पक्ष जाँच की माँग

इस चिट्ठी में कहा गया है कि 'जिस समय राव को गिरफ़्तार किया गया, उसी समय कहा गया था कि मामले की जाँच जल्द से जल्द की जानी चाहिए, यह निष्पक्ष और शीघ्र होनी चाहिए, पर ऐसा नहीं हुआ।'
पुणे के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हुई हिंसा और उसके बाद उससे जुड़े लोगों की गिरफ़्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने इसके पीछे अर्बन नक्सल के शामिल होने की बात कही थी।

मामला क्या है?

इस मामले में के. पी. वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा और वरनोन गोन्जाल्विस के नाम आए थे।
उस समय भी इतिहासकार रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक और देवकी जैन, समाजशास्त्र के प्रो. सतीश पांडे और मानवाधिकार कार्यकर्ता माजा दारूवाला ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर इनकी तत्काल रिहाई और  गिरफ़्तारी की स्वतंत्र जाँच कराने का अनुरोध किया था। 

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