असम के जोरहाट हवाई अड्डे (एयरबेस) पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हुआ। भारतीय वायुसेना (IAF) का एक AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग (उतरते) करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, इस दुखद हादसे में वायुसेना के 5 कर्मियों की जान चली गई है, जबकि विमान के सह-पायलट (co-pilot) सुरक्षित बच गए हैं और उनका इलाज चल रहा है। इस दुर्घटना ने भारतीय वायुसेना (IAF) के इस पुराने और भरोसेमंद 'वर्कहॉर्स' के सुरक्षा रिकॉर्ड और इसके इतिहास को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

विमान का इतिहास

एंतोनोव एएन-32 (Antonov An-32) एक सोवियत मूल का ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप परिवहन विमान है। इसे विशेष रूप से भारतीय वायुसेना की मांगों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि यह अत्यधिक गर्म मौसम और पहाड़ी इलाकों के ऊंचे हवाई पट्टियों (Advanced Landing Grounds) पर आसानी से काम कर सके।
भारत ने इसे 1984 में पूर्व सोवियत संघ से खरीदना शुरू किया था। तब से यह वायुसेना के सामरिक परिवहन बेड़े की रीढ़ बना हुआ है। यह विमान 6.7 टन तक माल या 50 सैनिकों को ले जाने में सक्षम है। करगिल युद्ध (1999) और ऑपरेशन पराक्रम में सीमावर्ती क्षेत्रों तक रसद और जवानों को पहुंचाने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। साल 2009 में इन विमानों के आधुनिकीकरण के लिए यूक्रेन की कंपनी एंतोनोव के साथ 400 मिलियन डॉलर का अनुबंध हुआ था। हालांकि, 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के विलय के बाद जियो पोलिटिकल तनाव के कारण यह अपग्रेड कार्यक्रम प्रभावित हुआ, जिससे इसके कलपुर्जों (spare parts) की आपूर्ति में दिक्कतें आईं।
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जोरहाट हादसा: 13 जून को क्या हुआ था? 

13 जून 2026 को सुबह करीब 10 बजे, 43 स्क्वाड्रन के एक एएन-32 विमान ने जोरहाट से चाबुआ के लिए एक पैराड्रॉप सॉर्टी (रूटीन मिशन) के लिए उड़ान भरी थी। टेक-ऑफ के कुछ ही समय बाद, तकनीकी खराबी या आपात स्थिति के कारण विमान ने वापस लैंडिंग का अनुरोध किया। असम के रोवरिया (Rowriah) स्थित जोरहाट एयरबेस पर उतरते समय विमान रनवे से भटक गया (veered off), पैरेलल टैक्सीवे को पार कर गया और दो टुकड़ों में टूटकर आग की चपेट में आ गया। इस दर्दनाक हादसे में वायुसेना के 5 कर्मियों (स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम) ने अपनी जान गंवा दी। विमान के सह-पायलट (co-pilot) इस हादसे में सुरक्षित बच गए हैं और गंभीर स्थिति में उनका इलाज चल रहा है।

एएन-32 के पिछले बड़े हादसे

पिछले एक दशक में एएन-32 विमानों के साथ कई गंभीर हादसे हुए हैं, जिनमें से उत्तर-पूर्व का इलाका और विशेष रूप से जोरहाट का गहरा संबंध रहा है: 
  • 2009 पश्चिम सियांग, अरुणाचल प्रदेश में 13 मृत। रोवरिया (जोरहाट) से उड़ान भरने के बाद विमान पहाड़ी इलाके में क्रैश हो गया था। 
  • 2016 बंगाल की खाड़ी (चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर) में 29 मृत। विमान समुद्र के ऊपर लापता हो गया था। लगभग 8 साल बाद जनवरी 2024 में समुद्र की गहराई में इसका मलबा मिला।
  • 2019 जोरहाट से मेचुका (अरुणाचल प्रदेश) में 13 मृत। विमान ने जोरहाट से ही उड़ान भरी थी और खराब मौसम व पहाड़ी इलाके के कारण क्रैश हो गया। 8 दिन बाद इसका मलबा मिला था।
  • 2025 बागडोगरा, पश्चिम बंगाल में लैंडिंग के समय विमान पूरी तरह नष्ट हो गया था, लेकिन सौभाग्य से सभी चालक दल सुरक्षित बच गए थे।

ताजा हादसा और अतीत में क्या संबंध है?

जोरहाट के 13 जून को नए हादसे और एएन-32 के पुराने इतिहास का विश्लेषण करने पर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आते हैं:
जोरहाट एयरबेस का रणनीतिक और भौगोलिक केंद्र होना
उत्तर-पूर्व के पहाड़ी इलाकों (जैसे अरुणाचल प्रदेश के मेचुका, टूटिंग आदि Advanced Landing Grounds) के लिए जोरहाट सबसे मुख्य लॉन्चिंग पैड है। 2009, 2019 और अब 2026 का हादसा- इन तीनों का जुड़ाव सीधे तौर पर जोरहाट बेस से रहा है। इस क्षेत्र का कठिन भूगोल और अचानक बदलने वाला मौसम लैंडिंग और टेक-ऑफ को हमेशा चुनौतीपूर्ण बनाता है।

क्रैश का पैटर्न: पहाड़ियां बनाम रनवे

जहां 2009 और 2019 के हादसे 'CFIT' (Controlled Flight Into Terrain) यानी खराब दृश्यता (poor visibility) के कारण विमान का सीधे पहाड़ों से टकरा जाना थे, वहीं 2026 का यह हादसा लैंडिंग के दौरान रनवे पर हुआ है। यह सीधे तौर पर किसी यांत्रिक विफलता (mechanical failure), संरचनात्मक खराबी (structural breakdown) या लैंडिंग गियर की समस्या की ओर इशारा करता है।

विमान के पुराने होते बेड़े (Aging Fleet) का संकट

एएन-32 पिछले 40 से अधिक वर्षों से सेवा में है। हालांकि यह एक बेहद मजबूत डिजाइन वाला विमान है, लेकिन समय के साथ 'मेटल फटीग' (धातु की थकावट या कमजोरी) और पुराने पड़ चुके एवियोनिक्स के कारण इस पर दबाव बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन विवाद के कारण इसके अपग्रेड में हुई देरी ने भी इसकी मेंटेनेंस साइकिल को प्रभावित किया है।
वायुसेना ने इस हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' (Court of Inquiry) के आदेश दे दिए हैं। यह हादसा इस बात की ज़रूरत को और मजबूत करता है कि वायुसेना के परिवहन बेड़े में एएन-32 की जगह नए विमानों (जैसे स्पेनिश मूल के Airbus C-295, जिन्हें वायुसेना में शामिल किया जा रहा है) के प्रतिस्थापन (replacement) की प्रक्रिया को और तेज किया जाए, ताकि भविष्य में हमारे बहादुर जांबाज सुरक्षित रह सकें।