जम्मू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM Jammu) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं होने वाले छात्रों पर कथित तौर पर जुर्माना लगाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया है कि संस्थान के छात्रों को 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर आयोजित आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य किया गया था और गैरहाज़िर रहने वालों से लिखित जवाब मांगा गया या 500 रुपये का जुर्माना भरने को कहा गया।
कांग्रेस सांसद ने इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कथित तौर पर IIM जम्मू के छात्र परिषद की ओर से जारी एक नोटिस साझा किया है। नोटिस में छात्रों से उनकी अनुपस्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जवाब जमा करने की समयसीमा शुक्रवार रात तक रखी गई थी।

'PM मोदी के जन्मदिन समारोह में उपस्थिति अनिवार्य क्यों?'

सैयद नसीर हुसैन ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के कार्यक्रम में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य क्यों की गई। उन्होंने X पर लिखा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन समारोह में शामिल होना छात्रों की अकादमिक जिम्मेदारी है?
उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों का काम छात्रों में स्वतंत्र सोच को विकसित करना है, न कि राजनीतिक नेताओं के जन्मदिन समारोह में उनकी अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करना। हुसैन ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के प्रचार कार्यक्रमों को देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से दूर रखा जाना चाहिए।
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मेडिकल कारण के लिए भी विशेष दस्तावेज की शर्त

कांग्रेस सांसद द्वारा साझा किए गए कथित ईमेल/नोटिस के स्क्रीनशॉट के अनुसार, कार्यक्रम को सभी छात्रों के लिए अनिवार्य बताया गया था।
इसमें कथित तौर पर कहा गया था कि अनुपस्थिति से छूट केवल मेडिकल आधार पर दी जाएगी। इसके लिए Sanjeevni से आधिकारिक मेडिकल नोट जरूरी बताया गया था, जिसमें संबंधित अवधि के लिए बेड रेस्ट की सिफारिश होनी चाहिए। आवश्यक दस्तावेज के बिना मेडिकल कारण को अनुपस्थिति से छूट के लिए स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई थी।

IIM जम्मू ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी

इस आरोप पर IIM जम्मू की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। द टेलीग्राफ ने संस्थान के निदेशक और अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की है। हालांकि, IIM जम्मू के आधिकारिक अकादमिक कैलेंडर में छात्र परिषद द्वारा आयोजित कुछ कार्यक्रमों के बारे में यह उल्लेख है कि सभी छात्रों को उनमें भाग लेना होता है। संस्थान के एक उपलब्ध छात्र हैंडबुक में भी कुछ आयोजनों में अनुपस्थिति, देर से पहुंचने और अन्य नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने के प्रावधान दर्ज हैं।

17 सितंबर को हुआ था आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को मनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम 7 बजे दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में उनके 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे महीने भर के 'सेवा संकल्प अभियान' का हिस्सा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा शासित कई राज्यों में इस अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए। कुछ राज्यों में सरकारी आदेशों का असर निजी शिक्षण संस्थानों तक भी पहुंचा।

सरकारी कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लेकर भी शिकायतेंः रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ भाजपा शासित राज्यों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी शिकायत की थी कि उन्हें अपने कार्यस्थल पर शाम तक रुकने और दीप प्रज्वलन कार्यक्रम की तस्वीरें भेजने के लिए कहा गया था।

IIM जम्मू प्रकरण में फिलहाल मुख्य विवाद यह है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े एक कार्यक्रम में छात्रों की उपस्थिति किस आधार पर अनिवार्य की गई और अनुपस्थित रहने पर जुर्माना या स्पष्टीकरण की मांग किस नियम के तहत की गई।

IIM जम्मू का बयान

आईआईएम जम्मू के छात्र मामलों के अध्यक्ष ब्रिगेडियर नीरज सोनी ने कहा कि किसी भी छात्र पर जुर्माना नहीं लगाया गया। सोनी ने द टेलीग्राफ को बताया, “यह हमारा आम उपाय है, जैसे स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती पर। इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। हम जुर्माने के मामले में बिल्कुल भी सख्त नहीं हैं। इस बार भी किसी छात्र पर जुर्माना नहीं लगाया गया।” उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को शाम 7 बजे दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम, बीजेपी द्वारा मोदी के 76वें जन्मदिन और मुख्यमंत्री बनने के बाद से सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे महीने भर चलने वाले “सेवा संकल्प अभियान” के अनेक कार्यक्रमों में से एक था। राजस्थान जैसे बीजेपी शासित कई राज्यों में, सरकारी “आदेश” निजी शिक्षण संस्थानों पर भी लागू किया गया।