इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दहाड़ा और उन्हें सीधे-सीधे चोर-डाकू कह दिया। ममता ने ज्ञानेश कुमार को ‘वैनिश कुमार’ पुकारते हुए उन पर वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए और तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने साफ़ कह दिया कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन करेगा।

बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों को लोकतंत्र से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि इंडिया गठबंधन इस मामले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संयुक्त आंदोलन का ऐलान किया। विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और जिला स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। इस घोषणा के दौरान ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ बड़ा हमला किया।
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‘वैनिश कुमार चोर, डाकू है’- ममता

इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखे शब्दों में हमला किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा।
 
ममता के मुताबिक, 'वैनिश कुमार चोर है, डाकू है। उसने लोगों का वोट चोरी किया।' उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत से अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। ममता ने यह भी दावा किया कि EVM मशीनों को जलाया गया और मतगणना में गड़बड़ी की गई।
उन्होंने कहा कि देश में एक बड़ा 'SCAM' हुआ है और इसका नुक़सान आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनके मुताबिक़, यदि CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष मिलकर ‘वोट चोरी’ के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगा। ममता ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई सिर्फ किसी एक पार्टी के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। हालाँकि, ये सभी आरोप विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर अपनी प्रक्रियाओं को क़ानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के तहत चलाए जाने की बात कही है।

‘वैनिश कुमार’ क्यों कहा?

ममता बनर्जी पहले भी ज्ञानेश कुमार के लिए ‘वैनिश कुमार’ नाम का इस्तेमाल कर चुकी हैं। सितंबर के आखिर में उन्होंने कहा था कि उन्होंने यह नाम इसलिए दिया क्योंकि उनके आरोप के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में मतदाता सूची से लोगों के नाम 'गायब' हुए हैं। SIR को लेकर विपक्ष का मुख्य आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव और नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
इसी विवाद के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची और चुनावी डेटाबेस से जुड़े फ़ैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज की थीं। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल और तेज कर दिए हैं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला: राहुल

INDIA गठबंधन की बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि बैठक में ‘वोट चोरी’ से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। राहुल गांधी के मुताबिक़ गठबंधन के नेताओं की यह राय है कि बीजेपी, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना INDIA गठबंधन के नेताओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का पद या राजनीतिक हैसियत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, लोकतंत्र उससे बड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने लोगों के सामने यह मुद्दा रखने में सफलता हासिल की है कि चुनावों में कथित तौर पर गड़बड़ी हो रही है। राहुल ने यह भी कहा कि खासकर युवाओं के बीच इस मुद्दे को लेकर एक नया प्रतिरोध दिखाई दे रहा है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से संविधान के 'सामूहिक रक्षक' के रूप में काम करने की अपील भी की।

तेजस्वी यादव क्या बोले?

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बैठक से पहले कहा कि इंडिया गठबंधन की बैठक चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि बैठक में चुनाव के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग के भीतर उठाए गए सवालों पर चर्चा होगी।

तेजस्वी के बयान के मुताबिक़, विपक्षी दलों के सामने अब मुख्य सवाल यह है कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े बदलाव किस तरह हुए और उनकी जवाबदेही किसकी है।

चुनाव आयुक्त भी सवाल उठा रहे हैं: अभिषेक बनर्जी

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अब तक राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की बात करते थे, लेकिन अब चुनाव आयोग के भीतर से भी सवाल सामने आ रहे हैं।
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अभिषेक बनर्जी ने कहा कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने मुद्दे उठाए हैं, इसलिए इन सवालों में 'कुछ तो सच्चाई' होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में गड़बड़ियाँ हो रही हैं और पश्चिम बंगाल में यह समस्या ज्यादा दिखाई दे रही है। यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में था जिनमें चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियों की बात कही गई है।

एनसीपी-एसपी नेता जितेंद्र आव्हाड का कहना है कि इंडिया गठबंधन की बैठक में ईवीएम को लेकर बढ़ती चिंताओं और वोटर लिस्ट में बदलावों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि बैठक में बंगाल और बिहार में सत्ता में बैठे लोगों की जीत पक्की करने में चुनाव आयोग की भूमिका के आरोपों पर भी बातचीत हुई।

उन्होंने कहा, 'ईवीएम को लेकर लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा है। वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों और जिस तरह से वोटरों के नाम हटाए गए, उस पर चर्चा हुई। इस बात पर भी चर्चा हुई कि चुनाव आयोग ने बंगाल और बिहार में सत्ता में बैठे लोगों की जीत पक्की करने के लिए कैसे काम किया। मैं लंबे समय से कह रहा हूं कि इंसान की बनाई किसी भी मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, उसे हैक किया जा सकता है। किसी भी चुनावी सिस्टम में इंसान की बनाई मशीनें सबसे खतरनाक चीज़ होती हैं।'
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SIR बना INDIA गठबंधन की एकजुटता का मुद्दा

INDIA गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर अलग-अलग दलों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे ने फिलहाल विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाने का काम किया है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था है और किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से विपक्ष SIR की प्रक्रिया, मतदाता नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर जवाबदेही की मांग कर रहा है।

इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद यह साफ़ हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR का मुद्दा अब विपक्ष के संयुक्त राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनने जा रहा है।

ममता बनर्जी ने जहां सीधे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, वहीं राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जोड़ा है। खड़गे ने आंदोलन की तारीख़ों का ऐलान कर दिया है। इस तरह आने वाले दिनों में ‘वोट चोरी’, SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।