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12 घंटे तक भारत-चीन के कमांडर्स के बीच चली बैठक, आज भी होने की संभावना

भारत और चीन के कमांडर्स के बीच सोमवार को 12 घंटे तक बैठक चली। गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए सेनाओं के कमांडर्स के बीच बैठकों का दौर चल रहा है। गलवान घाटी में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। 

सोमवार को चीन के इलाक़े मोल्डो में दोनों देशों के कमांडर्स के बीच सुबह 11.30 बजे बैठक शुरू हुई और यह रात 11.30 बजे तक चली। भारत की ओर से लेफ़्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन की ओर से तिब्बत के सैन्य कमांडर ने इसमें हिस्सा लिया। 

इससे पहले 6 जून को भी इसी इलाक़े में दोनों देशों के कमांडर्स के बीच बैठक हो चुकी है। तब दोनों देश इस इलाके से धीरे-धीरे हटने पर सहमत हो गए थे। लेकिन उसके बाद 15 जून को हिंसक झड़प हो गई और तब से माहौल तनावपूर्ण है। 

भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच इस तरह की ख़बरें आई हैं कि एलएसी के दोनों ओर बड़ी संख्या में दोनों देशों के सैनिक अपने साजो-सामान के साथ इकट्ठे हो गए हैं। भारत ने तो अपने हताहत सैनिकों के आंकड़े जारी कर दिए लेकिन चीन ने अभी तक ऐसा नहीं किया है। इसे लेकर चीनी लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं और भारत से सबक लेने की सीख दे रहे हैं। 

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इस बीच तीनों सेनाओं सहित वायु सेना को भी अलर्ट पर रखा गया है। वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कुछ दिन पहले लेह पहुंचकर हालात का जायजा लिया है और उनकी चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख एमएम नरवणे के साथ बातचीत हो चुकी है। 

‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमान मिराज 2000 के बेड़े को लद्दाख के नजदीक एयरबेस में खड़ा कर दिया है, जहां से यह कुछ ही मिनटों में पैंगोंग त्सो और अन्य इलाक़ों में उड़ान भर सकता है। 

मिराज 2000 के अलावा सुखोई -30 एमकेआई और जगुआर लड़ाकू विमानों के बेड़े को भी एडवांस पोजिशन में रखा गया है, जिससे ये तुरंत ऑपरेशन को अंजाम दे सकें।

सीमाएं निर्धारित न होने से विवाद

दोनों देशों के बीच लगभग चार हजार किमी. लम्बी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कई इलाक़ों पर अक्सर एक-दूसरे के सैनिकों द्वारा अतिक्रमण की वारदात होती हैं जिन्हें आम तौर पर आपसी बातचीत के द्वारा निपटा लिया जाता है। अतिक्रमण की वारदात इसलिए होती हैं क्योंकि दोनों देशों की सीमाएं निर्धारित नहीं हैं और दोनों की इसे लेकर अपनी-अपनी धारणाएं हैं।

सीमाओं पर गश्त के दौरान जब सेनाएं एक-दूसरे के मान्यता वाले इलाक़े में जानबूझ कर या ग़लती से प्रवेश कर जाती हैं तो सैनिकों के बीच कुछ तनातनी होती है और फिर ध्वज बैठकों के द्वारा मसलों को सुलझाने की कोशिश की जाती है। 

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