भारत सरकार ने ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर 11 भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से 10 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। उसकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ओमान की सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और लापता भारतीय की खोज के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर हुए हमले के बाद भारतीय दूतावास राहत और बचाव अभियान पर लगातार नजर रखे हुए है और ओमान सरकार के साथ समन्वय कर रहा है। भारत ने बचाव कार्य में सहयोग के लिए ओमान सरकार का आभार भी जताया है।
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अमेरिकी हमले के बाद चुप्पी पर उठे थे सवाल

जिस तरह का हमला होर्मुज में ओमान के तट के पास अभी हुआ है, उसी तरह का हमला पिछले महीने हॉर्मुज क्षेत्र में हुआ था। तब हमला अमेरिकी सेना ने किया था। उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत की ख़बर भी सामने आई थी। उस मामले को लेकर सरकार के रुख पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे।

अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने पर चुप्पी साधने का आरोप झेल रहे पीएम मोदी फ्रांस में G7 सम्मेलन से अलग जब डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे तो बोले कि 'भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे अहम है'। राहुल गांधी और बाक़ी विपक्षी नेता मांग कर रहे थे कि पीएम मोदी ट्रंप के सामने भारतीयों की मौत की निंदा करें और कड़ा विरोध जताएँ। लेकिन पीएम का जो बयान सामने आया था उसमें ऐसा कुछ नहीं था।

विपक्ष ने बनाया था दबाव

विपक्षी दलों ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर अमेरिका के खिलाफ सख्ती से आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने लगातार मांग की कि पीएम को इस मुद्दे को मज़बूती से उठाना चाहिए था।

अमेरिकी हमले में भारतीय की मौत की सरकार द्वारा निंदा नहीं किए जाने पर विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी पीएम पर हमला करने में बेहद आक्रामक रहे। ट्रंप-मोदी की मुलाक़ात से पहले राहुल ने पीएम को 'आज्ञाकारी नौकर जैसा' क़रार दिया था।

भारतीय नाविकों की मौत के मामले में 'चेतावनी' वाले अमेरिकी बयान को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि एक आजाद देश कभी भी ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन हमारे 'कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री' चुप हैं। राहुल गांधी ने तब एक्स पर लिखा था, "अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

उल्टे अमेरिका ने 'चेताया' था भारत को!

राहुल ने यह हमला तब किया था जब अमेरिकी हमलों की निंदा करने वाले एस जयशंकर के बयान के कुछ घंटे बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया था। डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा था कि मार्को रुबियो ने जयशंकर से बात की और जोर दिया कि सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। टॉमी पिगॉट ने शनिवार को कहा था, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वे इस जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'

अब भारतीय निशाना कैसे बने?

बहरहाल, अब शनिवार को फिर से भारतीय निशाना बने। रिपोर्टों के अनुसार जीएफएस गैलेक्सी पर उस समय हमला हुआ जब वह ओमान तट के पास समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। इस पर भारतीय नाविक थे। ईरान ने दावा किया कि उसके सुरक्षा बलों ने जहाज पर 'चेतावनी स्वरूप गोलीबारी' की क्योंकि जहाज कथित तौर पर निर्धारित समुद्री मार्ग से अलग रास्ते पर जा रहा था। इसके बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज छोड़कर समुद्र में उतरना पड़ा। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

हॉर्मुज में फिर बढ़ा तनाव

यह घटना तब हुई है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। ईरान ने घोषणा की है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद कर दिया है। इसके कुछ ही समय बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए नए हवाई हमले किए। अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में उसने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन अड्डों, नौसैनिक क्षमताओं, गोला-बारूद भंडार और निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया। इस पर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है।

ईरान ने किए जवाब हमले

अमेरिका की बमबारी के बाद ईरान ने भी बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान और कतर पर हमला किया है। इसका कहना है कि इसने इन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस घटना के जवाब में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो उसका 'कड़ा जवाब' दिया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया।

भारत ने तनाव कम करने की अपील की

भारत ने केवल हमले की निंदा ही नहीं की, बल्कि पूरे क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव पर भी चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में लगातार वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए और नागरिक जहाजों तथा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ता है या समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

बहरहाल, अब ओमान तट पर हुए इस ताज़ा हमले के बाद भारत सरकार ने औपचारिक रूप से घटना की निंदा करते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। फिलहाल भारतीय दूतावास और ओमान के अधिकारी लापता भारतीय नाविक की तलाश में जुटे हुए हैं। सरकार ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।