हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार का निर्णय सिंधु जल बंटवारे पर पाकिस्तान के अड़ियल रवैये पर उसकी चिढ़ और सीमा पार से जारी आतंकवादी हमलों पर बढ़ते गुस्से दोनों को दर्शाता है। यह भावना बढ़ती जा रही है कि 1960 की संधि पाकिस्तान संबंधों के प्रति अनावश्यक रूप से सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ हुई थी। हालाँकि बाद की घटनाओं ने भारत के प्रति गहरी शत्रुता को उजागर किया है, जो सबसे स्पष्ट रूप से आतंकवाद के समर्थन में व्यक्त की गई है।