भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति असिफ अली जरदारी के भारत में मुस्लिम ऐतिहासिक धर्मस्थलों पर कथित खतरे वाले बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जरदारी को भारत के आंतरिक मामलों पर कोई टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए।

मीडिया में पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बयान पर पूछे गए सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा, 'भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति के अनुचित और बेतुके बयानों को पूरी तरह खारिज करता है। उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर कोई टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। ये टिप्पणियाँ इसलिए भी बेतुकी हैं क्योंकि पाकिस्तान का खुद का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद खराब है। दुनिया भर में यह कुख्यात है कि पाकिस्तान में अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है और उनके साथ अत्याचार किए जाते हैं। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के राष्ट्रपति का बयान सिर्फ एक जानबूझकर किया गया राजनीतिक हमला है। यह पाकिस्तान की कट्टरता और नफरत की नीतियों का नतीजा है।'

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति

भारत के विदेश मंत्रालय का यह बयान इसलिए आया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद चिंताजनक और खराब बनी हुई है। 2025-2026 में भी हिंसा, जबरन धर्मांतरण, ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग जारी रहने की ख़बरें आती रही हैं। सबसे ज्यादा निशाना अहमदी बनते रहे हैं। उन्हें संवैधानिक रूप से गैर-मुस्लिम घोषित किया गया है। 2025 में कई डॉक्टरों और आम लोगों की टारगेट किलिंग, धार्मिक स्थलों पर हमले, तोड़फोड़ और कब्रिस्तानों की बेअदबी की ख़बरें आईं। भीड़ हिंसा को लेकर टीएलपी जैसे संगठनों के नाम आते रहे हैं। पिछले कुछ दशकों से अब तक सैकड़ों अहमदी मारे जा चुके हैं।

ईसाई भी ब्लास्फेमी के झूठे आरोपों से काफी ज़्यादा प्रभावित हैं। मॉब लिंचिंग, चर्चों पर हमले, घर जलाना, सैनिटरी वर्कर्स पर टारगेटेड हिंसा की ख़बरें आती रही हैं। 2025-26 में फैसलाबाद जैसे क्षेत्रों में कई हत्याएँ, हमले और जबरन धर्मांतरण के मामले भी सामने आए। सिंध जैसे क्षेत्रों में हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण, शादी की ख़बरें आती रही हैं। टार्गेटेड हमले और संपत्ति हड़पने के लिए ब्लास्फेमी के इस्तेमाल की रिपोर्टें भी लगातार आई हैं। इसके अलावा सिख के गुरुद्वारों पर हमले, हत्याएँ जैसे मामले भी आए हैं।
ताज़ा ख़बरें
इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना लगातार होती रही है। USCIRF ने पाकिस्तान को बार-बार 'कंट्री ऑफ़ पार्टिकुलर कंसर्न' की सिफारिश की। 2026 रिपोर्ट में कहा गया कि 'डर का माहौल और बदतर' हुआ। ब्लास्फेमी कानून और मॉब हिंसा की निंदा की गई। संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच जैसे संगठनों ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद ख़राब होने पर लगातार चिंता जताई है।

जरदारी ने क्या कहा था?

इस बीच, पाकिस्तान ने भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकार और इनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को लेकर आपत्ति उठाई। पाकिस्तान राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, असिफ अली जरदारी ने भारत में मुस्लिम ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के विध्वंस और खतरे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित 1000 साल पुरानी गंज शहीदा मस्जिद का ज़िक्र किया। जरदारी ने भारत से अपील की कि 'ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोक दिया जाए, वरना इससे भारत का विखंडन और स्थायी अराजकता हो सकती है'। उन्होंने 'अल्पसंख्यक अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा' की मांग की।

जरदारी का यह बयान क्यों?

दरअसल, भारतीय रेलवे ने गंज शहीदा मस्जिद के कब्जेदारों को 20 जून तक जगह खाली करने का नोटिस दिया है। यह नोटिस काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास प्रोजेक्ट के तहत रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए है। इससे पहले 3 जून को रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित अजगैब शहीद मजार और एक मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद भारी सुरक्षा के बीच तोड़ा गया था। यह जमीन के मालिकाना हक के विवाद में हुआ था। रेलवे का कहना है कि ये कदम स्टेशन को आधुनिक बनाने और विस्तार के लिए ज़रूरी हैं।

भारत का रुख साफ़

भारत ने साफ़ कहा है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति को भारत के आंतरिक मुद्दों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। खासकर तब जब पाकिस्तान खुद अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर दुनिया भर में आलोचना का शिकार रहता है। वैसे, भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर आई कई रिपोर्टों को सरकार गलत बताकर खारिज करती रही है।

बहरहाल, यह ताज़ा घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के समय में आया है, जहां पाकिस्तान अक्सर भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करता रहा है। विदेश मंत्रालय के इस सख्त बयान से भारत की स्थिति पूरी तरह साफ़ है कि वह ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं करेगा। अभी तक पाकिस्तान की ओर से भारत के इस जवाब पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।