भारतीय नाविकों के मारे जाने का मुद्दा गहराने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार देर रात यूएस के विदेश सचिव मार्को रुबियो से फोन पर बात की। कहा- इस तरह की घातक कार्रवाई किसी भी तरह से जायज नहीं है।
भारत के विदेश मंत्री और यूएस के विदेश मंत्री मार्को रुबियो
अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव गहरा हो गया है। इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर भारत ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'पूरी तरह बेबुनियाद' बताया है।
जयशंकर ने रुबियो से फोन पर क्या कहा
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की और इस घटना पर भारत का सख्त विरोध जताया। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा: "मैंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की। खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया है। वाणिज्यिक जहाजों (commercial shipping) के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई किसी भी तरह से जायज नहीं है।"
इससे पहले भारत सरकार ने इस मामले को बेहद 'चिंताजनक' बताते हुए नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी (Charge d'Affaires) को भी दो बार तलब किया था और इस मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन के सामने मजबूती से उठाया था। हालांकि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के दबाव बनाने के बाद सरकार सक्रिय हुई। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान जिस बात पर जताई जा रही है, वो है- प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक भारतीय नाविकों के मारे जाने पर अमेरिका की निन्दा नहीं की। इसीलिए नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि मोदी कम्प्रोमाइज्ड पीएम हैं। राहुल गांधी का कहना है कि मोदी की हिम्मत नहीं है कि वो ट्रंप से कुछ कह सकें।
कैसे हुई नाविकों के मारे जाने की दुखद घटना?
केंद्रीय जहाजरानी मंत्री (Shipping Minister) सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि ओमान के तट के पास पलाऊ के झंडे वाले मालवाहक जहाज 'एमटी सेटेबेलो' (MT Settebello) पर बुधवार को अमेरिकी विमान द्वारा हमला किया गया था। इस जहाज से ओमान के सैन्य बलों ने 21 भारतीयों सहित कुल 25 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया था, लेकिन 3 भारतीय नाविक लापता थे।बाद में उनके शव बरामद होने के बाद उनकी मौत की पुष्टि की गई। सोनोवाल ने इसे 'मैरीन फैमिली के लिए एक अपूरणीय क्षति' बताया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बचाए गए नाविकों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाएं और मृतकों के शवों को सम्मानपूर्वक भारत वापस भेजने की व्यवस्था करें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी क्षेत्र में भारतीय क्रू वाले एक और मर्चेंट वेसल पर भी अमेरिकी हमला हुआ है। कुल मिलाकर एक हफ्ते के भीतर भारतीय चालक दल वाले तीन जहाज अमेरिकी हमलों की चपेट में आ चुके हैं। तीन जहाजों पर अमेरिकी हमले के बावजूद भारत जबरदस्त विरोध करने से कतराया। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की निन्दा करते हुए कोई बयान जारी नहीं किया है। जयशंकर ने शुक्रवार देर रात रुबियो से फोन पर जो बात की है, उसमें भी अमेरिका की निन्दा नहीं की गई है, बल्कि घटना पर विरोध जताया गया है। मोदी अभी भी चुप हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की पैंतरेबाज़ी: ईरान पर मढ़ा हमले का दोष
इस पूरे विवाद के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए ईरान पर आरोप लगाया। ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज (Strait of Hormuz) रास्ते से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ईरान ने ड्रोन हमले किए हैं। ट्रंप ने इसे "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान पर शांति समझौते (Peace Deal) की शर्तों को मीडिया में लीक करने का भी आरोप लगाया। ट्रंप ने यह आरोप तभी लगाया जब भारत में सोशल मीडिया पर लोग अमेरिका के खिलाफ इस घटना पर लिखने लगे। तीन नाविकों की मौत की घटना सामने आने के फौरन बाद ईरान ने अमेरिकी हमले की निन्दा की थी। लेकिन ट्रंप ने उल्टा ईरान को ही इस हमले के लिए जिम्मेदार बता दिया।हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने खुद पुष्टि की थी कि ये हमले अमेरिकी नौसैनिक बलों द्वारा किए गए थे, जिसके बाद ट्रंप के इस बयान पर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान का पलटवार: 'अमेरिका ध्यान भटका रहा है'
भारत में मौजूद ईरानी दूतावास (Iran's Mission in India) ने राष्ट्रपति ट्रंप के इन आरोपों का सोशल मीडिया पर तीखा जवाब दिया है। ईरान ने इसे अपनी गलती छिपाने की अमेरिकी साजिश करार दिया। ईरानी मिशन ने एक्स (X) पर लिखा: "होर्मुज जलडमरूमध्य में एक भारतीय जहाज को लेकर ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। यह जनता का ध्यान इस क्रूर सच्चाई से भटकाने का प्रयास है कि खुद अमेरिका ने एक सप्ताह से भी कम समय में 3 भारतीय जहाजों पर हमला किया और 3 मासूम भारतीय नाविकों की जान ले ली। यह बेहद निराशाजनक और दयनीय है।" यहां यह बताना फिर से ज़रूरी है कि अमेरिकी सेना ने खुद भी माना है कि भारतीय नाविकों की मौत अमेरिकी नेवी के भारतीय जहाज़ पर हमले के दौरान हुई।बहरहाल, खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस तनावपूर्ण युद्ध जैसे माहौल के बीच भारतीय नाविकों की मौत ने भारत सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अब अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों को रोकने के लिए दोनों पक्षों पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है।